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गुप्त नवरात्रि 2026: तृतीया तिथि और मां त्रिपुरसुंदरी की पूजा का महत्व

गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के गुप्त स्वरूप की साधना की जाती है. तृतीया तिथि पर देवी के तीसरे रूप मां त्रिपुर सुंदरी की पूजा का विशेष महत्व है. धर्म शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर मां दुर्गा की विधिवत पूजा करे.

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गुप्त नवरात्रि का तीसरा दिन बुधवार को है. हिंदू पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि चल है, जो 22 जनवरी की सुबह 2 बजकर 47 मिनट तक प्रभावी रहेगी. यह मां त्रिपुर सुंदरी के पूजन का भी दिन है.

पंचांग अनुसार महत्वपूर्ण जानकारी

दृक पंचांग के अनुसार किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले पंचांग का विचार महत्वपूर्ण है. कोई शुभ कार्य जैसे विवाह, नामकरण, गृह प्रवेश, मुंडन या नया व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें राहुकाल का विशेष ध्यान रखना चाहिए. 21 जनवरी को राहुकाल दोपहर 12 बजकर 33 मिनट से 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगा. इस दौरान कोई भी मंगल कार्य शुरू नहीं करना चाहिए.

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नक्षत्र की बात करें तो धनिष्ठा नक्षत्र दोपहर 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा, उसके बाद शतभिषा नक्षत्र शुरू हो जाएगा. चंद्रमा कुंभ राशि में संचरण करेगा. सूर्योदय 7 बजकर 14 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 51 मिनट पर होगा.

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शुभ मुहूर्त

21 जनवरी के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 20 मिनट पर विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 19 मिनट से 3 बजकर 1 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त शाम 5 बजकर 49 मिनट से 6 बजकर 15 मिनट तक है. वहीं, रवि योग दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से अगले दिन सुबह 7 बजकर 14 मिनट तक रहेगा.

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अन्य काल

पंचांग के अनुसार, राहुकाल 12 बजकर 33 मिनट से 1 बजकर 52 मिनट तक, यमगंड सुबह 8 बजकर 34 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक है. वहीं, गुलिक काल सुबह 11 बजकर 13 से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक और पंचक पूरे दिन रहेगा.

गुप्त नवरात्रि में पूजा का महत्व

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गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के गुप्त स्वरूप की साधना की जाती है. तृतीया तिथि पर देवी के तीसरे रूप मां त्रिपुर सुंदरी की पूजा का विशेष महत्व है. धर्म शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर मां दुर्गा की विधिवत पूजा करें, मंत्र जाप करें और श्रद्धा-भक्ति से प्रसाद अर्पित करें. इसके साथ ही जप का विशेष महत्व है.

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