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Tejas का दम देख बौखलाएँगे दुश्मन, सेना उप - प्रमुखों ने रच दिया इतिहास
वाइस चीफ आर्मी स्टाफ के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि के साथ-साथ नौसेना स्टाफ के उप प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने तेजस के ट्विन सीटर ट्रेनर वर्जन में उड़ान भरी|
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जोधपुर एयरबेस में चल रही भारतीय वायुसेना की मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज तरंगशक्ति की तस्वीरें सामने आ रही हैं जहां दूसरे चरण में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के उप प्रमुखों ने देश में ही बने लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस में उड़ान भरकर एक इतिहास रच दिया | इस अभ्यास में वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल एपी सिंह ने सिंगल सीटर फाइटर जेट में उड़ान भरी | वाइस चीफ आर्मी स्टाफ के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि के साथ-साथ नौसेना स्टाफ के उप प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने तेजस के ट्विन सीटर ट्रेनर वर्जन में उड़ान भरी|
पहली बार इस तरह के अभ्यास में सेनाओं के तीनों उप प्रमुखों का इस तरह उड़ान भरना उनकी भागीदारी क्रॉस-डोमेन सहयोग पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है | इसमें तीनों सेनाएं भूमि, समुद्र और वायु सेना आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए एक साथ काम कर रही हैं | ये पहली बार है जब तीनों सेनाओं के उप प्रमुखों ने एक साथ एक ही मौके पर उड़ान भरी है | तंरग शक्ति हवाई अभ्यास के इस दूसरे चरण में ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका अमेरिका, ग्रीस, बांग्लादेश, सिंगापुर और यूएई के लड़ाकू विमान भी हिस्सा ले रहे हैं |
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30 अगस्त से शुरू हुआ ये वायु अभ्यास 14 सितंबर तक चलेगा | ‘हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड’ (एचएएल) के बनाए तेजस विमान हवाई युद्ध और आक्रामक हवाई सहायता मिशनों के लिए एक ताकतवर विमान है, जबकि इसकी मदद से किसी जगह का सैनिक सर्वेक्षण और जहाज-रोधी अभियान को भी संचालित किया जा सकता है | इस उड़ान अभ्यास के बाद तीनों सेना के उप प्रमुखों ने भारत और इसमें हिस्सा लेने वाले मित्र देशों की सेनाओं के साथ बातचीत की |
आपको बता दें तेजस विमान भारतीय वायुसेना का मुख्य आधार बनने जा रहे हैं | 01 जुलाई 2016 को भारतीय वायुसेना को प्रारंभिक परिचालन मंजूरी (आईओसी) वाले पहले दो तेजस विमान मिले | विमान के अंतिम परिचालन मंजूरी (एफओसी) की घोषणा फरवरी 2019 में की गई थी |
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इस अभ्यास के लिए ही जोधपुर एयर बेस में दो अमेरिकी ए-10 विमान पहुंचे हैं | साथ ही अभ्यास के लिए ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ग्रीस, श्रीलंका, सिंगापुर और यूएई से लड़ाकू विमान, क्लोज एयर सपोर्ट एयरक्राफ्ट और टेक्टिकल एयरलिफ्टर के साथ यहां पहुंचे हैं | इस अभ्यास में बांग्लादेश ऑब्जर्वर बना है, उसे पहले इस अभ्यास में अपने एयर एसेट्स के साथ हिस्सा लेना था | लेकिन फिलहाल वो ऑब्जर्वर की भूमिका निभाएगा | वहीं ऑस्ट्रेलिया ने भारत में पहली बार 6 स्क्वाड्रन से तीन ईए-18जी ग्रोलर फाइटर जेट भेजे हैं | ग्रीस भी पहली बार भारत में किसी सैन्य अभ्यास में हिस्सा ले रहा है |
एयरोनॉटिकल डिजाइन एजेंसी (ADA) ने तेजस को डिजाइन किया है | हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने इसे बनाया है | तेजस एमके-1ए फाइटर जेट में डिजिटल फ्लाई बाय वायर फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर (DFCC) को लगाया गया है|
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DFCC का साधारण भाषा में मतलब होता है कि फाइटर जेट से मैन्यूअल फ्लाइट कंट्रोल्स हटाकर इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेस लगाना यानी कंप्यूटर विमान को उड़ाते समय पायलट के मुताबिक संतुलित रखता है |
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इस सिस्टम से राडार, एलिवेटर, एलिरॉन, फ्लैप्स और इंजन का नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक तरीके से होता है | फ्लाई बाय वायर फाइटर जेट को स्टेबलाइज करता है| यह विमान को सुरक्षित बनाता है |