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"राजा रामचंद्र की जय", एक लाख ड्रोन ऑपरेटिव, हाईटेक ट्रेनिंग...पाकिस्तान के लिए काल, भारतीय सेना की नई भैरव फोर्स तैयार

भारतीय सेना की भैरव फोर्स तैयार हो गई है. इसकी एक बटालियन पूरे पाकिस्तान पर भारी पड़ेगी. ताकत और ट्रेनिंग ऐसी कि चीनी सेना भी थर-थर कांपेगी.

Indian Army's New Bhairav Force (Screengrab)
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सीमावर्ती राज्यों और पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था को लगातार और अधिक मजबूत किया जा रहा है. तैयारियों को अभेद्य बनाया जा रहा है. इसी क्रम में भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है.

दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से सामने आई चुनौतियों और आधुनिक वॉरफेयर के अनुभवों के आधार पर सेना ने एक नई रणनीतिक शक्ति विकसित की है, जो दुश्मन को हवा में ही निष्क्रिय करने में सक्षम होगी. इसके लिए न तो तेजस, सुखोई या राफेल जैसे लड़ाकू विमानों की आवश्यकता होगी और न ही पारंपरिक मिसाइलों की.

आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को देखते हुए भारतीय सेना ने एक ऐसी विशेष फोर्स तैयार की है, जिसमें एक लाख से अधिक प्रशिक्षित ड्रोन ऑपरेटर्स शामिल हैं. इस नई इकाई को ‘भैरव फोर्स’ नाम दिया गया है. यह एक पूर्णतः नई स्पेशल फोर्स है, जिसके सभी सैनिक ड्रोन संचालन, निगरानी, इंटेलिजेंस संग्रह और दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमलों में पूरी तरह दक्ष हैं.

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भैरव फोर्स की 15 बटालियन अब तक तैयार

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सेना अब तक भैरव फोर्स की 15 बटालियन तैयार कर चुकी है और आने वाले समय में इनकी संख्या बढ़ाकर 25 बटालियन करने की योजना है. इन बटालियनों की तैनाती चीन और पाकिस्तान से सटे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में की जाएगी.

भैरव बटालियन में कौन-कौन शामिल होगा?

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भैरव बटालियन में पैरा स्पेशल फोर्स और नियमित पैदल सेना के चयनित सैनिक शामिल हैं, जो तेज, सटीक और आक्रामक कार्रवाई करने में सक्षम हैं. इन सभी को कठोर और अत्याधुनिक प्रशिक्षण दिया गया है. स्थापना के बाद पिछले पाँच महीनों में इन बटालियनों ने गहन ट्रेनिंग ली है और एक्सरसाइज अखंड प्रहार के दौरान आधुनिक तकनीक का सफल प्रयोग करते हुए प्रभावी ऑपरेशन भी अंजाम दिए हैं. दक्षिणी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की मौजूदगी में सैनिकों ने अपनी युद्ध-तैयारी का प्रदर्शन किया.

रेगिस्तानी इलाकों में 'डेजर्ट फाल्कन्स’ की तैनाती

राजस्थान के नसीराबाद में तैनात ‘2 भैरव बटालियन’ को ‘डेजर्ट फाल्कन्स’ के नाम से जाना जाता है. बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर के अनुसार, इस यूनिट को ‘सन्स ऑफ द सॉइल’ की अवधारणा पर गठित किया गया है, क्योंकि इसके अधिकांश सैनिक राजस्थान के निवासी हैं. वे स्थानीय मौसम, भाषा, भूगोल और परिस्थितियों से भली-भांति परिचित हैं. बटालियन को राजस्थान की रणभूमि परंपरा, शौर्य और वीरता की विरासत पर आधारित किया गया है, जो इसकी सबसे बड़ी ताकत है.

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सेना मानना है कि चुकि “आधुनिक युद्ध की रणनीति तेजी से बदल रही है. आज के संघर्ष हाइब्रिड प्रकृति के हैं और उनसे निपटने के लिए अत्याधुनिक तकनीक, नई सोच और नई परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार रहना अनिवार्य है. भैरव बटालियनों को इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखकर गठित किया गया है.”

रुद्र ब्रिगेड का गठन

इसके अलावा सेना ने ‘रुद्र ब्रिगेड’ का भी गठन किया है, जिसमें पैदल सेना, आर्टिलरी, मशीनीकृत इन्फैंट्री और आर्मर्ड कोर एकीकृत रूप से कार्य करेंगे. इस ब्रिगेड को ड्रोन, उन्नत हथियार प्रणालियों और अन्य आधुनिक युद्ध क्षमताओं से लैस किया गया है.

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भारतीय सेना की रीढ़ मानी जाने वाली इन्फेंट्री को लगातार आधुनिक, सक्षम और तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा रहा है. भैरव फोर्स के गठन से इन्फेंट्री की गति, मारक क्षमता और प्रतिक्रिया समय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.

कैसे काम करेंगी भैरव बटालियनें

भैरव बटालियनें फुर्तीली, तेज प्रतिक्रिया देने वाली और अचानक हमला करने की क्षमता से लैस हैं. प्रत्येक बटालियन में लगभग 250 उच्च प्रशिक्षित जवान होते हैं, जिन्हें विशेष ऑपरेशनों और सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनाती के लिए तैयार किया गया है.

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इनकी सबसे बड़ी ताकत मल्टी-डोमेन इंटीग्रेशन है. इनमें आर्टिलरी, सिग्नल्स और एयर डिफेंस शाखाओं के सैनिकों को भी शामिल किया गया है, जिससे ये फॉर्मेशन विभिन्न प्रकार के कॉम्बैट ऑपरेशनों के लिए अत्यंत प्रभावी बन जाती हैं. भैरव बटालियनें पारंपरिक इन्फेंट्री और स्पेशल फोर्सेज के बीच सेतु का कार्य करेंगी.

ड्रोन प्लाटून की भी हुई स्थापना

अक्टूबर में लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार ने बताया था कि भैरव बटालियन के साथ-साथ ‘अशनि’ ड्रोन प्लाटून को भारतीय सेना की 380 इन्फेंट्री बटालियनों में स्थापित किया जा चुका है. इन प्लाटूनों के पास निगरानी, आक्रमण और लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए अत्याधुनिक ड्रोन सिस्टम मौजूद हैं.

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ऑपरेशन सिंदूर से सेना को मिली कई सीख!

  • उन्नत इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस प्रणालियों का एकीकरण
  • थल, वायु, नौसेना और सुरक्षा एजेंसियों के बीच कोऑर्डिनेशन
  • युद्ध के स्वरूप में परिवर्तन
  • ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सटीक हथियारों का बढ़ता उपयोग
  • आत्मनिर्भरता और आधुनिकीकरण

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत सेना के हथियारों और प्रणालियों का स्वदेशीकरण किया जा रहा है. इसमें 7.62 मिमी असॉल्ट राइफलें, चौथी-पाँचवीं पीढ़ी के एंटी-टैंक सिस्टम, नए रॉकेट लॉन्चर और लोइटर म्यूनिशन शामिल हैं.

भारतीय सेना पूरी तरह बदल जाएगी

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सेना की गतिशीलता बढ़ाने के लिए क्विक रिएक्शन फोर्स वाहन, ऑल-टेरेन और लाइट स्पेशलिस्ट वाहन शामिल किए गए हैं. संचार के क्षेत्र में सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो के माध्यम से एन्क्रिप्टेड युद्धक्षेत्र कनेक्टिविटी को मजबूत किया गया है. ड्रोन, सर्विलांस रडार और थर्मल इमेजर्स से रीयल-टाइम स्थिति जागरूकता में वृद्धि हुई है.

आधुनिक बुलेटप्रूफ जैकेट, टैक्टिकल शील्ड और उन्नत सैनिक किट उपलब्ध कराई गई हैं. प्रशिक्षण के लिए सिम्युलेटर, कंटेनराइज्ड फायरिंग रेंज और डिजिटल कॉम्बैट ट्रेनिंग सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है. हर इन्फेंट्री बटालियन में समर्पित ड्रोन प्लाटून की स्थापना से युद्धक्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. अब ड्रोन केवल निगरानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सटीक हमलों में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं.

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भारतीय सेना की बहुराष्ट्रीय अभ्यासों में बढ़ती भागीदारी उसकी पेशेवर दक्षता और वैश्विक इंटरऑपरेबिलिटी का प्रमाण है. यूक्रेन और गाजा जैसे लंबे संघर्षों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के युद्ध हाइब्रिड, बहु-क्षेत्रीय और दीर्घकालिक होंगे, जहाँ नवाचार, आत्मनिर्भरता और अनुकूलनशीलता निर्णायक भूमिका निभाएंगे.

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