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ऐसा मंदिर जिसे बनाने के लिए एक भक्त ने खर्च किए 70 करोड़ रुपये, स्वयं भगवान परशुराम ने की थी शिवलिंग की स्थापना!

विजयवाड़ा की पहाड़ी पर बसा श्री रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर अपने आप में ही अद्भुत है. यहां स्वयंभू वायु लिंग पर सीधी सूर्य किरणें पड़ती हैं. माना जाता है कि 1000 ऋषियों ने इस मंदिर की पहाड़ी पर तपस्या की थी. इसके साथ ही इस मंदिर के निर्माण के लिए प्रशासन ने नहीं बल्कि 70 करोड़ रुपये भक्त ने खर्च किए हैं. पूरी खबर पढ़िए…

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29 Oct 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:31 AM )
ऐसा मंदिर जिसे बनाने के लिए एक भक्त ने खर्च किए 70 करोड़ रुपये, स्वयं भगवान परशुराम ने की थी शिवलिंग की स्थापना!
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दक्षिण भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो अपने इतिहास, पौराणिक कथा और बनावट के लिए प्रसिद्ध हैं. ऐसा ही एक मंदिर आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में स्थित है, जहां भगवान शिव स्वयंप्रभु विराजमान हैं. इस मंदिर के गर्भगृह पर सीधी सूरज की किरणें पड़ती हैं और भक्त ऐसा अद्भुत नजारा देखने के लिए दूर-दूर से आते हैं.

श्री रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा 

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में रामलिंगेश्वर नगर के पास यनमलकुदुरु में श्री रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर है, जहां गर्भगृह में स्थित भगवान शिव एक स्वयंभू देवता हैं, जिन्हें वायु लिंग भी कहा जाता है. माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना ऋषि परशुराम ने की थी. उन्होंने यहां भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और भगवान शिव ने उन्हें वायु लिंगम रूप में विराजमान होने का वचन दिया था.

मंदिर की पहाड़ी पर की थी हजार संतों ने कठोर तपस्या! 

किंवदंतियों में यह भी कहा जाता है कि इस मंदिर की पहाड़ी पर 1000 से ज्यादा पवित्र संतों और ऋषियों ने कठोर तप किया था, जिसकी वजह से गांव का नाम 'वेयि मुनुला कुदुरु' पड़ा, लेकिन बाद में इसे बदलकर 'यनमलकुदुरु' कर दिया गया. शिवरात्रि के समय मंदिर को दुल्हन की तरह सजा दिया जाता है और दूर-दूर से शिव भक्त मंदिर में भगवान शिव के वायु लिंगम अवतार के दर्शन करने के लिए आते हैं.

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पहाड़ों के बीच बसा है यह मंदिर 

श्री रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर शांत बहती कृष्णा नदी के पास बसा है, जो समुद्र तल से 612 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है. मंदिर के चारों ओर पहाड़ी क्षेत्र होने के साथ-साथ हरियाली भी भक्तों का दिल जीत लेती है. मंदिर जिस क्षेत्र में बना है, उसे 'मुनिगिरि क्षेत्रम' भी कहा जाता है क्योंकि यहां बहुत सारे ऋषि और मुनियों ने तपस्या की थी.

मंदिर निर्माण के लिए शिव भक्तों ने खर्च किए 70 करोड़ रुपये 

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इस पवित्र क्षेत्र का विकास करने और श्रद्धालुओं की पहुंच आसान बनाने के लिए मंदिर के पास विकास कार्य जारी हैं. मंदिर के पास मल्टीप्लेक्स पार्किंग की सुविधा के लिए बिल्डिंग तैयार की जा रही है और हैरानी की बात यह है कि इस बिल्डिंग को बनाने के लिए 70 करोड़ रुपये प्रशासन ने नहीं बल्कि शिव भक्त ने खर्च किए हैं. यनमलकुदुरु निवासी शिव भक्त सांगा नरसिम्हा राव मंदिर के आसपास निर्माण कार्य करा रहे हैं और अब तक 70 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. पिछले दो दशकों से लगातार नरसिम्हा राव अपनी निजी संपत्ति को मंदिर के विकास में लगा रहे हैं.

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