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सालों बाद पुराने अंदाज़ में रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर योगी का दिखेगा रौंद्र रूप

महाकुंभ को लेकर संतों की बड़ी डिमांड योगी के रडार पर होंगे रोहिंग्या मुसलमान। लव जिहाद के बाद रोहिंग्या मुसलमान की बारी ।

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अगले साल यानी 2025 में महाकुंभ है 45 दिनों तक चलने वाला यही महापर्व हर 13 साल बाद आता है और हरिद्वार से लेकर प्रयागराज, नासिक, उज्जैन की रौनक़ सातवें आसमान पर होती है। योगी हुकूमत में अभी से कुंभ की तैयारियाँ शुरु हो चुकी है और इन्हीं तैयारियों के बीच रोहिंग्या मुसलमानों के ख़िलाफ़ देश के साधु-संतों ने मोर्चा खोल दिया है। डिमांड ऐसी की है, जिसे सुनकर रोहिंग्या मुसलमान बिलबिला उठेंगे। लव जिहाद के बाद अब क्या रोहिंग्या मुसलमानों पर योगी बाबा का बुलडोज़र चलेगा। 

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कुंभ का इतिहास समुंद्र मंथन के आदिकाल से जुड़ा है ये जग ज़ाहिर है कि देवताओं और राक्षसों के बीच होने वाले इसी समुंद्र मंथन से उत्पन्न विष का ग्रहण महादेव किया और जब अमृत निकला, तो उसे देवताओं ने ग्रहण किया लेकिन क्या आप जानते हैं, देवताओं और राक्षसों के बीच 12 वर्षो तक चले इसी संग्राम के कारण 12 साल बाद कुंभ का पर्व मनाया जाता है और जिन-जिन स्थानों पर अमृत गिरा। उन्हीं जगहों पर कुंभ मेले आयोजित होता है। 12 साल में एक बार मनाया जाने वाले महाकुंभ गुरु बृहस्पति की गति पर निर्धारित होता है। महाकुंभ स्नान की एक डुबकी मोक्ष की प्राप्ति ,पापों से मुक्ति, निरोगी काया से लेकर धन संपदा प्राप्ति का वरदान देती है। यही कारण है कि कुंभ की महत्ता सर्वोपरी है। अब जो कि ये दुर्लभ मौक़ा, अगले साल 2025 में आएगा। प्रयागराज की धरती पर साधु-संतों का मेला लगेगा। जिसे देखते हुए देश का संत समाज कई माँगे कर रहा है और सबसे बड़ी माँग है, महाकुंभ में रोहिंग्या मुसलमानों की एंट्री पर बैन लेकिन क्या ऐसा मुमकिन है ?

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महाकुंभ को लेकर दंडी सन्यासियों की एक बड़ी डिमांड सामने आई है। रोहिंग्या मुसलमान को ख़तरा बताते हुए उनकी कुंभ में एंट्री बैन करने की माँग की हैऐसे में सवाल उठता है कि कावड़ रूट पर नाम बताओं , पहचान बताओं का फ़रमान सुनाने वाले योगी बाबा क्या रोहिंग्या मुसलमानों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई करेंगे। 

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अबकी बार का महाकुंभ ऐतिहासिक होगा क्योंकि प्रदेश के मुखिया सनातन के हार्डकोर चेहरे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। सनातन से कोई भी समझौता योगी बाबा को मंजूर नहीं है। जो कहते हैं, वो करके दिखाते हैं कावड़ रूट को लेकर नेम प्लेट का विवाद अब तक थमा नहीं है। ऊपर से श्रृंगवेरपुर पीठाधीश्वर स्वामी श्री नारायण आचार्य शांडिल्य जी महाराज ने कुंभ से रोहिंग्या मुसलमानों को दूर रखने की वकालत की है। बक़ायदा दंडी संन्यासियों की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद को इसको लेकर ख़त लिखा है। इसी के साथ उन्होंने महाकुंभ के आयोजन में आने वाले हर व्यक्ति का इंश्योरेंस कराए जाने की भी केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है। उन्होंने बताया है कि वर्ष 2013 तक आयोजित हुए कुंभ मेले में श्रद्धालुओं और साधु संतों का इंश्योरेंस कराया जाता था।इतना ही नहीं, महाकुंभ मेले में आने वाले हर एक साधु संत और श्रद्धालुओं के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड या फिर किसी दूसरे तरह के पहचान पत्र को अनिवार्य किए जाने की मांग उठाई है। योगी सरकार से अनुरोध किया गया है कि महाकुंभ मेले के आयोजन की सुरक्षा में किसी तरह की सेंध ना लगे इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाए। 


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गौर करने वाली बात ये , कि घुसपैठ की आड़ में रोहिंग्या मुसलमानों की मौजूदगी भारत की अखंडता के लिए ख़तरा बनी हुई है। लाखों रोहिंग्या मुसलमान बिना दस्तावेज के दशकों से बांग्लादेश में रह रहे हैं। वहीं, कई रोहिंग्या मुसलमान अवैध रूप से भारत में घुसपैठ कर चुके हैं, इनकी वापसी का मोदी सरकार कोई समाधान अब तक नहीं निकाल पाई..वहीं यूपी में कई दफ़ा रोहिंग्या मुसलमानों का मुद्दा उठा है। मोदी सरकार बोल चुकी है कि रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में रहने का अधिकारी नहीं है और विदेशी एक्ट के तहत कार्रवाई करने का डर दिखा चुकी है। राजनीतिक पंडितों की मानें, तो पीएम मोदी की तुलना में योगी बाबा अपने धर्म के प्रति ज़्यादा कट्टर हैं। किसी भी राज्य में लव जिहाद के ख़िलाफ़ उम्रक़ैद का प्रावधान नहीं है, लेकिन योगी बाबा ने इसे यूपी में करके दिखाया है और अब जब बात रोहिंग्या मुसलमानों की आती है तो उनके ख़िलाफ़ योगी कौन सा बड़ा कदम उठाएँगे, अब ये देखना बाक़ी है।

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