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हासनंबा मंदिर: दीवाली पर सिर्फ 9 दिनों के लिए खुलता है ये रहस्यमयी मंदिर, 1 साल पहले चढ़ाए फूल मिलते हैं ताज़ा

कर्नाटक में मौजूद है ऐसा मंदिर जहां आज भी चमत्कार होते हैं. ये हसनंबा मंदिर के नाम से जाना जाता है. जो सिर्फ दिवाली के समय 7–9 दिनों के लिए खुलता है और दूर-दूर से भक्त यहाँ दर्शन के लिए आते हैं. यह मंदिर अपने चमत्कारी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है. जहाँ फूल हमेशा ताज़ा रहते हैं और दीया साल भर जलता रहता है.

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भारत के अलग-अलग राज्यों में कई ऐसे छोटे-बड़े मंदिर हैं, जो अपनी दिव्य मान्यताओं के लिए जाने जाते हैं. कर्नाटक में ऐसा ही एक मंदिर है, जो सिर्फ साल में 9 दिन ही खुलता है और 1 साल पहले चढ़ाए गए फूल ताज़ा मिलते हैं. ऐसे में इस अद्भुत मंदिर में भक्त लिखित में अपनी मनोकामनाएं भी रखते हैं. चलिए विस्तार से जानते हैं…

हसनंबा मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

कर्नाटक के हासन जिले में हसनंबा मंदिर है, जिसकी मान्यता पूरे देश में है. इस मंदिर को भगवान शिव और मां पार्वती के कई रूपों से जोड़ा गया है. कहा जाता है कि राक्षस अंधकासुर को अदृश्य होने का वरदान था. असुर को यह वरदान ब्रह्मा जी की घोर तपस्या के बाद मिला था. अदृश्य होने की वजह से असुर ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया. उसने संतों और ब्राह्मणों को अपना निशाना बनाया. ऐसे में असुर का अंत करने के लिए भगवान शिव ने अपनी शक्तियों से योगेश्वरी को बुलाया, जिन्होंने असुर का नाश किया.

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भगवान शिव की शक्ति से उत्पन्न हुई 7 देवियां!

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भगवान शिव की शक्ति से उत्पन्न हुई योगेश्वरी शक्तियों में वाराही, इंद्राणी, चामुंडी, ब्राह्मी, महेश्वरी, कौमारी और वैष्णवी आईं. ऐसे में देवियों को स्थान भी देना था, तब देवियों ने हासन को अपना स्थान चुना और वहीं बस गईं.

सिर्फ दिवाली में 7 से 9 दिनों के लिए खुलता है यह मंदिर

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हसनंबा मंदिर इसलिए भी खास है, क्योंकि यह मंदिर सिर्फ 7 से 9 दिनों तक दिवाली के समय खुलता है और बाकी दिन बंद रहता है. मंदिर जब भी खुलता है, तब भक्तों की भीड़ मां के दर्शन के लिए पहुंचती है. कहा जाता है कि मंदिर 12वीं शताब्दी में होयसल वंश ने बनवाया था. मंदिर में चिट्ठी देकर मनोकामना देने की भी अनोखी परंपरा है.

हसनंबा महोत्सव में पूरी होती है हर इच्छा!

दिवाली के समय मंदिर में हर साल 'हसनंबा महोत्सव' होता है, जिसमें भक्त अपनी अर्जी को चिट्ठी के रूप में भगवान को अर्पित करते हैं. भक्तों का मानना है कि यहां मांगी गई मुराद हमेशा पूरी होती है और धन-धान्य और सुख-संपत्ति का आशीर्वाद मिलता है.

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मंदिर में होते हैं दिव्य चमत्कार

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माना जाता है कि दिवाली के समय मंदिर में दीया जलाया जाता है और अंदर से मंदिर को फूलों से सजाया जाता है. जब मंदिर को अगले साल खोला जाता है तो दीया जलता हुआ मिलता है और फूल भी बिल्कुल ताजे रहते हैं. इसी चमत्कार को देखने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं.

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