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प्रभु जगन्नाथ का भक्त बना अमेरिका सैन फ्रांसिस्को में निकलेगी भव्य रथ यात्रा
सैन फ्रांसिस्को में प्रभु जगन्नाथ,अमेरिकी जमीन पर जगन्नाथ रथ यात्रा। अमेरिकी बने प्रभु जगन्नाथ के भक्त, अब अमेरिका बोलेगा जय जगन्नाथ ।
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ओड़िसा के पुरी शहर की जगन्नाथपुरी धाम में आकर, हर कोई अपने आप को धन्य समझता है, क्योंकि धरती के इसी बैकुंठ लोक में महाप्रभु के साक्षात दर्शन होते हैं।यही पर 16 कलाओं के ज्ञाता भगवान श्री कृष्ण की धड़कने सुनाई देती हैं और यहीं पर महाप्रभु का महाप्रसाद ग्रहण करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। रहस्यों से भरी प्रभु जगन्नाथ की यही अलौकिक दुनिया आज उनके भक्तों से पटी हुई है क्योंकि नौ दिनों की यात्रा पर प्रभु जगन्नाथ अपनी नगर भ्रमण पर निकल चुके हैं। आज प्रात सुबह जैसे ही प्रभु जगन्नाथ रथ पर विराजमान हुए भक्तों की भीड़ द्वारा रथ खिंचने का सिलसिला आरंभ हो गया। 16 किलोमीटर की ये रथ यात्रा कितनी भव्य हैं, इसका अंदाज़ा इसी से लगाइये 18 हाथ,101 ट्रक और 30 अखाड़े शामिल हैं। ठीक इसके एक हफ़्ते बाद अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में प्रभु जगन्नाथ पधारेंगे। यानी की अमेरिकी ज़मीन पर भी भव्यता के साथ प्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाएगी। प्रभु जगन्नाथ की भक्ति में डूबी पश्चिमी संस्कृति किस प्रकार आध्यात्म के पथ पर चल पड़ी है। 1967 से निकाली जाने वाली रथ यात्रा आज की डेट में कितनी भव्य होती है, ये जानने के लिए देखिये धर्म ज्ञान।
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भारत से कोसो मील दूर अमेरिका में मौजूद कैलिफोर्निया और कैलिफोर्निया का सैन फ्रांसिस्को शहर अमेरिका में रह रहे हिंदुओं के लिए क्या मायने रखता है, इसका अंदाज़ा इसी से लगाइये हर साल इसी शहर में प्रभु जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाती है। बड़े ही धूम धड़ाके के साथ जय जगन्नाथ के जयकारों के बीच महाप्रभु के रथ को खिंचा जाता है। जो कि 1967 में भक्ति वेदांत स्वामी प्रभुपाद के नेतृत्व में पहली दफ़ा महाप्रभु की रथ यात्रा निकाली गई, तब से लेकर आज तक इस परंपरा का निर्वाहन इस्कॉन करता आया है। रथ यात्रा के संबंध में इस्कॉन का कहना है।
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जगन्नाथ का अर्थ है ‘ब्रह्मांड का स्वामी’। वैदिक साहित्य में उल्लेख है कि केवल रथ पर भगवान के दर्शन करने से ही व्यक्ति जन्म-मृत्यु की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए उन्नति करता है।' अब जो कि जगन्नाथ रथ यात्रा सनातनियों का महा पर्व है तो फिर अमेरिकी इसमें दिलचस्पी क्यों लेंगे ? जो कि भगवान के घर में गोरे काले का कोई भेद नहीं है। यही वजह है कि यात्रा शुरु होने से पहले इस्कॉन द्वारा ये सूचना दी जाती है। कृपया रथों के इस अद्भुत आध्यात्मिक उत्सव में हमारे साथ शामिल हों और अपने अस्तित्व को शुद्ध और उत्कृष्ट बनाएं। आपको रथ खींचने, निःशुल्क भोज में भाग लेने, प्रदर्शनियों में घूमने, सांस्कृतिक प्रदर्शन देखने और नए दोस्त बनाने का अवसर मिलेगा।बच्चों को वैदिक संस्कृति से परिचित कराने और भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद पाने का यह एक शानदार अवसर है। वे पुनर्जन्म के विज्ञान, भगवद गीता, भगवान कृष्ण की लीलाओं को दर्शाने वाले नाटक, नृत्य और भक्ति गीत और संगीत को समझाने वाली प्रदर्शनी देख सकते हैं।'
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देखा जाए, तो प्रभु जगन्नाथ की भक्ति सिर्फ़ भारत तक ही सीमित नहीं है..महाप्रभु के भक्त दुनियाभर में मौजूद है। यही कारण है कि जगन्नाथपुरी से जैसे ही महप्रभु का रथ चलना शुरु होता है, रथ के पहिये पूरी दुनिया में धूमने शुरु हो जाते है।..ऐसे में आप भी बोलिये जय जगन्नाथ ।