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राम भक्तों के लिए ख़ुशख़बरी अयोध्या के राम मंदिर में बन रही है धर्मशाला !

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है वहीं निर्माण कार्य के चलने के बाद भी प्रतिदिन सैकड़ों लोग इस मंदिर के दर्शन करने के लिए आ रहे है लेकिन क्या आप जानते है इस मंदिर को बनने में कितना खर्च आया , इस मंदिर का इतिहास किससे जुड़ा है पूरी जानकारी जानने के लिए देखिए इस पर हमारी ख़ास रिपोर्ट।

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25 Mar 2025
( Updated: 08 Dec 2025
01:26 PM )
राम भक्तों के लिए ख़ुशख़बरी अयोध्या के राम मंदिर में बन रही है धर्मशाला !
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अयोध्या राम मंदिर के बारे में तो हम सब जानते हैं कि ये मंदिर भगवान राम की जन्मभूमि पर बना है, भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या आज दुनिया भर में प्रचलित है। हिन्दुओं का धार्मिक स्थल यानी अयोध्या पर राम मंदिर बनना किसी लक्ष्य के पूरा होने जैसा है क्योंकि इसके पीछे 500 सालों का इतिहास जुड़ा है। मुग़लों ने भगवान राम की धरा पर मंदिर को तोड़कर करीब 330 साल पहले एक मस्जिद का निर्माण कर दिया, लेकिन 1992 में विवादित ढांचे को हिंदुओं ने गिरा दिया और अब उसी जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। इस मंदिर को बनने के लिए किन-किन पैमानों से गुजरना पड़ा, और क्या 2025 में राम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है? राम मंदिर के निर्माण में आख़िर कितने रुपये खर्च हुए, आइए जानते हैं, 

आज दुनिया भर से राम मंदिर के दर्शन करने सैकड़ों लोग हर दिन पहुँचते हैं, लेकिन बहुत कम लोग राम मंदिर के बनने के पीछे की असल कहानी के बारे में जानते हैं। अयोध्या राम मंदिर के बनने के पीछे का इतिहास जुड़ा है दशकों तक चली कानूनी लड़ाई से। जब 1528 में मुग़ल शासक बाबर भारत में आया, तो करीब दो साल बाद बाबर के सूबेदार मीरबाकी ने अयोध्या में एक मस्जिद का निर्माण करवाया। ये वो मस्जिद है जिसे हम बाबरी मस्जिद के नाम से जानते हैं। ये वो दौर था जब मुग़ल शासन पूरे देश में तेज़ी से फैल रहा था, लेकिन 19वीं सदी में ये शासन कमजोर पड़ने लगा, वहीं अंग्रेज़ी हुकूमत का देश पर दबाव बन चुका था और इस दौरान हिन्दुओं ने ये मामला उठाया कि भगवान राम के जन्म स्थल पर इस मस्जिद का निर्माण किया गया है। इसके बाद राम जन्मभूमि को कई पैमानों से होकर गुजरना पड़ा और 6 दिसम्बर 1992 में उस विवादित ढाँचे को गिरा दिया गया, और उसी शाम एक अस्थायी मंदिर को बनाकर उसमें पूजा अर्चना शुरू का कार्य शुरु कर दिया गया। और अथक संघर्ष करने के दौरान 9 नवंबर 2019 को पूरे 134 साल बाद इस फ़ैसले का अंतिम चरण आया जब सर्वोच्च न्यायालय ने इस स्थल को राम जन्मभूमि माना और 2020 से शुरू हुआ अयोध्या के राम मंदिर का निर्माण कार्य। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फ़रवरी 2020 को अयोध्या में राम जन्मभूमि को एक तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट भी घोषित कर दिया। 22 जनवरी 2024 का ये दिन सभी सनातनियों के लिए बेहद ही ख़ास था, ये एक ऐसी ऐतिहासिक तारीख़ है जिसने हर सनातनी को जीता दिया। इसी दिन राम की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी, ये वो दिन था जब हर सनातनी की आँखों से ख़ुशी के आँसू बहें थे, हर हिन्दू के घर में घी के दिये जलें और भगवान राम की पूजा की गई।

तो इस तरह हुआ था भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या पर राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू, और अभी मंदिर का निर्माण कार्य लगभग 96 प्रतिशत पूरा हो चुका है। वहीं जून तक राम लला के मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। तुलसीदास जी की मूर्ति को भी सही स्थान पर स्थापित कर दिया गया है। अक्षय तृतीया तक राम मंदिर में और भी कई मूर्तियाँ स्थापित कर दी जाएँगी। इसके साथ ही मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक धर्मशाला भी बनाई जाएगी, कुछ पैसों का सहयोग करके आप धर्मशाला में रुक सकते हैं। मई के महीने में शबरी, निषाद और सप्त ऋषि मंदिर का निर्माण कार्य भी पूरा होने की संभावना है। तो चलिए आपको दिखाते हैं कि दिन का निर्माण कार्य कैसा चल रहा है। (मंदिर की फोटो दिखा देना, म्यूजिक लगाके)

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वहीं मंदिर के ट्रस्टी डा. अनिल मिश्रा ने राम मंदिर निर्माण से जुड़ी अपडेट के बारे में बताया…

"श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर और द्वितीय तल में निर्माण कार्य निर्धारित गति से चल रहा है, प्रत्येक कार्य के लिए योजना बनाकर समय निश्चित कर दिया गया है, निर्माण इकाई गुणावत्तापूर्ण कार्य के साथ तय समय को ध्यान में रखकर काम कर रही है, शेष बचा 4 प्रतिशत कार्य हर हाल में जून माह तक पूरा हो जाएगा।"

आपको बताते चलें कि मंदिर प्रशासन के अनुसार राम मंदिर के निर्माण में लगभग 2100 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं... ये राशि चंदे के रूप में जुटाई गई थ.सरकार से मंदिर निर्माण में कोई मदद नहीं ली गई है। वहीं ट्रस्ट के सदस्यों का कहना है कि हमने सरकार को भी 396 करोड़ रुपयों का टैक्स चुकाया है।

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इसके अलावा आपको जानकारी देते चले कि कुछ दिनों पहले राम मंदिर में एक बैठक हुई थी, जिसमें ये फ़ैसला हुआ कि अब मंदिर में कोई मुख्य तौर पर पुजारी नहीं होगा, मंदिर के पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास के निधन के बाद मंदिर के पुजारी की जगह ख़ाली थी लेकिन उनका सम्मान करते हुए तीर्थ ट्रस्ट की बैठक में इस पद को समाप्त करने का फ़ैसला लिया गया है।


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