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गुप्त नवरात्रि: जगत की अधिष्ठात्री देवी भुवनेश्वरी का मंदिर, दर्शन मात्र से कटते हैं पाप, सुख-समृद्धि का मिलता है आशीर्वाद

मां भुवनेश्वरी का यह मंदिर आध्यात्मिक आकर्षण का प्रमुख केंद्र है, जिन्हें जगत की अधिष्ठात्री देवी, संपूर्ण सृष्टि की रचनाकार, और शक्ति, ऐश्वर्य, सौंदर्य और ज्ञान की देवी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब संसार में असुरों का अत्याचार बढ़ गया था, तब देवी-देवताओं ने भगवान शिव से सहायता मांगी. तब मां भुवनेश्वरी का प्राकट्य हुआ और उन्होंने भगवान शिव के साथ मिलकर दानवों का संहार किया.

गुप्त नवरात्रि: जगत की अधिष्ठात्री देवी भुवनेश्वरी का मंदिर, दर्शन मात्र से कटते हैं पाप, सुख-समृद्धि का मिलता है आशीर्वाद
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भगवती को समर्पित गुप्त नवरात्रि का पर्व चल रहा है. गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन मां भुवनेश्वरी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. 'भारत की स्टील सिटी' के रूप में मशहूर जमशेदपुर में माता का भव्य मंदिर है, जो न केवल भव्य है बल्कि मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

 भगवान शिव के साथ मिलकर दानवों का संहार किया

मां भुवनेश्वरी का यह मंदिर आध्यात्मिक आकर्षण का प्रमुख केंद्र है, जिन्हें जगत की अधिष्ठात्री देवी, संपूर्ण सृष्टि की रचनाकार, और शक्ति, ऐश्वर्य, सौंदर्य और ज्ञान की देवी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब संसार में असुरों का अत्याचार बढ़ गया था, तब देवी-देवताओं ने भगवान शिव से सहायता मांगी. तब मां भुवनेश्वरी का प्राकट्य हुआ और उन्होंने भगवान शिव के साथ मिलकर दानवों का संहार किया.

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मां दुर्गा ने भुवनेश्वरी रूप में अवतार लेकर असुरों का वध किया 

पुराणों में उन्हें लौकिक महासागर और दस महाविद्याओं में से एक बताया गया है. उन्होंने राक्षस अंधका के खिलाफ भगवान शिव की सहायता की थी. मां दुर्गा ने भुवनेश्वरी रूप में अवतार लेकर असुरों का वध किया और संसार में संतुलन स्थापित किया. 

कहां पर स्थित है भुवनेश्वरी मंदिर 

माता की उपासना से भक्तों को आध्यात्मिक बल, सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त होती है. जमशेदपुर सुवर्णरेखा और खरकई नदियों के बीच बसा यह शहर नदियों के बीच की अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है. यहां का टेल्को भुवनेश्वरी मंदिर, जिसे श्री भुवनेश्वरी मंदिर भी कहते हैं, खरंगाझार मार्केट के पास एक छोटी पहाड़ी पर लगभग 500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.

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मंदिर की स्थापना कब हुई थी

मंदिर की स्थापना साल 1978 में स्वामी रंगराजन जी महाराज ने की थी. कथा के अनुसार, माता ने उन्हें सपने में आकर मंदिर निर्माण की बात कही थी. यह द्रविड़ वास्तुकला शैली में बना है, जिसमें पांच मंजिला राजगोपुरम 64 फीट ऊंचा है और पांच कलशों से सजा हुआ है. मंदिर में आठ खंभों वाला मंडप है, जहां प्रत्येक खंभा देवी के अलग-अलग रूपों का प्रतीक माना जाता है. बाहरी दीवारों पर सुंदर नक्काशी है, जो इसे देखने में और भी शानदार बनाती है. मंदिर में प्रवेश करने पर 32 फुट ऊंचा गर्भगृह दिखता है, जिसमें देवी की भव्य मूर्ति स्थापित है. 

विशेष अवसरों पर भी यहां भव्य पूजा-अर्चना होती है

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यहां से जमशेदपुर शहर और आसपास की नदियों का मनोरम नजारा दिखता है. मंदिर के आसपास का माहौल शांत और दिव्य है, जिसमें घुमावदार नदी भी इसकी सुंदरता बढ़ाती है. पुजारी यहां दक्षिण भारतीय शैली में दिन में तीन बार पूजा करते हैं, और सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाता है. यह मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र है. आम दिनों के साथ ही विशेष अवसरों पर भी यहां भव्य पूजा-अर्चना होती है.

दर्शन मात्र से कटते हैं पाप

श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मां भुवनेश्वरी की कृपा से परिवार में सुख-शांति, आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा बनी रहती है. सिर्फ दर्शन मात्र से पाप कट जाते हैं. गुप्त नवरात्रि के इस चौथे दिन मंदिर में विशेष भजन-कीर्तन और हवन का आयोजन होता है, जहां दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं. भुवनेश्वरी मंदिर न केवल स्थानीय लोगों के विश्वास का केंद्र है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षण है.

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टाटा नगर रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी 12 किलोमीटर है. 

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