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गरुड़ पुराण में घंटियों का है विशेष महत्व, जानें पूरी कहानी..

घंटी का महत्व केवल मंदिर के चार दिवारी तक सीमित नहीं है. बल्कि इसकी आवाज़ की गूँज हर व्यक्ति के अंतर आत्मा को शुद्ध और सकारात्मक उर्जा से भर देती है, लेकिन क्या आपको पता है कि मंदिर में घंटी का इस्तेमाल आख़िर क्यों की जाती है.

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मंदिर छोटा हो या बड़ा पूरब में हो या पश्चिम में हर मंदिर में घंटी ज़रूर लगाई जाती है. घंटी का महत्व केवल मंदिर के चार दिवारी तक सीमित नहीं है. बल्कि इसकी आवाज़ की गूँज हर व्यक्ति के अंतर आत्मा को शुद्ध और सकारात्मक उर्जा से भर देती है, लेकिन क्या आपको पता है कि मंदिर में घंटी का इस्तेमाल आख़िर क्यों की जाती है. मंदिर में घंटी लगाने और वहां घंटी बजाने के पीछे धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक करण भी हैं. चलिए जाने हैं  पूजा और मंदिर में घंटी का महत्व और इससे जुड़ी कहानी के बारे जानकार कहते हैं कि मंदिर में घंटी लगाने और वहां घंटी बजाने के पीछे धार्मिक के साथ-साथ पुराणों में भी इसका उल्लेख किया गया है.  

क्या है पौराणिक कथा?
एक कथा के अनुसार नारद मुनि ने भगवान विष्णु से पूछा था कि 
प्रभु! जब कोई भक्त आपकी पूजा करता है, तो आपको सबसे प्रिय क्या लगता है? भगवान विष्णु ने मुस्कराकर जवाब दिया था कि जब घंटी की मधुर ध्वनि मेरे कानों में पड़ती है, तो वह मेरे लिए सबसे प्रिय होती है. यह ध्वनि मेरे लोक तक पहुंचती है और मैं समझ जाता हूं कि कोई मुझे प्रेम से याद कर रहा है.

गरुड़ देव से जुड़ी कथा
अब जो कथा में आपको बताने जा रही हूं इस  कथा में गरुड़ जी और पूजा में उपयोग होने वाली घंटी के संबंध को दर्शाती है. दरअसल, प्राचीन काल की बात है. एक बार गरुड़ जी ने देखा कि पृथ्वी पर असुरों का आतंक बढ़ रहा है और वे देवताओं के यज्ञ, पूजा आदि विधियों को बाधित कर रहे हैं. साधु-संत पूजा के समय भयभीत रहते थे, जिससे पूजा की पवित्रता भंग हो रही थी. तब  गरुड़ जी ने भगवान विष्णु से कहा प्रभु! क्या कोई ऐसा उपाय नहीं जिससे पूजा के समय राक्षसी शक्तियों को दूर किया जा सके और वातावरण शुद्ध बना रहे? तब भगवान विष्णु ने मुस्कुराते हुए कहा था कि गरुड़! तुम मेरे सच्चे सेवक हो। तुम्हारे पंखों की जो ध्वनि है, वह इतनी दिव्य और शक्तिशाली है कि उससे राक्षसी शक्तियां भयभीत हो जाती हैं.  उसके बाद विष्णु जी ने ऋषियों को आदेश दिया कि अब से जब भी पूजा हो, तो एक ऐसी वस्तु का उपयोग करो जिसमें गरुड़ के पंखों की ध्वनि के समान कंपन हो.. यही कंपन वातावरण को शुद्ध करेगा और बुरी शक्तियों को दूर भगाएगा.

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देव शिल्पी विश्वकर्मा ने गरुड़ जी की पंखों की ध्वनि से प्रेरणा लेकर घंटी बनाई. और इसीलिए जब घंटी बजती है, तो उसकी ध्वनि में गरुड़ जी के पंखों के स्पंदन जैसा तेज और पवित्र कंपन होता है. इसीलिए ऐसा माना जाता है कि पूजा में घंटी बजाना गरुड़ जी का आह्वान करना है. जहां घंटी की ध्वनि होती है, वहां गरुड़ जी की उपस्थिति मानी जाती है, और गरुड़ जी जहां होते हैं, वहां नकारात्मक शक्तियाँ टिक नहीं सकतीं.

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गरुड़ देव कौन हैं?
गरुड़ देव हिन्दू धर्म में एक अत्यंत पूज्यनीय और शक्तिशाली देवता हैं. वे भगवान विष्णु के वाहन हैं और उन्हें पक्षीराज कहा जाता है. गरुड़ अर्ध-मानव और अर्ध-पक्षी रूप में माने जाते हैं उनका चेहरा, चोंच और पंख पक्षी के समान हैं, जबकि शरीर मानव जैसा होता है.गरुड़ जी का उल्लेख वेदों, पुराणों और महाभारत में प्रमुख रूप से मिलता है। वे अपने बल, वेग, और भक्तिभाव के लिए प्रसिद्ध हैं. विष्णु पुराण, गरुड़ पुराण और महाभारत में उनकी वीरता और समर्पण का सुंदर वर्णन मिलता है. वहीं घंटी की पूजा में उपयोग अलग-अलग कारणों से की जाती है. घंटी केवल एक धातु की वस्तु नहीं, बल्कि गरुड़ देव के पवित्र कंपन और शक्ति का प्रतीक है. जब भी आप मंदिर या घर में पूजा करें और घंटी बजाएं, तो यह समझें कि आप गरुड़ देव को आमंत्रित कर रहे हैं, जो आपकी पूजा को सफल और सुरक्षित बनाते हैं.

 

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