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Diwali Special 2025: जानें लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त और विधि, बरसेगी धन की देवी की कृपा!

दिवाली का पर्व हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है. इस दिन लोग मां लक्ष्मी, गणेश जी की पूजा करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं, इस बार लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है? किस तरह मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए? चलिए जानते हैं.

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दिवाली का त्यौहार बहुत खास और महत्वपूर्ण होता है. इस दिन लोग भगवान राम के वापस अयोध्या आने की खुशी में पटाखे और दीये जलाकर जश्न मनाते हैं, वहीं मां लक्ष्मी के समुद्र मंथन से प्रकट होने की खुशी में धन की देवी की आराधना करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं, किस शुभ मुहूर्त पर आप पूजन करके अपने जीवन से दरिद्रता को हमेशा के लिए हटा सकते हैं. चलिए विस्तार से जानते हैं पूजा विधि और महत्व…

दिवाली कब मनाई जाएगी?

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हिंदू पंचांग के अनुसार, दिवाली का त्यौहार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. इस बार कार्तिक अमावस्या की तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 21 अक्टूबर की शाम 5 बजकर 54 मिनट पर होगा. इसलिए 20 अक्टूबर को ही दिवाली मनाई जाएगी.

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दिवाली पर पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है?

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस बार अमावस्या तिथि की शुरुआत 20 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट पर होकर 21 अक्टूबर की रात 9 बजकर 03 मिनट पर इसका समापन होगा. इस दौरान लक्ष्मी-गणेश पूजन का सबसे शुभ समय शाम 7 बजकर 08 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 18 मिनट तक रहेगा. इस अवधि को प्रदोष काल और स्थिर लग्न का संयोग कहा गया है, जो मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे अच्छा रहेगा. यानी लोगों को पूजा के लिए करीब 1 घंटा 11 मिनट का समय मिलेगा.

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दिवाली पर पूजन किस तरह करें?

  • लक्ष्मी पूजन से पहले घर की साफ-सफाई अच्छे से कर लें. गंगाजल के छिड़काव के साथ घर को शुद्ध कर लें.
  • अब लक्ष्मी पूजन के लिए सर्वप्रथम एक साफ चौकी पर लाल रंग का नया कपड़ा बिछाएं.
  • चौकी पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित करें.
  • माता लक्ष्मी और गणेश भगवान की मूर्ति को साफ-सुंदर वस्त्र पहनाएं और इस दौरान देवी को चुनरी अवश्य अर्पित करें.
  • अब साफ कलश में जल भरें और चौकी के पास रख दें.
  • अपनी गलतियों की सजा की माफी मांगते हुए भगवानों को तिलक लगाएं.
  • मां लक्ष्मी और भगवान गणेश को फूलों की माला पहनाएं और ताजे फूल देवी को अर्पित करें. इस दौरान कमल का फूल चढ़ाना न भूलें.
  • अब अक्षत, चांदी का सिक्का, फल और सभी मिठाइयों का भोग लगाएं.
  • यदि आपने कोई वस्तु या सोना-चांदी खरीदा है तो उसे पूजा में रखें.
  • शुद्ध देसी घी से दीपक जलाएं और 21 दीये जला लें.
  • अब भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की आरती करें और गणेश चालीसा का पाठ भी करें, देवी लक्ष्मी की आरती और मंत्रों का जाप करें.
  • अब घर के सभी कोनों में दीपक रखें और तिजोरी में माता की पूजा में उपयोग किए गए फूल को रख दें.
  • और अंत में सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पूजा में हुई भूल की क्षमा मांगें.
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