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बिहार में जाकर जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने की नये मुख्यमंत्री पर सांकेतिक भविष्यवाणी !

चुनावी रेस में क्या लालू की लालटेन जगमगाएगी, या नीतीश बाबू का तीर लगेगा निशाने पर? या फिर कोई तीसरा ही मार ले जाएगा बाज़ी? इसी को लेकर तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी की जुबान से निकली भविष्यवाणी क्या कहती है? सटीक भविष्यवाणी के लिए प्रसिद्ध जगतगुरु ने इस बार बंद आँखों से किसके चेहरे में देखा है बिहार का भविष्य? इसी पर देखिए हमारी आज की ये विशेष रिपोर्ट.

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बिहार में बिहारियों का नया सरदार कौन? इन दिनों यही एक सवाल लोगों के ज़हन में कौंध रहा है. क्योंकि चाणक्य की धरती पर चुनावी डुगडुगी बजने में महज़ कुछ ही महीनों का समय बचा है. इसी साल के अंतिम महीनों में बिहार को अपना नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा. लेकिन वो नया चेहरा कौन होगा? इसी को लेकर चुनाव की सियासी जंग में हो रही बयानबाज़ी के बीच भविष्यवाणी करने का सिलसिला आरंभ हो चुका है. चुनावी रेस में लालू की लालटेन जगमगाएगी या नीतीश बाबू का तीर निशाने पर लगेगा, या फिर कोई तीसरा ही बाज़ी मार जाएगा? इसी को लेकर तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी की ज़ुबान से हुई भविष्यवाणी क्या कहती है? सटीक भविष्यवाणी करने वालों की सूची में शीर्ष पर माने जाने वाले जगद्गुरु ने इस बार बंद आँखों से किसमें बिहार का भविष्य देख लिया है? इसी पर देखिए हमारी आज की ये विशेष रिपोर्ट.

ख़ुद को युवा बिहारी बताने वाले ये हैं चिराग़ पासवान, जो सारण की धरती से बिहार की 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं. वह एक नये संकल्प के साथ चुनावी रणभूमि में उतर चुके हैं. हालाँकि वह ख़ुद के लिए वोट माँगेंगे, लेकिन NDA में रहकर. ताकि आरजेडी मौक़े का फ़ायदा न उठा पाए और जेडीयू-भाजपा का भी नुक़सान न हो. ठीक इसी तरह आरजेडी भी अपना सियासी एजेंडा सेट कर रही है. लालू की लालटेन दिखाकर, उन्हीं के लाल तेजस्वी यादव अबकी बार NDA को बाहर का रास्ता दिखाने की कोशिश में जुट चुके हैं. इन सबके बीच वर्तमान मुख्यमंत्री को लेकर विरोधी उनके बुढ़ापे को निशाना बना रहे हैं. दरअसल, बिहार के बिहारी बाबू यानी नीतीश कुमार अपने वादे पर अडिग रहे. NDA के साथ रहे, शपथ तक डंटे रहे. अब तक इस पर चर्चा होती रही, लेकिन अब जब बिहारी बाबू के 5 साल पूरे होने जा रहे हैं, तो चुनावी डुगडुगी बजने से पहले ही उनकी कुर्सी ख़तरे में बताई जा रही है. इतिहास गवाह है, हारी हुई बाज़ी को जीतने वाले नीतीश कुमार पिछले 19 सालों से बिहार की सत्ता में हैं. 6 बार भाजपा को छोड़ा और फिर जोड़ा. 2 बार आरजेडी के साथ मिलकर प्रदेश की सत्ता चलाई और फिर किंग मेकर की भूमिका निभाकर वर्तमान में मुख्यमंत्री बने. लेकिन अब यही सत्ता उनके लिए चुनौती बन गई है. जिसकी भविष्यवाणी उन्हीं के एक समय के रणनीतिकार और शुभचिंतक प्रशांत किशोर कर रहे हैं. अपनी भविष्यवाणी पर अडिग जन सुराज पार्टी के कर्ताधर्ता प्रशांत किशोर का साफ़ कहना है कि यदि यह भविष्यवाणी ग़लत साबित हुई, तो वे राजनीति को बॉय-बॉय कह देंगे.

हालाँकि पीके का साफ़ कहना है कि भविष्यवाणी ग़लत होते ही वह ख़ुद राजनीति से संन्यास ले लेंगे. ऐसे में सवाल उठता है कि अबकी बार राजनीतिक संन्यास लेता हुआ कौन दिखेगा? प्रदेश के सुशासन बाबू या फिर ख़ुद पीके? इस पर आप अपने विचार ज़रूर साझा कीजिएगा. फिलहाल इन सबके बीच जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी की भविष्यवाणी क्या कहती है, यह जानना भी आज आपके लिए ज़रूरी है. स्वामी रामभद्राचार्य की राजनीतिक भविष्यवाणियों को नज़रअंदाज़ करना आसान नहीं है, क्योंकि नेताओं के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी अब तक 100 फ़ीसदी सटीक बैठी है. उदाहरण के तौर पर पीएम मोदी, सीएम योगी और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इसके प्रमाण हैं. इसी कड़ी में जगद्गुरु ने अब बिहार चुनाव का भविष्य भी अभी से दिखा दिया है. पटना में आयोजित सनातन महाकुंभ में पहुंचे जगद्गुरु ने धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय बेबाक़ी से रखी. उन्होंने सबसे पहले सनातन विरोधियों को आईना दिखाते हुए कहा कि जो सनातन धर्म को काटना चाहेगा, वह ख़ुद कट जाएगा. इसी के साथ उन्होंने बिहार के भविष्य को लेकर अपनी सांकेतिक भविष्यवाणी में यह भी कहा, "बिहार हिंदुओं को सत्ता नहीं सौंपेगा. सत्ता उसी को मिलेगी जो हिंदुत्व के लिए संघर्ष करेगा. अगला चुनाव निर्णायक होगा. अगले निर्वाचन के पश्चात मैं इसी गांधी मैदान में नौ दिन की कथा कहने के लिए आऊंगा. कान खोलकर सुन लो, जो लोग शरिया क़ानून हटाना चाहते हैं, यहां संभव नहीं है. वक्फ संशोधन क़ानून अब नहीं हटेगा. ट्रिपल तलाक अब नहीं हटेगा. कश्मीर से 370 की धारा नहीं हटेगी. हम सभी हिंदुत्व के पथ पर चलेंगे. यहां न कोई सवर्ण है, न कोई अवर्ण है.” 

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जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ख़ुद को जातिगत जनगणना का विरोधी बताते हैं और केवल हिंदुत्व की चर्चा हो, इसी पर ज़ोर देते हैं. यही कारण है कि वे हिंदू राष्ट्र के सबसे बड़े पैरोकार हैं. वे खुलकर कहते हैं, जब पाकिस्तान मुस्लिम राष्ट्र हो सकता है, जब अमेरिका क्रिश्चियन राष्ट्र हो सकता है, तो हिंदू बहुल यह देश हिंदू राष्ट्र क्यों नहीं हो सकता है. गौर करने वाली बात यह है कि बिहार चुनाव को लेकर जगतगुरु द्वारा 'निर्णायक' शब्द का इस्तेमाल करना यह संकेत देता है कि बिहार को कोई नया चेहरा मिल सकता है, बशर्ते कि वह हिंदुत्व के लिए संघर्ष करे. आज का बिहार, जो कभी मगध साम्राज्य हुआ करता था, जिसकी धरती पर चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक जैसे शासकों ने एक नया इतिहास लिखा था, आज उसी धरती से ख़ुद को हिंदुओं का नेता बताने वाले तो बहुत हैं, लेकिन क्या वास्तव में कोई संघर्ष करने वाला है? अगर है, तो वह चेहरा कौन है?

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