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Govardhan Puja 2025: गोवर्धन पूजा आज है या कल? जानें शुभ मुहूर्त से लेकर सही पूजा विधि और इस दिन का महत्व

हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का बहुत महत्व है. क्योंकि इस दिन इंद्र के प्रकोप से ब्रज वासियों को बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने इस पर्वत को अपनी उंगली पर उठाया था. तभी से इस पर्वत की पूजा की जाने लगी लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि इस बार गोवर्धन पूजा कब है? क्या है इस पूजा का मुहूर्त? और किस तरह करें पूजा अर्चना…

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दिवाली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा कृष्ण भक्तों के लिए बेहद ही खास होती है. कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा की जाती है. गोवर्धन पूजा को अन्नकूट भी कहा जाता है, जिसमें 56 भोग का भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाया जाता है. वैसे तो गोवर्धन पूजा सभी जगह मनाई जाती हैं, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण की नगरी ब्रज क्षेत्र में गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानते हैं कब है गोवर्धन पूजा? क्या है महत्व? क्या है शुभ मुहूर्त… 

कब है गोवर्धन पूजा?

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हिंदू पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा के लिए आवश्यक कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि 21 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 22 अक्टूबर को रात 8 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर दिन बुधवार को मनाई जाएगी और अन्नकूट भी 22 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा. 

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क्या है गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त?

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त दो समय हैं: सुबह 06:25 बजे से 08:40 बजे तक (2 घंटे 15 मिनट) और शाम 03:28 बजे से 05:43 बजे तक (2 घंटे 15 मिनट). ब्रह्म मुहूर्त 04:44 बजे से 05:34 बजे तक है, इन समयों में पूजा और अन्नकूट करना अच्छा रहेगा. 

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हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का महत्व क्या है? 

गोवर्धन पूजा को देवताओं के राजा इंद्र के घमंड को तोड़ने का प्रतीक माना जाता है. द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने लोगों को समझाया कि उन्हें गोवर्धन की पूजा जरूर करनी चाहिए. उनकी बात मानकर लोग गोवर्धन पूजा करने लगे. इससे इंद्र नाराज हो गए क्योंकि उस पूजा में देवताओं का अंश नहीं मिला. इसी वजह से उन्होंने मूसलाधार बारिश की, जिससे पूरा ब्रज का क्षेत्र आंधी, पानी और तूफान से घिर गया. तब भगवान श्रीकृष्ण ने 7 दिन तक अपनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठाए रखा, ताकि नगरवासियों की रक्षा हो सके. इसके बाद जब इंद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ तब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी. तभी से हर साल गोवर्धन पूजा होने लगी. गोवर्धन पूजा पर अन्नकूट का भोग लगाया जाता है.

गोवर्धन पूजा विधि क्या है? 

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गोवर्धन के दिन सुबह गोबर से गिरिराज महाराज को तैयार करें. इसके बाद धूप, दीप, जल, फल, फूल आदि चढ़ाए जाते हैं. साथ ही इस दिन पशुओं जैसे गाय, बैल आदि की पूजा करने का भी विधान है. फिर गोवर्धन जी की नाभि पर एक मिट्टी का दीपक या कोई अन्य पात्र रखा जाता है और उसमें दूध, दही, गंगाजल, शहद, बताशे डाले जाते हैं. पूजा खत्म होने के बाद इसे प्रसाद के रूप में लोगों में बांटा जाता है और 7 बार परिक्रमा की जाती है. मान्यता है कि इस तरह पूजा करने से धन, सुख-समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है.

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