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तिरुपति बालाजी का लड्डू विवाद के बाद मठ-मंदिरों के लिए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कर दिया बड़ा एलान

गौ को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाने के लिए देशव्यापी अभियान चला रहे ज्योर्तिरमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती तिरुपति लाड्डू विवाद को लेकर अत्याधिक क्रोधित दिखे, साथ शब्दों में इस बात का ऐलान कर दिया है कि अब आस्था से किसी भी तरह का घृणित अपमान सहा नहीं जाएगा।

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सरकार के कंट्रोल में चार लाख मठ-मंदिर और जेब में लाखों का चढ़ावा, फिर भी अशुद्धता में ईश्वर का धाम। तिरुपति बालाजी का लड्डू विवाद थमने का नाम इसलिए नहीं ले रहा है, क्योंकि लड्डू प्रसादम में सुअर की चर्बी का इस्तेमाल भक्तों के गले से नहीं उतर रहा है। भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित तिरुपति बालाजी का धाम, जिसकी हिस्ट्री आज भी एक मिस्ट्री बनी हुई है, एक ऐसा तीर्थस्थल है, जहां प्राचीन काल से भक्तों को बालाजी के साक्षात दर्शन हो रहे हैं।  हर घड़ी, हर दिन यहाँ आँखों देखी चमत्कार होते हैं। 

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मंदिर की चौखट से प्रसाद ग्रहण करके बालाजी के भक्त अब तक ख़ुद को धन्य समझते आये हैं, लेकिन इन लड्डू प्रसादम को अपवित्र करने की साजिश ने ना सिर्फ़ तिरुमाला की प्रतिष्ठा को कलंकित किया है, बल्कि इन भक्तों की आस्था को भी कुचलने का काम किया है। यही कारण है कि अब देश के शंकराचार्य सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिये हैं। दरअसल गौ को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाने के लिए देशव्यापी अभियान चला रहे ज्योर्तिरमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती तिरुपति लाड्डू विवाद को लेकर अत्याधिक क्रोधित दिखे। गौ-ध्वज स्थापना भारत यात्रा के दौरान शंकराचार्य ने साथ शब्दों में इस बात का ऐलान कर दिया है कि अब आस्था से किसी भी तरह का घृणित अपमान सहा नहीं जाएगा। ना सिर्फ़ धर्म स्थानों से सरकारों का दखल ख़त्म होना चाहिए बल्कि गाय को राष्ट्रीय माता बनाए जाने की भी ज़रूरत समझाई दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की माँग की  ये बताने की कोशिश की है , अगर अब गौ के लिए आवाज़ नहीं उठाई, तो कल गाय के देसी घी की बजाए, गाय की चर्बी से ईश्वर को भोग लगाना पड़ेगा। देखिये उन्होंने क्या कुछ कहा ।

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