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अगर जा रहे हैं वृंदावन या मथुरा तो भूलकर भी घर न लाएं ये चीजें, वरना बनेंगे पाप के भागीदार!

एक बार अगस्त मुनि ने उन्हें काशी चलने के लिए कहा लेकिन उन्होंने मना कर दिया, जिससे अगस्त मुनि ने उन्हें क्रोधित होकर श्राप दे दिया कि वे तिल-तिल घटेंगे. और उनका ये श्राप आज भी उन्हें तिल-तिल घटा रहा है.

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हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण से जुड़ी दो जगह धार्मिक दृष्टि से बेहद ही महत्वपूर्ण हैं. पहली मथुरा जहां भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया. दूसरी वृंदावन, जहां उन्होंने रास रचाया. और इसी वृंदावन में एक ऐसी भी है जहां से आप कुछ भी लेकर नहीं आ सकते. वो है गोवर्धन पर्वत जिसे श्रीकृष्ण ने अपनी अंगुली पर उठाकर गांववासियों की जान बचाई. इसी वजह से हर कृष्ण भक्त अपने जीवन में एक न एख बार तो यहां जाना ही जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गोवर्धन पर्वत से ऐसी कौनसी चीज है जिसे घर लेकर आना आप पर भारी पड़ सकता है. 

गोवर्धन पर्वत की मिट्टी
मान्यताओं के अनुसार गोवर्धन पर्वत से पत्थर या मिट्टी घर लेकर आना अशुभ होता है. अगर आप ऐसा करते हैं तो आपकी पारिवारिक शांति छिन सकती है. एक पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गोवर्धन महाराज द्रोणाचार्य के पुत्र थे. एक बार अगस्त मुनि ने उन्हें काशी चलने के लिए कहा लेकिन उन्होंने मना कर दिया, जिससे अगस्त मुनि ने उन्हें क्रोधित होकर श्राप दे दिया कि वे तिल-तिल घटेंगे और उनका ये श्राप आज भी उन्हें तिल-तिल घटा रहा है.
एक दूसरी कथा के अनुसार गोवर्धन पर्वत को हनुमान जी सेतु निर्माण के लिए त्रेता युग में लेकर जा रहे थे और कार्य पूरा होने के बाद उन्होंने उन्हें बीच रास्ते में ही छोड़ दिया, जिससे उन्हें बहुत बुरा लगा और फिर हनुमान जी ने उन्हें वचन दिया कि द्वापर युग में भगवान राम श्रीकृष्ण के रूप में उन्हें दर्शन देंगे. इसलिए जब द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाया तो लोग मानने लगे कि ये स्वंय भगवान की लीला है और यहां कण-कण में ईश्वर वास करते हैं. इसके अलावा आपको बता दें कि धार्मिक ग्रंथों में भी साफ मना किया गया है कि इस पर्वत से कुछ घर न लेकर आएं.

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गोवर्धन पर्वत कैसे पहुंचें?
गोवर्धन पर्वत जाना हर कृष्ण भक्त का सपना होता है. यहां आप बेहद ही आसानी से पहुंच सकते हैं. अगर आप ऐरोप्लेन से आना चाहते हैं तो अपने करीबी एयरपोर्ट जाकर आगरा तक आ जाएं. यहां से मथुरा 60 किलोमीटर दूर है. यहां पहुंचने के बाद आप टैक्सी या बस लेकर गोवर्धन पर्वत पहुंच सकते हैं.

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