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अदालत से राहुल गांधी को फटकार, स्वामी रामभद्राचार्य की बड़ी सांकेतिक भविष्यवाणी

चीन विवाद में कूदे तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने राहुल गांधी को जो नसीहत दी, उसी में उनकी एक सांकेतिक भविष्यवाणी भी देखी जा रही है. अदालत की डांट, जगद्गुरु की नसीहत और राहुल से जुड़ी यह भविष्यवाणीइन तीनों के बीच क्या है संबंध, और इसका आपसे क्या है कनेक्शन, जानने के लिए बने रहिए धर्म ज्ञान के साथ.

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ऑपरेशन सिंदूर पर प्रधानमंत्री मोदी को चौतरफा घेरने वाले कांग्रेसी राहुल गांधी संसद के इस पूरे मानसून सत्र में छाए रहे और अब जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें फटकारा, तो फिर से मीडिया की सुर्खियों में आ गए। पड़ोसी मुल्क चालाक चीन पर राहुल गांधी को टिप्पणी करना इतना महंगा पड़ा कि अब देश का संत समाज उन्हें सत्यता का आईना दिखा रहा है। इस विवाद में कूदे तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने राहुल को जो नसीहत दी, उसी में उनकी सांकेतिक भविष्यवाणी तलाशी जा रही है। अदालत की डांट, जगद्गुरु की नसीहत और राहुल से जुड़ी भविष्यवाणी... इनका आपस में क्या संबंध है, यह जानने के लिए जुड़े रहिए धर्म ज्ञान के साथ.

75 की उम्र तक आते-आते स्वामी रामभद्राचार्य ने इस समाज के लिए, ज़रूरतमंदों के लिए और दिव्यांग लोगों के लिए ऐसे-ऐसे असाधारण कार्य किए हैं, जिनके चलते भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया जा चुका है. चित्रकूट में स्थापित तुलसी पीठ नामक धार्मिक और सामाजिक सेवा संस्थान के वे संस्थापक हैं. वे उन लोगों के लिए एक मिसाल हैं, जिनकी ज़िंदगी अंधेरे में है. आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि जगद्गुरु आँखों की रोशनी के बिना 22 भाषाओं के ज्ञाता हैं, 100 से ज़्यादा ग्रंथों के रचनाकार हैं और बतौर कथावाचक इस दुनिया को अध्यात्म से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं. सियासी गलियारों से लेकर संत समाज तक जगद्गुरु रामभद्राचार्य की पकड़ कितनी मज़बूत है, इसका अंदाज़ा इसी से लगाइए. जब पहली बार बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथ ली, उस समारोह में स्वामी रामभद्राचार्य की उपस्थिति दर्ज थी. बीते साल जगद्गुरु के किताब विमोचन कार्यक्रम में पीएम मोदी चित्रकूट पहुँचे थे. आज भी देश के प्रधानमंत्री या फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जब कभी चित्रकूट का दौरा करते हैं, तो जगद्गुरु के दर्शन करने उनके निवास स्थान ज़रूर जाते हैं. पीएम मोदी और जगद्गुरु के बीच अगर मित्रता का भाव है, तो महंत से मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ के लिए जगद्गुरु गुरु तुल्य हैं. जगद्गुरु की दूरदृष्टि का ही नतीजा है कि आज भी राजनीतिक मुद्दों पर की गई उनकी भविष्यवाणियाँ या विचार सत्यता की कसौटी पर खरे उतरते हैं. हाल ही में चीन विवाद को लेकर राहुल गांधी पर किए गए जगद्गुरु के बयान ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है. चीन विवाद में राहुल गांधी को कोर्ट से डाँट क्यों खानी पड़ी और इस फटकार पर जगद्गुरु ने उन्हें सत्यता का कौन-सा आईना दिखाया, इसी पर देखिए हमारी आगे की यह विशेष रिपोर्ट.

इस पूरे मानसून सत्र में राहुल गांधी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पीएम मोदी की इच्छाशक्ति पर सवाल उठाए थे. और अब देश की अदालत को उनके भारतीय होने पर शक है. तभी तो चीन विवाद को लेकर राहुल को फटकार लगाने वाली देश की सर्वोच्च अदालत को यह तक कहना पड़ा कि अगर आप सच्चे भारतीय होते, तो ऐसा नहीं कहते. पूरा मामला क्या है, जिस पर अदालत से राहुल गांधी को डाँट पड़ रही है, पहले वह समझें. इस पूरे विवाद की शुरुआत 16 जून 2022 से होती है, जब राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो यात्रा में थे. इसी यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने भारतीय सेना पर बड़ी टिप्पणी करते हुए यह दावा किया कि चीन ने भारत का कुछ हिस्सा हड़प लिया है. उन्होंने कहा कि लोग भारत जोड़ो यात्रा के बारे में पूछेंगे, लेकिन चीन ने 2000 वर्ग किमी भारतीय ज़मीन कब्जा की है. 20 भारतीय सैनिक मारे गए और हमारे सैनिकों को अरुणाचल में पीटा जा रहा है.

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राहुल गांधी के इसी दावे को आपत्तिजनक बताकर बीआरओ (BRO) के पूर्व निदेशक उदय शंकर श्रीवास्तव ने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और इसके ख़िलाफ़ बाकायदा याचिका दायर की. हालाँकि सुनवाई के दौरान राहुल गांधी हर बार ग़ैरहाज़िर रहे और बार-बार तारीख़ की मांग करते रहे. अंत में उन्होंने 20-20 हज़ार रुपये के निजी मुचलकों पर ज़मानत ले ली.अब जब इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी सामने आई है, तो राहुल गांधी के भारतीय होने पर भी सवाल उठने लगे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “आपको कैसे पता चला कि चीन ने भारत की 2000 वर्ग किलोमीटर ज़मीन पर कब्जा कर लिया है? आपकी विश्वसनीय जानकारी क्या है? अगर आप सच्चे भारतीय होते, तो ऐसा नहीं कहते. आप विपक्ष के नेता हैं. आप संसद में क्यों नहीं बोलते? आप सोशल मीडिया पर ही सब कुछ क्यों कहते हैं?” कोर्ट की यही टिप्पणी राहुल गांधी के लिए फटकार बन गई. इसी फटकार पर बड़ी टिप्पणी करते हुए स्वामी रामभद्राचार्य ने राहुल को आईना दिखाते हुए कहा, “राहुल गांधी को जो फटकार लगाई गई है, वो बिल्कुल उचित है. राहुल गांधी बौखला गए हैं. एक विपक्ष के नेता को ऐसा बचकाना बयान नहीं देना चाहिए.” जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य की यह प्रतिक्रिया अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है.

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कोर्ट की टिप्पणी को सही ठहराना, राहुल गांधी को बचकाना कहना और 'बौखलाहट' जैसे शब्दों का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि राजनीति की कसौटी पर राहुल की निपुणता में अभी भी कमी है. बहरहाल, भारत की जमीन पर कब्जा करने को लेकर चीन कितनी चालाकी से आगे बढ़ रहा है और उसकी यह रणनीति कितनी कामयाब हो पाई है, इसकी वास्तविकता संसद में खुद केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने सामने रखी. उनके बयान से यह स्पष्ट होता है कि चीन के इरादे और भारत की जवाबी रणनीति दोनों ही मुद्दे कितने संवेदनशील हैं. इसलिए ज़रूरी है कि इस मुद्दे पर तथ्यात्मक जानकारी ही साझा की जाए, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा और जनता की सोच प्रभावित न हो. अब जरूर सुनिए कि आखिर रिजिजू ने संसद में इस मुद्दे पर क्या कहा था.

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