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कैसे शुरू हुई उत्तराखंड के चारों धामों की यात्रा? इस साल कब और किस शुभ मुहूर्त पर बंद होंगे कपाट? जानें यात्रा का महत्व

Uttarakhand Char Dham Yatra: इस बार जहां उत्तराखंड की चार धाम यात्रा अप्रैल के महीने में शुरू हुई वहीं अब इन धामों के कपाट जल्द ही बंद होने वाले हैं. ऐसे में जो भी भक्त इन धामों के दर्शन करना चाहते हैं वो इन तिथियों से पहले दर्शन कर लें. साथ ही जान लीजिए कि आज भक्त जिस यात्रा को मोक्ष का द्वार मानते हैं वो कैसे शुरू हुई?

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उत्तराखंड जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है. यहां मौजूद चार धाम यानी बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जिनके दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है. हर साल की तरह इस बार भी लाखों की संख्या में भक्त यहां आए और अभी भी लगातार आ रहे हैं. लेकिन अब इन पवित्र धामों के कपाट बंद होने की तिथि भी आ गई है. इसलिए अगर आपने अभी तक इन धामों के दर्शन नहीं किए हैं तो जल्द ही कर लें क्योंकि कुछ ही समय में ये कपाट बंद होने वाले हैं. तो चलिए जानते हैं किस तारीख को बंद होंगे मंदिर के कपाट?…

इस साल बदरीनाथ, यमुनोत्री, मध्यमहेश्वर और तुंगनाथ धामों के शीतकालीन कपाट बंद होने की तारीखें घोषित हो चुकी हैं. तुंगनाथ के कपाट 6 नवंबर 2025 को बंद होंगे. वहीं मध्यमहेश्वर 18 नवंबर और यमुनोत्री 23 अक्टूबर को बंद होने वाले हैं. इन तीर्थस्थलों के बंद होने से पहले विशेष पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान किए जाएँगे. 

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बद्रीनाथ के कपाट कब बंद होने वाले हैं?

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दशहरे के बाद पुजारियों ने चमोली में स्थित प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम के कपाट के बंद होने का मुहूर्त निकाल लिया है. आने वाले 25 नवंबर दोपहर 2 बजकर 56 मिनट पर बद्रीनाथ के कपाट बंद होने वाले हैं. ऐसे में जो भी भक्त दर्शन करना चाहते हैं तो पहले ही कर लें.

केदारनाथ धाम समेत गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट कब बंद होंगे?

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मिली जानकारी के अनुसार, इस साल केदारनाथ धाम के कपाट और यमुनोत्री धाम के कपाट 23 अक्टूबर को बंद कर दिए जाएँगे. इसके अलावा गंगोत्री धाम के कपाट दीवाली के अगले दिन बंद किए जाएँगे. ऐसे में जो भी भक्त केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन करना चाहते हैं वे इन तिथियों से पहले ही कर लें. लेकिन अक्सर कई लोगों के मन में एक सवाल उठता है कि आखिर क्यों इन धामों के कपाट बंद किए जाते हैं? आइए जानते हैं…

चार धामों के कपाट क्यों बंद किए जाते हैं?

उत्तराखंड के चारों धाम हिमालयी क्षेत्रों में बसे हैं जिसकी वजह से यहां नवंबर से मार्च तक बहुत ज्यादा बर्फ पड़ने के कारण जाने वालों के मार्ग बंद हो जाते हैं. इसी के साथ मंदिर के कपाट बंद होने से धार्मिक मान्यताएँ भी जुड़ी हैं. जिसके अनुसार सर्दियों में देवताओं को ठंड से बचाने के लिए उनकी मूर्तियों को निचले और सुरक्षित स्थानों जैसे कि उखीमठ, जोशीमठ और मुखवा गाँव में रखकर यहीं उनकी पूजा पूरी श्रद्धा के साथ की जाती है. 

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कैसे शुरू हुई उत्तराखंड के चारों धामों की यात्रा?

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उत्तराखंड के चारों धामों यमुनोत्री, गंगोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ की यात्रा का जिक्र महाभारत जैसे महत्वपूर्ण पुराणों में भी है. पांडवों ने भी अपने जीवन काल के दौरान इन धामों के दर्शन किए थे. लगभग सैकड़ो साल पहले आदि शंकराचार्य ने इसे अच्छे से जोड़ा, ताकि लोग एक यात्रा में सभी धाम देख सकें और मोक्ष पा सकें. हर साल छह माह के लिए यहां के कपाट खोले जाते हैं और भक्त दूर-दूर से यहां दर्शन के लिए आते हैं. वैसे क्या आपने कभी इन धामों के दर्शन किए हैं? हमें कमेंट कर जरूर बताएँ…

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