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भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने का षडयंत्र! योगी के गुरु भाई निकले मुसलमान !

जिनकी आँखों में योगी का भगवा रंग चुभता है, जिनकी ज़ुबान योगी को कोसती है। जिनके मन में योगी के लिए खोट है, उन्हें ये मालूम होना चाहिए कि योगी का इस्लामिक कनेक्शन उन्हें उनके गुरु भाई से जोड़ता है। आज अगर देश में बढ़ती मुस्लिम आबादी इस्लामिक राष्ट्र की ओर इशारा कर रही है, तो दूसरी तरफ़ योगी बाबा के ख़ुद के गुरु भाई मुसलमान थे।

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जिनकी आँखों में योगी का भगवा रंग चुभता है। जिनकी ज़ुबान योगी को कोसती है, जिनके मन में योगी के लिए खोट है। उन्हें ये मालूम होना चाहिए कि योगी का इस्लामिक कनेक्शन उन्हें उनके गुरु भाई से जोड़ता है। आज अगर देश में बढ़ती मुस्लिम आबादी इस्लामिक राष्ट्र की ओर इशारा कर रही है, तो दूसरी तरफ़ योगी बाबा के ख़ुद के गुरु भाई मुसलमान थे।

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यूपी में फ़िट और दुनिया में हिट होने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सत्ता की पिच पर बैटिंग पर कर रहे एक ऐसे राजनीतिक खिलाड़ी है, जिनके कंधों पर मठाधीश की ज़िम्मेदारी है। राजनीति में कदम रखने से पहले योगी बाबा ने संन्यासी जीवन को धारण किया। गोरखनाथ मंदिर में गोरखनाथ पीठाधीश्वर की भूमिका में आज भी है। प्रशासनिक कार्यों के बीच अपनी मठाधीश की ज़िम्मेदारियों को हमेशा आगे रखा। हम सभी जानते हैं कि योगी को नाथ संप्रदाय से जोड़ने की कड़ी बाबा अवेद्य नाथ बने और इसी कड़ी में एक नाम गुलाबनाथ बापू का है, जो योगी बाबा के गुरु भाई बने। इसी गुरु भाई से योगी का लगाव इस कदर रहा कि इनकी मृत्यु के बाद भी योगी बाबा ने गुजरात जाना नहीं छोड़ा  मृत्यु के बाद भी योगी आदित्य नाथ ने उनकी जगह मठ के नए महंत को नियुक् किया। बापू गुलबानाथ गोरखपुर मठ में होने वाले सभी कार्यक्रमों में हमेशा मौजूद रहे। अपने गुरु भाई से योगी बाबा का नाता कितना गहरा था, इसका खुलासा करते हुए मठ के नये महंत शंकरनाथ बताते हैं। योगी आदित्यनाथ भी हर दूसरे तीसरे साल विसनगर जरूर आते हैं। विसनगर से योगी का नाता सिर्फ नाथ संप्रदाय से ना होकर दिल का भी है। अपने गुरुभाई बापू गुलाबनाथ का स्वास्थ जब बहुत ज्यादा बिगड़ गया था तब योगी फोन से उनका हाल चाल लेते रहते थे।

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लेकिन क्या आप जानते हैं , योगी के मन में अपने गुरु भाई के प्रति इतना प्रेम इतना सम्मान उस वक़्त भी कम नहीं हुआ, जब उन्हें ये मालूम हुआ कि उनके गुरुभाई मुसलमान रह चुके हैं..जी हाँ गुजरात के विसनगर से आने वाले गुलाब नाथ बापू एक मुस्लिम परिवार में जन्में, लेकिन जब उन्हें ख़ुद के वजूद की जड़े सनातन में मिलती दिखी, उसके बाद समाज ने उनका हिंदुत्वादी चेहरा देखा।कहते हैं, अंत समय तक योगी और उनके योगी भाई के बीच करीबी नाता बना रहा।योगी के गुरु भाई के बारे में बताने के पीछे का मक़सद यही है कि जब योगी मुस्लिम से हिंदू बने व्यक्ति को अपना गुरुभाई बना सकते हैं। तो क्या उन्हें एंटी मुस्लिम कहना उचित है ? सीएम योगी धार्मिक गतिविधियों को अनुशासन के दायरे में निभाने की बात करते हैं, खुलकर कहते हैं कि अगर आपको सुविधा चाहिए तो उस अनुशासन को भी मानना सीखिए। इसी के चलते कट्टरपंथी ताक़ते योगी से चिढ़ती हैं। 

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बहरहाल देश के बढ़ती आबादी को लेकर अमेरिकी  प्यू रिसर्च की रिपोर्ट ने चिंता में डाल दिया है। रिपोर्ट कहती है , 2050 तक भारत में दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश होगा और अगर ऐसा होता है, तो क्या शरिया भी होगा। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2050 तक भारत की कुल आबादी 166 करोड़ के आसपास होगी। इसमें मुस्लिम आबादी 31 करोड़ रहेगी। दरअसल रिपोर्ट कहती है,  वृद्धि दर के अनुसार मुस्लिमों की आबादी तेजी से बढ़ी है, लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि फर्टिलिटी रेट (जन्म दर) में गिरावट आई है। 1992-93 में हिंदू महिलाएं का फर्टिलिटी रेट  3.3 था, जबकि मुस्लिम महिलाओं का 4.4 फीसदी था। साल 2022 में हिंदू महिलाओं में प्रजनन दर 1.9 था, जबकि मुस्लिम महिलाओं में 2.3 था। हालांकि, बीते 30 साल में मुस्लिम महिलाओं में बच्चे को जन्म देने का दर 47 फीसदी घटा है और हिंदू महिलाओं का 42 फीसदी. इसके बावजूद मुस्लिमों की जन्म दर अब भी हिंदुओं से ज्यादा है। इन सबके बीच सवाल उठता है कि क्या योगी के रहते भारत पर शरिया का ख़तरा है। हिंदू बहुल भारत क्या इस्लामिक राष्ट्र बन सकता है।

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