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अगर Thackeray के साथ विश्वासघात हुआ है , तो फिर Modi को शंकराचार्य का आशीर्वाद क्यों

अब क्या विश्वासघात का लिया जाएगा बदला ? मातोश्री जाकर शंकराचार्य ने किया बड़ा धमाका। मोदी को दिया आशीर्वाद , ठाकरे पर की भविष्यवाणी ।देखिये सिर्फ़ धर्म ज्ञान पर ।

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Avimukteshwaranandज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी Avimukteshwaranand सरस्वती , इनके नाम से दुनिया जितनी परिचित है , इनके बयान राजनीतिक गलियारों में उतना ही धमाल मचा रहे हैं। शंकराचार्य के एक बयान ने देश की राजनीति गरमा दी है।आलम ये है कि ठाकरे साहब को तिनके का सहारा मिल गया है और पीएम मोदी को आशीर्वाद । ख़ुद को पीएम मोदी का शुभचिंतक बताने वाले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अबकी बार मातोश्री जाकर ठाकरे परिवार के लिए कितनी बड़ी भविष्यवाणी कर डाली है। 



 सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मुंबई आए तो थे, अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट को अपना आशीर्वाद देने ।लेकिन जैसे ही पीएम मोदी से उनका सामना हुआ। चारों तरफ खलबली मच गई।  शुभ आशीर्वाद सेरेमनी में धर्म सत्ता और राज सत्ता आमने-सामने दिखे।और जो कि मोदी के आलोचकों में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी सबसे आगे हैं। कई दफ़ा उन्हें पीएम मोदी के लिए गये फ़ैसलों के विरुद्ध देखा गया है। फिर चाहे राम मंदिर उद्घाटन का मसला हो या फिर गाय को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाने की माँग। कई मोर्चे पर उन्होंने सरकार की नीतियों का खुलकर विरोध किया है। ऐसे में जैसे ही पीएम मोदी ने शंकराचार्य को देखा। उनके चरणों में जाकर नतमस्तक हो गये। बस फिर क्या था। अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने भी आशीर्वाद देने में एक मिनट की देरी नहीं लगाई। बक़ायदा अपने गले से रुद्राक्ष की माला निकालकर पीएम मोदी को पहनाया। 20 सैकेंड की इसी वीडियो ने राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया। ठीक इसके बाद, मातोश्री से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसके बाद से शंकराचार्य को धर्माचार्य बनकर रहने की नसीहत दी जा रही है।

अब क्या विश्वासघात का लिया जाएगा बदला ? मातोश्री जाकर शंकराचार्य ने किया बड़ा धमाका । मोदी को दिया आशीर्वाद , ठाकरे पर की भविष्यवाणी ।

ये जग-जाहिर है कि NDA का घटक दल रह चुके ठाकरे की शिवसेना आज की डेट में उन्हीं की सबसे बड़ी धुर विरोधी है। ऐसे में शंकराचार्य का मातोश्री जाना, भाजपा को नागवार गुजरा ।आलम ये है कि शिंदे गुट के नेता संजय निरुपम शंकराचार्य की आलोचना पर उतर आए हैं। खुलकर कह रहे हैं।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी धार्मिक कम, राजनीतिक ज्यादा हैं। उद्धव ठाकरे से मिलना उनका व्यक्तिगत फैसला हो सकता है। पर शिवसेना के अंदरूनी विवाद पर भाष्य करने से उन्हें बचना चाहिए था। यह उन्हें शोभा नहीं देता।कौन मुख्यमंत्री बनेगा, कौन नहीं, यह जनता तय करेगी, शंकराचार्य नहीं।

अब सवाल उठता है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मातोश्री जाकर ऐसा क्या बयान दिया हैं, जिसकी वजह से देश की राजनीति में खलबली मच गई है। दरअसल उद्धव ठाकरे के न्यौते पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद एक धार्मिक अनुष्ठान के लिए उनके बंगले मातोश्री पहुँचे। और जैसे ही पत्रकारों से मुख़ातिब हुए, उन्होंने ठाकरे के साथ विश्वासघात होने का बात कह दी।

सनातन धर्म में विश्वासघात एक बहुत बड़ा पाप है। उद्धव ठाकरे के साथ विश्वासघात हुआ है। जिस तरीके से विश्वासघात करके एक हिंदूवादी पार्टी को तोड़ा गया, उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया, वह ठीक नहीं है। जब तब वह पुनः मुख्यमंत्री के पद पर विराजमान नहीं हो जाता, तब तक हम सबके मन में पीड़ा और दर्द दूर नहीं हो सकता।जनता का अनादर करना ठीक नहीं है। जनता जिसके लिए बहुमत देती है, उसे उसके समय तक के लिए बनाए रखना चाहिए। बीच में सरकार को तोड़ देना और जनमत का अनादर करना अच्छी बात नहीं है। हमें राजनीति से लेना-देना नहीं है, लेकिन विश्वासघात को पाप बताया गया है। इस बारे में कौन बोलेगा? क्या राजनेता बोलेगा? इस पर तो कोई धर्माचार्य ही बोल सकता है।शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी 

शंकराचार्य का कहना कि उद्वव ठाकरे के साथ विश्वासघात हुआ है। ये समझ आता है लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये कि विश्वासघात का बदला किस से लिया जाएगा ? शंकराचार्य अपने गला की माला पीएम मोदी को पहनाकर उन्हें आशीर्वाद दे चुके हैं।और दूसरी तरफ़ उद्वव ठाकरे के फिर से मुख्यमंत्री बनने की भी भविष्यवाणी कर चुके हैं।ऐसे में शंकराचार्य का आशीर्वाद किसका कल्याण करेगा, ये तो आने वाला समय ही बताएगा। फ़िलहाल शंकराचार्य के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने वाले जगतगुरु परमहंस आचार्य क्या कुछ बोल रहे हैं। 
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