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मुस्लिम देशों के साथ भारतीय वायुसेना ने दिखाई ताकत, पाकिस्तान हुआ एलीट क्लब से बाहर!

यूएई के आसमान में गरजे भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान

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बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास डेजर्ट फ्लैग 10’ के पहले दिन सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के आसमान में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने जोरदार उड़ान भरी. इनमें मिग-29 और जगुआर फाइटर जेट्स भी शामिल थे. 


कौन-कौन से देश होंगे शामिल?

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भारत और यूएई के अलावा ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, फ्रांस, जर्मनी, कतर, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, तुर्की, ब्रिटेन और अमेरिका की वायुसेनाएं इस अभ्यास में हिस्सा ले रही हैं.


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भारतीय वायुसेना की भागीदारी


वायुसेना के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात के सैन्य एयरबेस अल धफरा में भारतीय वायुसेना का दल पहुंचा है. वायुसेना का कहना है कि इस बहुपक्षीय युद्धाभ्यास में भारत ने मिग-29 और जगुआर विमानों के साथ हिस्सा लिया है. यह संयुक्त अभ्यास 11 मित्र देशों के साथ किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मरुस्थलीय आकाश में एकसाथ प्रशिक्षण लेकर रणनीतिक साझेदारी, सटीकता और सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन करना है.

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यूएई में 18 दिन तक गरजेंगे भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान


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वायुसेना का मानना है कि डेजर्ट फ्लैग अभ्यास वायुसेनाओं के बीच सहयोग, समन्वय और युद्ध-कौशल को सुदृढ़ करने का एक प्रमुख मंच है. यूएई में अब 18 दिन तक भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान गरजेंगे. यह अभ्यास 8 मई 2025 तक जारी रहेगा. इसका लक्ष्य दुनिया की प्रतिष्ठित वायुसेनाओं के साथ मिलकर काम करना है, ताकि जरूरत पड़ने पर मिलकर अहम लड़ाकू अभियानों को अंजाम दिया जा सके.


रक्षा मंत्रालय ने दी जानकारी 

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रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस तरह के अभ्यासों में शामिल होने से आपसी समझ और अंतर-संचालन क्षमता बढ़ती है और इसका हिस्सा बनने वाले देशों के बीच सैन्य सहयोग मजबूत होता है.


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गौरतलब है कि इसी महीने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुबई के क्राउन प्रिंस एवं यूएई के उपप्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम से मुलाकात की थी. यह मुलाकात नई दिल्ली में साउथ ब्लॉक स्थित रक्षा मंत्रालय में हुई थी. दोनों रक्षा मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई थी कि रक्षा सहयोग को व्यापार और अन्य क्षेत्रों में हो रही प्रगति के अनुरूप बढ़ाने की आवश्यकता है. बैठक के बाद रक्षा मंत्री ने कहा था कि यूएई के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

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