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1 दिन में 2 श्राद्ध करना है कितना सही? पितर होंगे प्रसन्न या लगेगा पितृ दोष? जानें

कई बार पंचांग के कारण दो श्राद्ध की तिथि एक ही दिन में पड़ जाती है. ऐसे में जब भी एक दिन में दो श्राद्ध किए जाते हैं तो लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या एक दिन में दो श्राद्ध करना उचित है? क्या एक दिन में दो श्राद्ध करने से पितृ दोष का सामना तो नहीं करना पड़ेगा? अगर आपके भी मन में ऐसे सवाल हैं तो आइए इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं.

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पितृों का समय यानी पितृ पक्ष 7 सितंबर से शुरू हो चुका है और 21 सितंबर तक चलने वाला है. ये 15-16 दिन की अवधि पितरों के लिए बेहद ही खास मानी जाती है. मान्यता है कि इस दौरान पितर अपने परिवारजनों से मिलने धरती पर आते हैं. ऐसे में घर के सदस्य भी पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं. लेकिन कई बार पंचांग के कारण दो श्राद्ध की तिथि एक ही दिन में पड़ जाती है. ऐसे में जब भी एक दिन में दो श्राद्ध किए जाते हैं तो लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या एक दिन में दो श्राद्ध करना उचित है? क्या एक दिन में दो श्राद्ध करने से पितृ दोष का सामना तो नहीं करना पड़ेगा? अगर आपके भी मन में ऐसे सवाल हैं तो आइए इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं.

श्राद्ध पंचांग की गणना के अनुसार निर्धारित होते हैं. जिस तरह से अंग्रेज़ी कैलेंडर की तारीखें समय के अनुसार चलती हैं, वैसी ही हिंदू पंचांग की तिथियां सूर्य और चंद्रमा की चाल के मुताबिक चलती हैं. इसलिए समय परिवर्तित होता है और 24 घंटे में दो बार श्राद्ध आ जाते हैं. लेकिन क्या एक दिन में दो श्राद्ध करना सही है? चलिए जानते हैं.

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एक दिन में 2 श्राद्ध करना सही है?

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क्या एक दिन में दो श्राद्ध करना सही है, अगर ये सवाल आपके मन में भी उठ रहा है तो घबराएं नहीं क्योंकि आप एक दिन में दो श्राद्ध कर सकते हैं. लेकिन आपको कुछ नियमों का भी पालन करना पड़ेगा. जैसे कि जिस तिथि पर जिसकी मृत्यु हुई हो, उस तिथि पर उसका श्राद्ध करना ही चाहिए. अगर एक ही दिन में दो श्राद्ध पड़ रहे हैं तो आप क्रम से श्राद्ध कर सकते हैं. इस दौरान आपको श्राद्ध के लिए सामग्री का उपयोग भी अलग-अलग करना चाहिए.

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श्राद्ध करते समय किन बातों को ध्यान में रखें?

  • श्राद्ध करते समय हमेशा दक्षिण दिशा की तरफ ही मुख करके बैठें, क्योंकि इस दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है..
  • श्राद्ध से पहले स्नान करके साफ और हल्के रंग के कपड़े ही पहन लें.
  • इस दिन लहसुन, प्याज, मांस, शराब जैसे तामसिक भोजन को ग्रहण करने से बचें.
  • श्राद्ध के दौरान मन को साफ और शांत रखें, सारा ध्यान अपने पितरों का आह्वान करने में ही लगाएं.
  • श्राद्ध करने के बाद ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन करवाना न भूलें.
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