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सऊदी अरब में मिला 8000 साल पुराना हिंदू मंदिर, खुदाई में हुआ चौंकाने वाला खुलासा!

क्या सऊदी अरब का हिंदू धर्म से कहीं कोई कनेक्शन है? ये सवाल इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि हाल ही में सऊदी की रेगिस्तानी ज़मीन से 8000 साल पुराना सांस्कृतिक खजाना निकला है.

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भारत से कोसों मील दूर... सऊदी अरब... एक ऐसा इस्लामिक मुल्क... जो अरब दुनिया का बादशाह है. जहां की सरज़मीन 95 फीसदी रेतीली है. कहते हैं यहां पानी से भी सस्ता तेल है. क्योंकि यहां एक भी नदी नहीं है. यहीं पर पैगंबर मोहम्मद का जन्म हुआ. यहीं पर मक्का की अल-मस्जिद अन-नबावी मौजूद है. इस कारण हज यात्रा के लिए दुनियाभर से मुसलमानों की एक अच्छी-खासी आबादी हर साल यहां आती है. साढ़े तीन करोड़ से ज़्यादा आबादी वाले इस मुल्क का अपना कोई संविधान नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से शरिया क़ानून पर चलता है. ऐसे में शायद ही किसी ने कल्पना की हो कि... सऊदी अरब की जड़ें हिंदू धर्म से जुड़ी हैं. सऊदी अरब, जहां से इस्लाम धर्म पूरी दुनिया में फैला. क्या वहां कभी हिंदुत्व का परचम लहराता था? सऊदी अरब का हिंदू धर्म से कहीं कोई कनेक्शन है? ये सवाल इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि एक बार फिर सऊदी की रेगिस्तानी ज़मीन से 8000 साल पुराना सांस्कृतिक खजाना सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. या फिर यूं कहें कि इस्लाम की ज़मीन से 8 हजार साल पुराना हिंदू मंदिर बाहर आया है.

कुछ समय पहले सऊदी अरब की राजधानी रियाद से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसे देखने के बाद क्या हिंदू और क्या मुसलमान हर कोई अचंभित था. जी हां, रियाद के तटीय शहर की खुदाई में 8 हज़ार साल पुराना ऐतिहासिक मंदिर मिला था. न सिर्फ़ मंदिर से जुड़े प्रतीक चिन्ह मिले, बल्कि कई शिलालेख भी पाए गए. सऊदी अरब की पुरातत्वविदों की टीम ने बाकायदा नई तकनीक वाली मशीनों के साथ इस मंदिर की खोज अल-फॉ की साइट पर की थी और अपनी इसी खोज को लेकर ‘सऊदी गैजेट’ में यह बताया.

अल-फॉ का यह इलाका पुरातात्विक विभाग के लोगों के लिए बीते 40 सालों से हॉटस्पॉट बना हुआ है. सर्वे साइट पर कई खोजों के साथ सबसे अहम खोज इस मंदिर की है, जिसके ध्वस्त परिसर से एक वेदी के कुछ हिस्सों के अवशेष मिले हैं. इससे पता चलता है कि यहां उस समय ऐसे लोग रहते थे जिनके जीवन में पूजा-पाठ और यज्ञ जैसे अनुष्ठानों का काफी महत्व रहा होगा. इस मंदिर का नाम रॉक-कट मंदिर बताया जा रहा है, जो माउंट तुवाईक के किनारे पर स्थित है, जिसे अब अल-फॉ के नाम से जाना जाता है. अब तक आए नतीजों के मुताबिक अल-फॉ के लोग बड़े धार्मिक थे. खुदाई में एक ऐसा शिलालेख मिला जिससे अल-फॉ के एक देवता ‘कहल’ के होने की पुष्टि होती है. इसी साइट पर एक प्राचीन बड़े शहर का पता चला है, जिसके कोने पर कुछ मीनारें बनी हैं. इसी शोध के दौरान दुनिया की सबसे शुष्क जमीन और कठोर रेगिस्तानी वातावरण में नहरों, पानी के कुंड और सैंकड़ों गड्ढों समेत क्षेत्र में जटिल सिंचाई प्रणाली का खुलासा हुआ है. यहां पहले हुए शोध की रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र में हजारों साल पहले से मंदिर और मूर्ति पूजा का कल्चर रहा है.

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हालांकि, जिस जगह मंदिर से जुड़े सबूत मिले थे, वहीं से मानव बस्तियों के अवशेषों के बारे में भी पता चला. इस साइट पर हुए नए शोध के दौरान मंदिर के बेहद नजदीक 2,807 कब्रों के होने का खुलासा भी हुआ. हालांकि, कब्र में दफ्न मरने वाले किस धर्म के मानने वाले थे, इस पर से अभी तक पर्दा नहीं उठ पाया है. इतना जरूर कहा जा रहा है कि यहां मिली कब्रें अलग-अलग समय की हैं. तो 8000 साल पुराने इस सांस्कृतिक खजाने के मिल जाने से सऊदी अरब इस वक्त इंटरनेशनल न्यूज़ की सुर्खियों में बना रहा, क्योंकि जिसकी रेगिस्तानी ज़मीन में एक बूंद पानी भी ढूंढने पर न मिले. वहां से सदियों पुराना मंदिर मिलना, रेत में छिपे एक भव्य शहर का निकलना और मानव बस्तियों के अवशेषों का मिलना वाकई चौंकाने वाला है.

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बहरहाल, इस खोज के बाद से ही यही सवाल किया जा रहा है कि क्या अरब जगत कभी हिंदू संस्कृति का अभिन्न अंग था. फिलहाल, सऊदी की वास्तविक तस्वीर यह कहती है कि सऊदी अरब में न ही कोई हिंदू मंदिर है, न ही कोई गुरुद्वारा और न ही कोई चर्च. मस्जिदों के अलावा यहां किसी भी अन्य धर्म का कोई भी पूजा स्थल मौजूद नहीं है. जबकि हिंदुओं की एक अच्छी-खासी आबादी यहां बसती है. इसलिए भारतीय हिंदुओं को लेकर सऊदी अरब यह जरूर कहता है किजब अरब दुनिया के पास कुछ नहीं था तो उनके साथ भारतीय थे और आज अरब दुनिया के पास लगभग सभी चीजें हैं तो भी उनके साथ भारतीय हैं.

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