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हिंगलाज माता की चौखट पर बलूचिस्तान, अब क्या खंड-खंड होगा पाकिस्तान ?

शक्तिपीठ हिंगलाज मंदिर से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें आधे से ज़्यादा बलूचिस्तान माता रानी की चौखट पर आकर उनकी भक्ति कर रहा है लेकिन क्या यही भक्ति कल को पाकिस्तान का काल बनेगी ? दिनों दिन हिंदू राष्ट्र बनता बलूचिस्तान क्या पाकिस्तान के संहार का कारण बनेगा ? हिंगलाज माता की शरण में पहुँचा बलूचिस्तान क्या खुद को पाकिस्तानी हुकूमत से मुक्त कर पाएगा ?

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इन दिनों माता रानी के भक्त शक्ति की भक्ति में डूबे हैं..नवरात्रि की धूम चारों तरफ है। खाड़ी देशों से लेकर यूरोप तक माँ भगवती के जयकारों के बीच गरबा डांस किया जा रहा है। शक्ति की भक्ति से सराबोर उनके भक्त आनंदित है और दुश्मन ख़ौफ़ में नवरात्र काल में पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की हुकूमत और आर्मी, दोनों की नींद उड़ी हुई है। बलूचिस्तान की उठती आवाज़ से दिनों दिन पाक आर्मी के कान फट रहे हैं। आर्मी चीफ़ जनरल आसिम मुनीर ख़ुद से बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की खराब हालत की बात कबूल कर रहे हैं। इन सबके बीच शक्तिपीठ हिंगलाज मंदिर से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें आधे से ज़्यादा बलूचिस्तान माता रानी की चौखट पर आकर उनकी भक्ति कर रहा है…लेकिन क्या यही भक्ति कल को पाकिस्तान का काल बनेगी ? दिनों दिन हिंदू राष्ट्र बनता बलूचिस्तान क्या पाकिस्तान के संहार का कारण बनेगा ? हिंगलाज माता की शरण में पहुँचा बलूचिस्तान क्या खुद को पाकिस्तानी हुकूमत से मुक्त कर पाएगा ? 

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हिंगोल नदी किनारे..खेरथार पहाड़ियों के बीच एक ऐसी प्राकृतिक गुफा मौजूद हैं, जहां माँ हिंगलाज की स्वयंभू वेदी विद्यमान हैं। पौराणिक मान्यता कहती है, सती के वियोग में दुखी भगवान शिव जब सती के पार्थिव देह लेकर तीनों लोकों में घूमने लगे तो विष्णुजी ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के देह के 51 टुकड़े कर दिए, जिस-जिस स्थान पर सती के अंग गिरे, उन स्थानों को शक्तिपीठ कहा गया, जिसमें हिंगलाज मंदिर भी शुमार है। नाथ संप्रदाय से आने वाला प्रत्येक शख़्स मां हिंगलाज को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजता है। इस मंदिर से ना सिर्फ़ हिंदुओं की आस्था जुड़ी है, बल्कि मुस्लिमों का भी आगाध प्रेम हैं। आलम ये है कि मंदिर की सुरक्षा के लिए बलूच मुस्लिम चौबिसों घंटे तैनात रहते हैं..जब-जब आतंकियों ने मंदिर को चोट पहुँचाने की कोशिश की, मां की शक्तियों ने नापाक इरादों को नेस्तानाबूत किया है। तभी से भारत विरोधी ताक़तें इस गुफा में कदम रखने से कतराती है। मंदिर से जुड़ी मान्यता कहती है,  मर्यादा पुरुषोत्‍तम श्रीराम ने भी यात्रा पर इस शक्तिपीठ में दर्शन किए थे। हिंदू ग्रंथों में बताया गया है कि भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि ने भी यहां घोर तप किया था। इतना ही नहीं, मनोरथ सिद्धि के लिए गुरु गोरखनाथ से लेकर गुरु नानक देव और  दादा मखान जैसे आध्‍यात्मिक संत भी यहां आ चुके हैं।..कुछ बलूचिस्तान लोग हिंगलाज माता में नाना पीर के रूप में भी पूजते हैं। हिंगलाज माता के प्रति बलूचिस्तान की आस्था का अंदाज़ा इस वीडियो को देखकर लगा सकते हैं, जिसमें आधे से ज़्यादा बलूचिस्तान अपने सनातनी रूप में मां की शरण में पहुँचा हुआ है। 

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असुरों के आतंक से परेशान देवताओं ने जब-जब माँ भगवती का आवाहन किया, अपने अलग-अलग रूपों में प्रकट में होकर माँ भगवती ने असुरों का संहार किया। अब जब आधे से ज़्यादा बलूचिस्तान माँ हिंगलाज के चरणों में जाकर नतमस्तक हो चुका है, तो अब नापाक पाकिस्तान का क्या हाल होगा। शक्ति के त्रिशूल से पाकिस्तान खंड-खंड होगा या फिर पूर्णतः संहार पिछले 75 सालों से बलूचिस्तान के मूल निवासी पाकिस्तान के अत्याचारों की जिस अग्नि में जले हैं, क्या उसके बदला लेने का समय अब आ चुका है ?

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