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राम मंदिर परिसर में बन रही सुरंग, जानिए क्या है इसके पीछे का मक़सद?

56 महीनों में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार हुआ. इतना सब होने के बाद, अब क्या सुरंग के रास्ते रामलला तक पहुँचा जाएगा ? आज ये सवाल इसलिए क्योंकि मंदिर के अंदर ही 80 मीटर लंबी की खुदाई कर सुरंग बना दी गई है हालाँकि सुरंग के रास्ते दुश्मनों पर नजर रखी जाएगी या फिर रामलला के दर्शन होंगे ? मंदिर के अंदर सुरंग बनाने के पीछे का क्या मक़सद है?

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500 वर्षों के इंतज़ार के बाद मंदिर की ईंट रखी गई,1200 करोड़ रुपये की लागत में मंदिर का निर्माण हुआ. 56 महीनों में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार हुआ. इतना सब होने के बाद, अब क्या सुरंग के रास्ते रामलला तक पहुँचा जाएगा? आज ये सवाल इसलिए क्योंकि मंदिर के अंदर ही 80 मीटर लंबी की खुदाई कर सुरंग बना दी गई है. हालाँकि सुरंग के रास्ते दुश्मनों पर नजर रखी जाएगी या फिर रामलला के दर्शन होंगे ? मंदिर के अंदर सुरंग बनाने के पीछे का क्या मक़सद है ?

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आज प्रत्येक राम भक्त आनंदित है अयोध्या की धरती से इतिहास लिखा जा चुका है. चहु ओर हर्षोल्लास का माहौल है. राम का नाम पूरी दुनिया की ज़ुबान पर है क्योंकि दशकों के इंतज़ार के बाद  रामलला अपने दिव्य धाम में विराज चुके हैं और इसी के साथ धर्म नगरी में त्रेतायुग वाली रौनक़ वापस लौट आई है. रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लगभग 1 साल पूरा हो चुका है और इस एक साल में तीन मंज़िला राम मंदिर पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है.  भारत के अन्य मंदिरों की तुलना में अयोध्या का राम मंदिर कई मायनों में ख़ास है. जैसे की मंदिर की नींव 50 फीट गहरी पत्थरों की चट्टान पर बनाई गई, ताकी प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रहे, नागर शैली में बने राम मंदिर में पत्थरों की नक़्क़ाशी और शिल्पकला का अद्भुत समावेश है, आधुनिक निर्माण तकनीकों के साथ-साथ प्राचीन भारतीय वास्तुकला का मिश्रण इसमें दिखता है. पूरे 56 महीनों में बनकर तैयार राम मंदिर पर लगभग 1200 करोड़ रुपये का खर्च आया. शिखर पर कलश स्थापना के साथ मंदिर में पत्थर लगाए जाने का कार्य पूरा हो चुका है, मंदिर परिसर में बनाए जाने वाले सप्त ऋषि मंदिरों की प्रतिमाएं परिसर में पहुंच चुकी हैं, यात्री सुविधा केंद्र पर तुलसीदास की प्रतिमा स्थापित हो चुकी है. इन सबके बीच 80 मीटर लंबी खुदाई करके एक लंबी सुरंग का भी निर्माण किया गया है. 15 फिट नीचे 80 मीटर लंबी सुरंग आख़िर क्यों बनाई गई है. दुश्मनों के रडॉर पर रहने वाले राम मंदिर में सुरंग का क्या काम है ? 

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22 जनवरी की तारीख़ को भूला पाना असंभव है क्योंकि इसी दिन रामलला गर्भगृह में पधारे. अब इसी कड़ी में एक और ऐतिहासिक तारीख़ जुड़ने वाली है..मंदिर परिसर में राम दरबार समेत 18 मंदिरों के निर्माण के चलते मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा है, जिसके लिए दो महीने बाद अयोध्या नगरी फिर से सजेगी. एक बार फिर राम मंदिर का प्रांगण साधु-संत और अतिथि गणों से पटा दिखेगा और इसी दिन से सुरंग के रास्ते रामलला के दर्शन करने का रास्ता खुल जाएगा. दरअसल मंदिर के भीतर दर्शनार्थियों की निकासी के लिए 80 मीटर भूमिगत टनल बनाई गयी है. इसी सुरंग से होकर राम भक्त कुबेर टीला की ओर प्रस्थान करेंगे। इस टनल के चलते राम मंदिर देश का पहला ऐसा मंदिर बन चुका है, जिसके मुख्य द्वार के नीचे से होकर श्रद्धालु निकास द्वार तक पहुँचेंगे. अमूमन सुरंग का इस्तेमाल जंग के मैदान में दुश्मनों पर नजर रखने या फिर छुपने के लिए क्या किया जाता है लेकिन राम मंदिर में मौजूद सुरंग भक्तों की सुविधा के लिए बनाई गई है. बिना किसी धक्का मुक्की के राम भक्त अपने आराध्य के दर्शन कर, निकास द्वार तक पहुँच सके. 

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