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महाकुंभ में मची भगदड़ के बीच मोदी की हुई ऐसी टेंशन, योगी को घुमा डाला फोन

सौ बात की एक बात ये कि इस पूरे हादसे के बाद प्रशासन की तरफ़ से हर वो मुमकिन कोशिश की जा रही है, ताकी श्रद्धालुओं की सुरक्षा बनी रहे..बक़ायदा तीर्थयात्रियों से विनम्र आग्रह किया जा रहा है कि संगम की ओर आने की कोशिश ना करें। अन्य घाटों पर स्नान करें और अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करें लेकिन इन सबके बीच सवाल उठता है कि महाकुंभ में मचने वाली भगदड़ के पीछे का असली गुनहगार कौन है ?

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संगम की रेती पर चल रहे नव्य और भव्य महाकुंभ के बीच मौनी अमावस्या के मौक़े पर बीती शाम भक्तों के लिए काल बनकर आई। अचानक से  भगदड़ मचने से 40 से ज़्यादा लोग घायल हो गये। वहीं 10  से ज़्यादा लोगों की मृत्यु हो गई। महाकुंभ में मची इसी भगदड़ के कारण अब दिल दहला देने वाली तस्वीरें आ रही हैं. सभी अपनों को ढूंढने में लगे हैं। रोते-बिलखते परिजन कुंभ मेला में बिछड़े अपनों को ढूंढ रहे हैं. किसी का भाई खो गया है तो किसी का बच्चा हालाँकि अभी भी प्रशासन स्थिति कंट्रोल करने में लगा हुआ है। 

अस्पताल में घायलों का इलाज चल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ख़ुद इन हालातों पर नज़र बनाए हुए हैं, बक़ायदा श्रद्धालुओं से अपील की हैऔर कहा है। मां गंगा के जो जिस घाट के समीप है, वहीं स्नान करें। संगम नोज की ओर जाने का प्रयास न करें। स्नान के लिए कई स्नान घाट बनाए गए हैं । वहां पर भी स्नान किया जा सकता है। प्रशासन के निर्देशन का अनुपालन करें और व्यवस्था बनाने में सहयोग करिए। किसी भी अफवाह पर ध्यान ना दें।


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प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस सुरक्षा होने के बावजूद संगम की ओर बढ़ती भीड़ अचानक से बेक़ाबू कैसे हुई..भगदड़ कैसे मची। क्या इस हादसे के पीछे विघ्टनकारी ताक़तों का हाथ या फिर सारे इंतज़ाम होने के बावजूद , प्रशासन की तरफ़ से लापरवाही हुई है फ़िलहाल इन सवालों के जवाब किसी के पास नहीं है..लेकिन इस भगदड़ के चश्मदीद गवाह क्या कह रहे हैं। श्रद्धालुओं की मौत और घायल होने से मची अफरातफरी के बीत अखाड़ा परिषद में 13 अखाड़ों का अमृत स्नान स्थगित कर दिया है। इस पूरी घटना पर दुख जताते हुए कहा कि हम लोग मौनी अमावस्या का स्नान नहीं करने का फैसला लिया है अब हम लोग बसंत पंचमी का अमृत स्नान करेंगे ।अग्नि अखाड़ा की महामंडलेश्वर कनकेश्वरी देवी हो या फिर अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि। हर कोई लोगों को वापस शिवर में जाने की अपील करता दिखा। इसी भगदड़ को देखते हुए ख़ुद सामने आए जगतगुरु स्नामी रामभद्राचार्य ने भी भक्तों को संगम की ओर ना जाने की अपील की है। बक़ायदा ये कहा है कि  महाकुंभ में आने वाले सभी श्रद्धुलों से अनुरोध कर रहा हूँ, आज क्षमता से अधिक भीड़ आ गई है प्रयागराज में, इसलिए संगम का आग्रह छोड़ दें।और अपने-अपने निकट वाले घाट पर स्नान करें, सब लोग अपनी सुरक्षा में रहे, एक दूसरे की सुरक्षा करे। मैं वैष्णव संप्रदाय का सबसे वरिष्ठ धर्माचार्य होने के नाते तीनों अखाड़ों से भी कहूंगा कि आज का अमृत स्नान निरस्त कर दिया जाए।

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इन्हीं हालातों के बीच पीएम मोदी ने बिना देरी किये मुख्यमंत्री को फ़ोन घुमा दिया। 1 घंटे में दो दफ़ा फ़ोन करके घायलों के लिए की गई व्यवस्था की समीक्षा ली और श्रद्धालुओं को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी कहा। सौ बात की एक बात ये कि इस पूरे हादसे के बाद प्रशासन की तरफ़ से हर वो  मुमकिन कोशिश की जा रही है, ताकी श्रद्धालुओं की सुरक्षा बनी रहे। बक़ायदा तीर्थयात्रियों से विनम्र आग्रह किया जा रहा है कि संगम की ओर आने की कोशिश ना करें। अन्य घाटों पर स्नान करें और अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करें लेकिन इन सबके बीच सवाल उठता है कि महाकुंभ में मचने वाली भगदड़ के पीछे का असली गुनहगार कौन है ?

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