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'बच्चों को चाहिए प्यार, आपका पैसा नहीं...', प्रेमानंद महाराज का बयान हुआ वायरल

गुरु जी ऐसा बिल्कुल नहीं है कि हम ऑफिस जाने वाली महिलाएं बच्चों को प्यार नहीं देतीं या फिर समय नहीं देतीं. हम अपने बच्चों को पूरा समय देते हैं और साथ में जॉब भी करते हैं.

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22 Aug 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:15 AM )
'बच्चों को चाहिए प्यार, आपका पैसा नहीं...', प्रेमानंद महाराज का बयान हुआ वायरल
AI Image
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प्रेमानंद महाराज आये दिनों सोशल मीडिया की खबरों में बने रहते हैं, इस बार भी वे सोशल मीडिया पर छाये हुए हैं. दरअसल उनका एक वीडियो बड़ी ही तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कई माता-पिताओं के लिए ऐसा संदेश दिया है जिस कारण उनकी ये बातें हर किसी के मन को छू गई हैं. लेकिन अब ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये कौन सी बात है जिसने हजारों लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.

दरअसल एक पिता अपनी परेशानी लेकर प्रेमानंद महाराज के दरबार में पहुंचा, जहां उसने अपनी परेशानी प्रेमानंद महाराज के साथ साझा करते हुए कहा कि वह और उनकी पत्नी अपने बच्चे के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पा रहे हैं. इसका प्रेमानंद महाराज ने बड़ी ही सहजता के साथ जवाब देते हुए कहा कि…
बच्चों को रुपया-पैसा नहीं बल्कि अपने माता-पिता का साथ चाहिए, अगर हम किसी के लिए पैसा कमा रहे हैं लेकिन उसे हम पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं तो उस पैसे का क्या फायदा. धन भले ही थोड़ा कम आए लेकिन अपने बच्चों को पूरा समय और प्यार दो क्योंकि फिर वृद्धावस्था में जब आपको प्यार की ज़रूरत होगी तो आपको भी उस तरह का प्यार नहीं मिल पाएगा.

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उनकी ये बात लोगों के दिल पर ऐसी लगी कि सभी माता-पिता ने इस बात पर गौर किया.  लेकिए अब उनकी इस बात ने सोशल मीडिया पर बहस भी छेड़ दी. वहीं उनकी इस बात पर कुछ माता-पिता ने सहमति जताई लेकिन कुछ जॉब वाली महिलाओं ने अपनी स्थिति को भी सामने रखा. क्योंकि उन्हें प्रेमानंद महाराज की ये बात समझ नहीं आई. वहीं इस वीडियो पर एक यूज़र ने कमेंट करते हुए लिखा… महाराज जी ने बिल्कुल सही कहा.

दूसरे यूज़र ने लिखा… गुरु जी ऐसा बिल्कुल नहीं है कि हम ऑफिस जाने वाली महिलाएं बच्चों को प्यार नहीं देतीं या फिर समय नहीं देतीं. हम अपने बच्चों को पूरा समय देते हैं और साथ में जॉब भी करते हैं.

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तीसरे यूज़र ने लिखा गुरुजी के रूप में ईश्वर होने का सही अर्थ बताया है. पहले बच्चों को प्यार और समय नहीं देते फिर कहते हैं बच्चों में संस्कार नहीं रहे. 

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