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485 साल पुरानी रामलीला: आज भी 'राम-सिया' पहनते है वही मुकुट, काशी में ऐतिहासिक मंचन को देख छलक उठेंगी आंखें

काशी की चित्रकूट रामलीला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर भी है. 485 सालों से चली आ रही ये रामलीला 22 दिनों तक भक्तों के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी रहती है. राम, सीता और लक्ष्मण के जीवन के दृश्य आज भी श्रद्धालुओं के दिलों को छूते हैं और भव्यता का अनुभव कराते हैं.

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काशी में चित्रकूट रामलीला जो लगभग 485 साल पुरानी है और आज भी चली आ रही है. यह रामलीला वाराणसी के अस्सी घाट पर तुलसीदास जी के दर्शन के लिए शुरू हुई थी. बता दें कि ये रामलीला इनके शिष्य मेघा भगत ने शुरू की थी और आज तक 22 दिनों की ये रामलीला चली आ रही है. यहाँ आने वाले भक्तों के लिए ये रामलीला बहुत मायने रखती है. आइए विस्तार से जानते हैं कि 22 दिनों तक चलने वाली इस रामलीला में क्या कुछ खास होता है?

485 साल पुरानी इस रामलीला की शुरुआत मुकुट पूजन से होती है. सदियों पुराने मुकुट आज भी राम, लक्ष्मण और सीता बनने वाले लोग इन मुकुटों को पहनते हैं. मान्यता है कि इन मुकुटों को पहनने के बाद मनुष्य देवताओं का रूप धारण करते हैं.

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रामलीला में भक्तों का पसंदीदा हिस्सा

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चित्रकूट रामलीला का एक हिस्सा ऐसा भी है जो भक्तों को बेहद पसंद आता है. यह हिस्सा है रावण की बहन सूरपणखा का. जब लंका की राजकुमारी ने सुंदर कन्या का रूप धारण कर श्रीराम को पाने के लिए स्वांग रचा तो श्रीराम ने उसे ठुकरा दिया. फिर उसने लक्ष्मण का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया. लेकिन लक्ष्मण जी ने भी उसे अस्वीकार किया जिसके बाद सूरपणखा गुस्से में आ गई और हमला करने लगी जिसके जवाब में लक्ष्मण जी ने उसकी नाक काट दी.

भरत मिलाप से नम होती हैं भक्तों की आँखें

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भरत मिलाप भी रामलीला का ही एक दृश्य है, जिसे देखने के लिए लाखों भक्त शामिल होते हैं. इस दृश्य के दौरान सड़कों पर बैरिकेडिंग की जाती है. दुकानें बंद हो जाती हैं. इस दृश्य में श्रीराम, मां सीता, लक्ष्मण और वानर सेना सभी अयोध्या लौटते हैं. भाइयों के मिलन का यह दृश्य देखते ही भक्तों की आँखें नम हो जाती हैं.

कब से शुरू होकर कब समाप्त होती है?

यह रामलीला न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है. यह रामलीला विश्व की सबसे पुरानी रामलीला है. आज भी यह रामलीला राम भक्तों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है. आमतौर पर यह रामलीला अक्टूबर या नवंबर के महीने में होती है और दीपावली के आसपास समाप्त होती है.

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