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शिव की नगरी काशी से हनुमान भक्तों का ऐलान, अब आतंकियों की खैर नहीं!
जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, पूरे देश में शोक की लहर है. पूरा देश एक बार फिर पुलवामा के बाद रोया है. पूरा देश न्या
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जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले से पूरे देश में डर, आक्रोश और मातम का माहौल बना दिया है. जैसे ही ये खबर सामने आई, हर सनातनी की आंखें नम हो गईं, हर सनातनी की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा है। ये मामला कितना गंभीर है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब का दो दिवसीय दौरा छोड़कर तुरंत दिल्ली लौट आए हैं. वहीं इन आतंकियों ने हमला करने से पहले पर्यटकों से नाम पूछा, धर्म पूछा, कलमा पढ़वाया और पैंट खोलकर प्राइवेट पार्ट चेक किया। और जब निकला हिंदू, तो गोली मार दी. पास खड़ी पत्नी चिल्लाती रही, "मेरे पति को छोड़ दो", तो दूसरी ओर एक और पत्नी रोती हुई बोली, "अगर मेरे पति को मार दिया है, तो मुझे और मेरे बच्चों को भी मार दो." लेकिन आतंकियों ने एक न सुनी और 28 मासूम लोगों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। 17 लोग जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं.
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पहलगाम हमले से पहले भी कई बार जम्मू कश्मीर आतंकियों के हमले से दहल चुका है. 21 मार्च 2000 को अनंतनाग में आतंकियों ने 36 लोगों को मौत के घाट उतारा. इसी तरह 2 अगस्त 2000 को आतंकी हमले में करीब 32 लोगों की मौत हुई. 6 अगस्त 2002 को चंदनवारी बेस कैंप में आतंकियों ने 11 लोगों को मारा, 23 मार्च 2003 में पुलवामा के नंदीमार्ग गांव में आतंकी हमले में 24 लोग मारे गये, 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमला हुआ, जिसमें 40 जवान शहीद हुए और अब वही मंजर एक बार 22 अप्रैल को एक बार फिर आतंकियों ने 28 लोगों को गोली मार दी गई।
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यह सब कब तक चलता रहेगा? जब केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा दे रही है, तो वहां आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उसी की है. फिर बार-बार ये हमले क्यों दोहराये जा रहे है ? पूरा देश जानना चाहता है. इस हमले के बाद हर कोई परेशान है. इस वीडियो को देखकर हर किसी का दिल भर आया है।वहीं इसी कड़ी में वाराणसी के लोगों ने 51 फीट की भव्य हनुमान मूर्ति के सामने मृत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी ताकि उनके परिजनों को साहस मिले, इसके लिए मौन रखा गया और प्रधानमंत्री मोदी से सर्जिकल स्ट्राइक से भी बड़ी स्ट्राइक की मांग की गई.
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"इस घटना के बाद हर सनातनी न्याय की मांग कर रहा है. जम्मू-कश्मीर ही नहीं, भारत के कई राज्यों में हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं लेकिन ऐसे में ये सवाल उठता है कि ऐसा क्या किया जाए कि दोबारा ऐसी घटना न हो ?”