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चमत्कारों से भरा है बाबा बैजनाथ मंदिर, खुद भक्त की सहायता के लिए प्रकट हुए थे महादेव, जानें रहस्य

महाकाल की धरती मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में बाबा बैजनाथ ने अपने चमत्कारों से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया है. भक्तों का बाबा पर इतना दृढ़ विश्वास है कि वे मंदिर से खाली झोली जा ही नहीं सकते हैं. सिर्फ स्थानीय भक्त ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने से भक्त आकर बाबा का आशीर्वाद लेते हैं.

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भक्तों का अपने ईष्ट देव पर विश्वास इतना होता है कि समय आने पर भगवान खुद उनकी मदद करने पहुंच जाते हैं और अपने होने का सबूत देते हैं.  

भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं बाबा बैजनाथ

भक्त खुद महसूस करते हैं कि उनकी मदद उनके ईष्ट देव ने की है, लेकिन क्या कभी आपने ऐसा सुना है कि भगवान खुद अदालत में चलकर गए और केस का रुख पलटकर रख दिया? इस जीवांत घटना के साक्षी कई भक्त रहे हैं और आज भी कई चमत्कारों के साथ मध्य प्रदेश की धरती पर बाबा बैजनाथ भक्तों की हर मनोकामना को पूरा कर रहे हैं.

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चमत्कारों से भरा है बाबा बैजनाथ मंदिर

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महाकाल की धरती मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में बाबा बैजनाथ ने अपने चमत्कारों से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया है. भक्तों का बाबा पर इतना दृढ़ विश्वास है कि वे मंदिर से खाली झोली जा ही नहीं सकते हैं. सिर्फ स्थानीय भक्त ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने से भक्त आकर बाबा का आशीर्वाद लेते हैं. मंदिर एक नहीं, कई चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है. प्रचलित किंवदंती की मानें तो 1879 में जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था, तब मंदिर में एक छोटा सा शिवालय था. स्थानीय लोग मंदिर में पूजा-पाठ करने आते थे. अब वक्त लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन की पत्नी ने पूजने का कारण पूछा तो बताया गया कि बाबा हर मनोकामना को पूरा करते हैं. उस समय अंग्रेजों ने अफगानिस्तान पर आक्रमण कर रखा था और कर्नल मार्टिन ने आगर-मालवा को युद्ध की छावनी में तब्दील कर रखा था. उन्हें लंबे समय तक युद्ध पर रहना पड़ता था.

भक्त की सहायता के लिए प्रकट हुए थे महादेव 

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एक समय ऐसा आया जब लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन ने पत्नी को खत लिखना बंद कर दिया और घबराई पत्नी ने भगवान शिव की अराधना शुरू की. लंबे समय बाद लौटे लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन ने बताया कि युद्ध के क्षेत्र में वह मरते-मरते बचे और किसी साधु-बाबा ने आकर उनकी मदद की. ये सुनकर दोनों को विश्वास हुआ कि बचाने वाले बैजनाथ बाबा ही थे. पत्नी के कहने पर लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया. यह देश का पहला मंदिर बना, जिसका रखरखाव और बनाने का काम दोनों अंग्रेजों ने कराया, और वह जब तक यहां रहे, बाबा बैजनाथ की पूजा करते रहे. 

खुद बाबा बैजनाथ उनकी जगह केस लड़ने गए थे

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स्थानीय मान्यता की मानें तो मंदिर में वकील जयनारायण उपाध्याय उर्फ बाप जी के साथ भी चमत्कार हुआ. वकील जयनारायण उपाध्याय को केस की पैरवी पर जाना था, लेकिन वे शिव की भक्ति में ऐसे लीन हुए कि कोर्ट जाना भूल गए. जब वे कोर्ट पहुंचे तब तक मुकदमा जीत चुके थे. माना जाता है कि खुद बाबा बैजनाथ उनकी जगह केस लड़ने गए थे. 

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