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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी : गणपति को प्रसन्न करने का ख़ास दिन, जानें शुभ मुहूर्त, ये काम करने से पूरी होंगी सारी मनोकामनाएं

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी विघ्नहर्ता भगवान गणेश के द्विजप्रिय स्वरूप को समर्पित है. 'संकष्टी' का अर्थ है संकट से मुक्ति. इस दिन भक्त व्रत रखकर गौरी पुत्र गणपति की पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और विघ्न-बाधाओं के नाश के साथ सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी : गणपति को प्रसन्न करने का ख़ास दिन, जानें शुभ मुहूर्त, ये काम करने से पूरी होंगी सारी मनोकामनाएं
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सनातन धर्म में पंचांग का बेहद महत्व है. नया काम, पूजा-पाठ हो या दिन की शुरुआत पंचांग का विचार महत्वपूर्ण है. फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 5 फरवरी, गुरुवार, को है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गणपति की उपासना से संकट का नाश होता है और सुख-समृद्धि आती है. 

 इस दिन बप्पा की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी विघ्नहर्ता भगवान गणेश के द्विजप्रिय स्वरूप को समर्पित है. 'संकष्टी' का अर्थ है संकट से मुक्ति. इस दिन भक्त व्रत रखकर गौरी पुत्र गणपति की पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और विघ्न-बाधाओं के नाश के साथ सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. 

कब से कब तक रहेगी की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 

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दृक पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 5 फरवरी की देर रात 12 बजकर 9 मिनट से शुरू होकर 6 फरवरी की रात 12 बजकर 22 मिनट तक रहेगी. इस दिन चंद्रमा कन्या राशि में संचरण करेंगे और नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी रात 10 बजकर 57 मिनट तक रहेगा. सूर्योदय 7 बजकर 7 मिनट और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 3 मिनट पर होगा. 

जानें क्या है शुभ मुहूर्त?

शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 22 मिनट से 6 बजकर 15 मिनट, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा. वहीं, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 25 मिनट से 3 बजकर 8 मिनट तक और अमृत काल दोपहर 3 बजकर 32 मिनट से शाम 5 बजकर 11 मिनट तक रहेगा. 

इस समय में ना करें शुभ काम

अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 1 बजकर 57 मिनट से 3 बजकर 19 मिनट तक रहेगा, यमगण्ड सुबह 7 बजकर 7 मिनट से 8 बजकर 29 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 9 बजकर 51 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक रहेगा.

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भोग में क्या चढ़ाएं 

चतुर्थी पर गजानन को दूर्वा, लाल फूल, मोदक, लड्डू, पान और दही-चीनी का भोग लगाना चाहिए. सिंदूर-घी से लेप करना फलदायी होता है.

बप्पा को ख़ुश करने के लिए कौनसा पाठ करें 

यह भी पढ़ें

'गं गणपतये नमः' और 'ओम द्विजप्रियाय नमः' मंत्र के जाप के साथ ही संकष्ट नाशन गणेश स्त्रोत और गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करना चाहिए. 

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