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पितृ पक्ष के दौरान कौआ न दिखे तो इन्हें लगाएं पंचबलि भोग, जानें इसका महत्व और विधि

इस दौरान पितर कौवे और अन्य जीवों का रूप धारण कर पितृलोक से अपने परिजनों से मिलने आते हैं और कौवे के माध्यम से भोजन ग्रहण करते हैं. इसलिए लोग पितरों को प्रसन्न करने के लिए उन्हें भोजन करवाते हैं. लेकिन अगर कौवे श्राद्ध के दौरान न दिखें तो क्या करना चाहिए? जानने के लिए आगे पढ़े...

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पितृपक्ष का समय पितरों के लिए बेहद खास माना जाता है. ये समय पितरों को श्रद्धांजलि देने के लिए सबसे उत्तम होता है क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि इस 15-16 दिनों की अवधि में पितर पितृलोक से अपने परिजनों से मिलने के लिए आते हैं. इसलिए इस दौरान पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने का विशेष महत्व होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं इस दौरान कौवे को भोजन कराना इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है? अगर इस दौरान कौवा न मिले तो क्या करना चाहिए? चलिए इसके बारे में हम आपको बताते हैं…

पितृपक्ष के दौरान कौवे का महत्व?

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सनातनी मान्यताओं के अनुसार कौवे को पितरों का प्रतीक माना जाता है. कहा जाता है कि इस दौरान पितर कौवे और अन्य जीवों का रूप धारण कर पितृलोक से अपने परिजनों से मिलने आते हैं और कौवे के माध्यम से भोजन ग्रहण करते हैं. इसलिए लोग पितरों को प्रसन्न करने के लिए उन्हें भोजन करवाते हैं. इतना ही नहीं, मान्यता है कि जब कौवा श्राद्ध का भोजन खाता है तो श्राद्ध पितरों द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है. लेकिन कई बार किसी कारणवश श्राद्ध के लिए कौवे नहीं दिखाई देते हैं तो मन में एक सवाल उठता है कि भोजन किसे कराना चाहिए ताकि पितर श्राद्ध को स्वीकार कर लें. चलिए इसके बारे में भी आपको बताते हैं.

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श्राद्ध के दौरान कौवा न मिले तो क्या करें?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि पितर इस दौरान कौवे समेत अन्य जीवों का रूप धारण करके भी अपने परिजनों से मिलने आते हैं, ऐसे में आप अन्य जीवों को भी भोजन करवा सकते हैं. क्योंकि आपने भी देखा होगा कि आजकल शहरों में कौवे लुप्त हो चुके हैं, इसलिए अगर आपको श्राद्ध का भोजन करवाने के लिए कौवा न दिखें तो आप गाय, कुत्ते, कौवे, चींटी या फिर देवताओं को भी भोजन करवा सकते हैं. इसे पंचबलि भोग कहा जाता है. चलिए आपको पंचबलि भोग के बारे में भी बताते हैं.

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सनातन में पंचबलि भोग का महत्व?

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पितृपक्ष के दौरान पंचबलि भोग का बहुत महत्व होता है. इस दौरान कौवे, चींटी, गाय, कुत्ते, और देवताओं को भोजन करवाया जाता है. कहा जाता है कि इससे पितरों की आत्मा तृप्त होती है और पितृ प्रसन्न होते हैं. लेकिन इन सभी में कौवे का सबसे ज्यादा महत्व होता है. इसलिए अगर इस दौरान आपको कौवा मिले तो अच्छा है, वरना आप पंचबलि को जरूर लगाएं.

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