Advertisement
370 हटने के बाद अब्दुल्ला की नाक के नीचे मोदी-शाह कश्मीर में करने जा रहे हैं कितना बड़ा धमाका?
अब्दुल्ला नहीं, तो फिर कौन है कश्मीर का Big Boss ? 370 हटने के बाद अब कौन सा नया परिवर्तन ? कश्मीर के नाम पर मोदी-शाह की प्लानिंग ? कश्मीर क्या क्या फिर से बनेगा कश्यप ? देखिये सिर्फ धर्म ज्ञान पर
Advertisement
नये साल की शुरुआत उम्मीदों की नई किरण लेकर आई है, जिसमें विश्व पटल पर नये-नये कीर्तिमान स्थापित होंगे और देश के गौरवशाली इतिहास में नये-नये अध्याय जुड़ेंगे। इन सबके बीच माँ भारती का मुकुट कहा जाने वाला जम्मू-कश्मीर,जहां आज भी धरती की जन्नत मिलती है। उसकी ख़ूबसूरती दिनों दिन बढ़ती जा रही है। आज का जम्मू-कश्मीर 370 की बेढ़ियों से मुक्त हो चुका है…लोकतंत्र तरीक़े से अब्दुल्ला की सरकार राज कर रही है। आवाम आत्मनिर्भर बनती जा रही है..ऐसे में राजनीति के चाणक्य के एक बयान से कौन सा नया परिवर्तन कश्मीर की तस्वीर बदलने जा रहा है। अब्दुल्ला नहीं, तो फिर कश्मीर का बिग ब़ॉस कौन है।
Advertisement
आज अगर आप भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह के इस बयान पर गौर करेंगे, तो आपको ये ज़रूर समझ आएगा कि प्रमाण के आधार पर लिखा गया इतिहास ही देश को एक नई दिशा दे सकता है, अन्यथा एक चूक भविष्य को बर्बाद करने के लिए काफ़ी है और जहां तक बात रही कश्मीर की, तो पौराणिक इतिहास में कश्मीर की पहचान महर्षि कश्यप से ही होती है। फ़िल्म कश्मीर फाइल की एक डॉयलॉग है, जहा शिव, सरस्वती, ऋषि कश्यप हुए वो कश्मीर हमारा है, जहाँ पंचतंत्र लिखा गया वो कश्मीर हमारा है जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है! जहाँ शंकराचार्य जी ने तप किया वो कश्मीर हमारा है
Advertisement
भले ही ये फ़िल्म का डॉयलाग हो लेकिन इन पंक्तियों में कश्मीर का वास्तविकता सांस्कृतिक इतिहास मिलता है, आज भी कश्मीर की जड़े महर्षि कश्यप से जुड़ी है, आज भी अगर आप प्राचीन ग्रंथों के पन्ने पलटेंगे , तो ये जानेंगे कि कश्मीर को महर्षि कश्यप के नाम पर बसाया गया, यही पर महर्षि कश्यप ने तपस्या, यहीं पर उन्होंने स्मृति ग्रंथों की रचना की और यहीं से सप्तऋषियों में से एक महर्षि कश्यप के शासन का श्री गणेश हुआ। आज की जो कश्मीर घाटी कश्मीर की पहचान है, उस से महर्षि कश्यप का संबंध पौराणिक कथाओं में मिलता है, जिसके अनुसार जलोद्धव नाम के राक्षस को ब्रह्ना का ऐसा वरदान मिला था, जिसके बाद वह उच्छृंखल हो गया और आतंक मचाने लगा। राक्षस से परेशान होकर देवताओं ने देवी भगवती को आग्रह किया तो उन्होंने पक्षी का रूप धरकर राक्षस को चोंच मार-मार कर लहूलुहान कर दिया। पक्षी ने जिस पत्थर पर राक्षस को मारा, कथानुसार वही हरी पर्वत कहलाया। बाद में यहीं पर महर्षि कश्यप पहुंचे जिन्होंने सरोवर से जल निकाल कर इसकी शुद्धि की और स्थान को विकसित किया, जो बाद में घाटी में तब्दील हुई।
Advertisement
यह भी पढ़ें
आज भले ही कश्मीर की सत्ता मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के हाथों में हो, लेकिन यहाँ के रियल बिग बॉस महर्षि कश्यप ही रहेंगेऔर न्यू ईयर पर जिस प्रकार से कश्मीर को कश्यप की धरती गृह मंत्री ने बताया, उससे सुनकर यही क़यास इस वक्त लगाए जा रहे हैं कि अब कश्मीर कश्मीर से नहीं बल्कि महर्षि कश्यप के नाम से पहचाना जाए लेकिन क्या ऐसा मुमकिन है?