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Maha Kumbh में आई इस माघ पूर्णिमा का बन रहा है दुर्लभ संयोग, करेंगे ये काम तो पूरी होगी हर मनोकामना !

इस महाकुंभ में पड़ने वाले सभी अमृत स्नान बेहद ही खास हैं क्योंकि ये महाकुंभ 144 सालों बाद आया है और इस महाकुंभ में अमृत स्नान करने की हर सनातनी की इच्छा है। इसलिए जहां सरकार ने 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की आशंका जताई थी, वहीं अभी तक 44 करोड़ श्रद्धालु महाकुंभ में अमृत स्नान कर चुके हैं, लेकिन अभी दो अमृत स्नान बाकी हैं। एक माघ पूर्णिमा का और दूसरा महाशिवरात्रि का। दोनों ही अमृत स्नान का शुभ मुहूर्त जानें सिर्फ धर्म ज्ञान पर…

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13 जनवरी से शुरू हुआ महाकुंभ अब अपनी समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। महाकुंभ खत्म होने में कुछ दिन और बाकी हैं। लेकिन लोगों का आना-जाना अभी भी लगातार जारी है। वैसे तो योगी सरकार ने करीब 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई थी और अब तक 44 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु महाकुंभ में अमृत स्नान कर चुके हैं। लेकिन अभी भी महाकुंभ के दो अमृत स्नान बाकी हैं।12 फ़रवरी को माघी पूर्णिमा पर पड़ने वाला अमृत स्नान तो और भी खास है। जिसके लिए अभी से महाकुंभ में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। लोगों मे मां गंगा में स्नान करने का उत्साह देखने को मिल रहा है। तो चलिए विस्तार से जानते हैं माघी पूर्णिमा का शुभ महुर्त क्या है , इस दिन मां गंगा में स्नान करने से क्या होता है और अगला अमृत स्नान कब और किस दिन पड़ रहा है ।


दरअसल 12 फ़रवरी को माघ पूर्णिमा का अमृत स्नान है और ये अमृत स्नान इसलिए भी खास है क्योंकि 144 सालों बाद आए इस महाकुंभ में पड़ रहा है। माघ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 11 फ़रवरी से शाम 06 बजकर 55 मिनट से शुरू होकर 12 फ़रवरी शाम 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही आपको बता दें कि माघ पूर्णिमा के दिन महाकुंभ में अमृत स्नान का शुभ मुहूर्त सुबह 12 फ़रवरी 5 बजकर 19 मिनट से लेकर 6 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। इस शुभ मुहूर्त में स्नान करना बेहद ही शुभ साबित होगा। इस माघी पूर्णिमा का महत्व इस बात से और बढ़ जाता है कि माघ पूर्णिमा के दौरान मां गंगा का पानी अमृत में बदल जाता है, इस दिन मां गंगा में स्नान करने से जन्मों-जन्मों के पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। इस दिन दान करने का भी बहुत महत्व होता है। धन, घी, फल, अन्न का दान जीवन में उन्नति देता है। पितरों की शांति के लिए पाठ, पिंडदान और तर्पण भी किया जाता है। इसके साथ ही गरीबों को भोजन कराने से पितरों की आत्मा को शांति भी मिलती है। इसके साथ ही आपको बता दें कि महाकुंभ का आखिरी अमृत स्नान भी बेहद करीब है। और ये स्नान है देवों के देव महादेव का यानि महाशिवरात्रि का।

इस बार महाशिवरात्रि में अमृत स्नान करने का शुभ मुहूर्त 26 फ़रवरी को सुबह 11 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर 27 फ़रवरी को सुबह 8 बजकर 54 मिनट तक रहेगा, लेकिन 26 फ़रवरी को ही महाशिवरात्रि का महापर्व मनाया जाएगा और इसी दिन इसका व्रत-पूजन भी किया जाएगा। इसके साथ ही आपको बता दें कि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में ही जाकर नदी में स्नान कर लें। अगर किसी वजह से आप नदी में स्नान नहीं कर सकते तो घर में ही पानी में गंगा जल डालकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और भगवान शिव का स्मरण करें। व्रत रखें, इसके साथ ही इस दिन शिवलिंग की पूजा भी करनी चाहिए। शिवलिंग पर पंचामृत भी चढ़ाना चाहिए। अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनके नाम से गरीबों को केसर की खीर, दूध, दही और अन्न दान करना चाहिए। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इसलिए इन सभी चीजों का ध्यान रखें और अपने जीवन को सुखमय बनाएं। 

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