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इटली ने पाकिस्तान में खोजा सनातन का प्रमाण, खुदाई में मिला 1200 साल पुराना विष्णु मंदिर

इस्लामिक देश की चादर ओढ़ने वाले इसी मुल्क में अनगिनत हिंदू मंदिर रहे, लेकिन समय के साथ कट्टरपंथी ताक़तों ने उन्हें या तो ध्वस्त कर दिया या फिर खंडहर में तब्दील कर दिया. बंटवारे से लेकर अब तक मंदिरों की तादाद बढ़ने की बजाए घटती गई, लेकिन कहते हैं ख़ुद की जड़ो को काट पाना इतना आसान नहीं है. तभी तो इटली जैसी क्रिश्चियन कंट्री ने पाकिस्तान को खोदकर 1200 साल पुराना विष्णु मंदिर ढूँढ निकाला है. पाकिस्तान की इस्लामिक ज़मीन से एक बार फिर सनातन के जीवित निशान मिले हैं.

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आज का पाकिस्तान कभी मंदिरों की भूमि हुआ करता था, क्योंकि जिस पाकिस्तान ने इस्लाम को अपनी पहचान बनाया, उसने भारत से अलग होकर अपना अस्तित्व पाया. दुनिया के नक्शे पर मौजूद पाकिस्तान इकलौता ऐसा देश है, जिसकी नींव धर्म के आधार पर रखी गई. इस्लामिक देश की चादर ओढ़ने वाले इसी मुल्क में कभी अनगिनत हिंदू मंदिर थे, लेकिन समय के साथ कट्टरपंथी ताक़तों ने इन्हें या तो ध्वस्त कर दिया या खंडहर में बदल दिया.

इटली की खोज से हिला पाकिस्तान

भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय पाकिस्तान में करीब 428 मंदिर थे, लेकिन अब इनमें से अधिकांश इतिहास बन चुके हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज वहां सिर्फ़ 22 मंदिर ही अस्तित्व में हैं. जिनमें 11 सिंध में, 4 पंजाब में, 4 खैबर पख्तूनख्वा में और 3 बलूचिस्तान में बचे हैं. कई मंदिरों को तोड़कर वहां होटल, दुकानें, मदरसें और रेस्टोरेंट बना दिए गए. इतिहास खुद को दोहराता. इसका उदाहरण हाल ही में पाकिस्तान की धरती पर देखने को मिला. इटली के पुरातत्व विशेषज्ञों ने पाकिस्तान की ज़मीन में खुदाई कर 1200 साल पुराना विष्णु मंदिर खोज निकाला. यह खोज बताती है कि पाकिस्तान की जड़ों में अब भी सनातन संस्कृति जीवित है. जैसे ही यह खबर फैली, पाकिस्तान के राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में हड़कंप मच गया.

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स्वात घाटी से निकला 1200 साल पुराना विष्णु मंदिर

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पाकिस्तान का उत्तर-पश्चिमी इलाका खैबर पख्तूनख्वा की स्वात घाटी, इन दिनों सुर्खियों में है. यहां पाकिस्तान और इटली की संयुक्त पुरातत्व टीम ‘खैबर पाथ प्रोजेक्ट’ के तहत खुदाई कर रही है. इसी खुदाई में 9वीं शताब्दी का विष्णु मंदिर मिला है, जो हिंदू शाही काल का बताया जा रहा है. स्वात घाटी पहले से ही गंधार सभ्यता और बौद्ध अवशेषों के लिए जानी जाती रही है, लेकिन यह पहला अवसर है जब यहां हिंदू शाही काल का मंदिर मिला है. इतिहासकारों के अनुसार, यह खोज इस बात का प्रमाण है कि बौद्ध युग के बाद भी इस क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता बनी रही.

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बता दें कि पाकिस्तान की सरकार, सेना और कट्टरपंथी ताक़तें शायद अपनी असल पहचान छुपा सकती हैं, मगर मिटा नहीं सकतीं. इतिहास एक बार फिर गवाही दे रहा है कि जहाँ से सनातन की ध्वनि उठी थी, वही मिट्टी आज फिर अपने प्राचीन गौरव को उजागर कर रही है.

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