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योगी को लेकर देवकीनंदन ठाकुर ने 100 करोड़ हिंदुओं से की बड़ी डिमांड
100 करोड़ हिंदुओं से देवकी नंदन की बड़ी डिमांड, अब संसद में दिखेंगे और कितने योगी ? धर्माचार्यों के आगे क्या ख़तरे में ममता की कुर्सी ? संसद से सनातन राष्ट्र की बड़ी भविष्यवाणी, देखिये सिर्फ़ धर्म ज्ञान पर।
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हिंदुत्व का गौरवशाली चेहरा यूपी का बुलडोज़र बाबा और गोरक्षपीठ के गोरक्षपीठाधीश्वर एक बार फिर इनकी चर्चा चारों तरफ़ है। हिंदुत्व की डगर पर चल रहे योगी बाबा ने अबकी बार जन्माष्टमी के मौक़े पर देश के हिंदुओं को बड़ी चेतावनी दी। कृष्ण जन्मभूमि से इस बात का संदेश दिया कि एक रहेंगे, तो नेक रहेंगे और बटेंगे, तो फिर कटेंगे और अब योगी को लेकर कथावाचक देवकीनंदन महाराज ने देश के 100 करोड़ हिंदुओं से एक ऐसी डिमांड की है, जिसके बाद से बवाल मच गया है। आलम ये है कि अब देशभर के धर्माचायों के लिए संसद में हिस्सेदारी माँगी जा रही है। अब क्या संसद से हिंदू राष्ट्र की बिंगुल फूंक जाएगा और क्या धर्माचार्यों की
मौजूदगी से ममता की कुर्सी ख़तरे में आ जाएगी।
भारत के पड़ोसी मुल्कों में हिंदुओं के साथ मचने वाली कार-माट दुनिया के सामने हैं, पाकिस्तान में हिंदू दम तोड़ रहे हैं, अफ़ग़ानिस्तान में हिंदुओं पर होने वाले ज़ुल्म चरम पर हैं और बांग्लादेश में बंगाली हिंदुओं का ख़ात्मा तेज़ी से हो रहा है। भारत से बाहर जहां नज़र घूमाएँगे, हिंदुओं के अस्तित्व को ख़तरे में ही पायेंगे जिसे देखते हुए बीते दिन जन्माष्टमी पर योगी बाबा ने साफ़ शब्दों में देशवासियों को ये समधाने की कोशिश की कि एकता में ही उनकी भलाई है।
पड़ोसी मुल्कों में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और ख़ुद के घर में असुरक्षित महिलाएँ। ताज़ा उदाहरण कोलकाता में डॉक्टर के साथ हुआ रेप और मर्डर, डॉक्टर के साथ हुई हैवानियत जिसके ख़िलाफ़ लोग अब तक सड़कों पर हैं। और ऊपर से ममता बनर्जी की सरकार, असली गुनहगार कौन है। ममता सरक, रेप आरोपी या फिर ये समाज ? इसी सवाल के ईद-गिर्द देवकीनंदन महाराज का ग़ुस्सा ममता दीदी पर फूटा।
दरअसल विदेशी धरती पर उनकी कथा में जब एक बेटी ने उनसे ये पूछा कि आप यहां संस्कृति पर प्रवचन दे रहे हैं आपके भारत में बेटियों के साथ क्या हो रहा है ? इसी पर शून्य हुए देवकी नंदन महाराज का ग़ुस्सा दीदी पर इस कदर फूटा की उन्होंने दीदी के इस्तीफ़े की माँग कर डाली।
ममता बनर्जी खुद एक स्त्री हैं, उन्हें तो पता होना चाहिए कि किसी पीड़ित बेटी के मामले में कैसा व्यवहार होना चाहिए? और अगर जिन लोगों को ये लगता है कि वो अपने प्रदेश में होने वाली ऐसी घटनाओं को रोकने में असफ़ल है, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। हॉस्पिटल पढ़ी लिखी जगह है, अग़र वहीं डॉक्टर सुरक्षित नहीं हैं तो फिर आम जनता का क्या होगा। बंगाल में सनातनियों के साथ और जगह क्या हो रहा है, अगर अभी हम बांग्लादेश से शिक्षा नहीं ले रहे हैं, तो बाद में हमें पछताना पड़ेगा।
अब सवाल उठता है कि आख़िर इन समस्याओं का निवारण क्या है ? इस पर बात करते हुए देवकी नंदन महाराज ने देश के 100 करोड़ हिंदुओं से संसद में 50 से 55 धर्माचार्यों को भेजने की डिमांड की, बक़ायदा इसके लिए योगी आदित्यनाथ जी का उदाहरण दिया।
50-55 धर्माचार्य संसद में जाने चाहिए, इसका बड़ा उदाहरण योगी जी को देख लो, एक बाबा बैठे हैं और पूरे उत्तर प्रदेश में विकास चल रहा है।जो कोई भी बदमाशी कर रहा है, उस पर बुलडोज़र चल रहा है। मतलब धर्म भी और कर्म भी।जब धर्माचार्य संसद में जाएँगे, तो लिव इन रिलेशनशिप वाले क़ानून नहीं बनेंगे, स्कूल में बच्चों को बॉलिवुड के गानों पर नहीं नाचना पड़ेगा और कोई भी मेरे बच्चों को तिलक लगाने से नहीं रोक पाएगा।
भारतीय राजनीति में योगी बाबा के अलावा कई ऐसे संत हैं, जो आज अपने राजधर्म का पालन कर रहे हैं। हालाँकि 2024 के रण में 6 संत चुनावी मैदान में उतरे थे जिसमें से सिर्फ़ दो ही संसद की चौखट को पार कर पाए। साक्षी महाराज और चिंतामणि महाराज ही जीत का परचंम लहरा पाए थे। संत समाज इस पर ज़ोर देता आया है कि जब-जब राष्ट्र ख़तरे में आया है,इंसानियत पर आफ़त आई है, धर्म को हानि पहुँचाने की कोशिश की गई है, तब-तब साधु-संतो ने ही देश की सत्ता सँभाली है।
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