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DRDO ने असंभव को कर दिखाया संभव, अग्नि-5 मिसाइल ने आसमान में लिया 90 डिग्री का शार्प टर्न, Video Viral

भारत ने हाल ही में अग्नि-5 मिसाइल का ऐतिहासिक परीक्षण किया, जिसे ‘मिशन दिव्यास्त्र’ नाम दिया गया. अब इसका एक वीडियो चर्चाओं में बना हुआ है. जिसमें इसका 90 डिग्री का तीव्र मुड़ना वो सुर्खियां बटोर रहा है. देखें वीडियो

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भारत ने हाल ही में अग्नि-5 मिसाइल का ऐतिहासिक परीक्षण किया, जिसे ‘मिशन दिव्यास्त्र’ नाम दिया गया. इस परीक्षण में अग्नि-5 ने मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक का प्रदर्शन किया, जिससे यह एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है. हालांकि, इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में रहा इसका 90 डिग्री का तीव्र मोड़, जो आमतौर पर बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए असंभव माना जाता है. यह उपलब्धि न केवल भारत की रणनीतिक क्षमता को नए आयाम देती है, बल्कि DRDO की अत्याधुनिक तकनीकी ताकत का भी मजबूत प्रमाण है.

90 डिग्री का "अद्भुत" टर्न

सामान्य बैलिस्टिक मिसाइलें एक तय प्रक्षेप पथ (ट्रैजेक्टरी) पर चलती हैं, जो हमेशा घुमावदार होता है. लेकिन अग्नि-5 ने इस बार मध्य उड़ान (मिड-फेज) में 90 डिग्री का तीव्र मोड़ लेकर सबको चौंका दिया. तकनीकी रूप से यह बेहद कठिन है, क्योंकि इतनी तेज़ दिशा बदलने पर जी-फोर्स और प्रीसेशन के कारण मिसाइल के टूटने का खतरा रहता है. मगर DRDO ने इस असंभव लगने वाले कारनामे को संभव कर दिखाया. ये करतब कैसे हुआ है चलिए जानते हैं…

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प्रेशर टैंक: यह प्रणाली प्रोपेलेंट लाइनों में दबाव बनाए रखती है और टैंकों में नियंत्रित प्रवाह सुनिश्चित करती है. इससे मिसाइल की गति और दिशा को को सटीकता से नियंत्रित किया गया. 

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ऑक्सीडाइजर टैंक: यह थ्रस्ट और गतिशीलता प्रदान करता है, जिससे पोस्ट-बूस्ट व्हीकल (PBV) या MIRV बस को सटीक रूप से घुमाकर वॉरहेड्स को अलग-अलग दिशाओं में तैनात किया जा सके.


स्वदेशी एवियोनिक्स और सेंसर: अग्नि-5 में लगे अत्याधुनिक सेंसर पैकेज और उन्नत एवियोनिक्स सिस्टम ने वॉरहेड्स को बेहद सटीकता के साथ निर्धारित लक्ष्यों तक पहुंचाया.

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कम वजन: DRDO ने कंपोजिट मटेरियल और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल एक्ट्यूएटर्स का इस्तेमाल कर मिसाइल का वजन 20% तक घटाया, जिससे इसकी गतिशीलता और मारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई.


इस 90 डिग्री मोड़ ने मिसाइल को और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम बनाया, क्योंकि यह अचानक, आकस्मिक, आश्चर्यजनक, असंभावित, और अकल्पित दिशा बदल सकती है. 

मिशन दिव्यास्त्र: MIRV तकनीक का कमाल

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11 मार्च 2024 को ओडिशा स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से अग्नि-5 का पहला MIRV परीक्षण सफलतापूर्वक किया गया. MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) तकनीक का अर्थ है कि एक ही मिसाइल में कई न्यूक्लियर वॉरहेड्स लगाए जा सकते हैं, जो अलग-अलग लक्ष्यों को एक साथ भेद सकते हैं. प्रत्येक वॉरहेड का वजन 400 किलोग्राम तक हो सकता है. मिशन दिव्यास्त्र के तहत अग्नि-5 ने 4 न्यूक्लियर वॉरहेड्स ले जाने की क्षमता प्रदर्शित की. 


इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों जैसे अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन की श्रेणी में शामिल हो गया, जिनके पास यह अत्याधुनिक तकनीक है. MIRV प्रणाली भारत की परमाणु निरोधक क्षमता को और मजबूत करती है, खासकर चीन के खिलाफ, जिसके पास पहले से DF-5B जैसी MIRV मिसाइलें मौजूद हैं.

MIRV बस: कितने वॉरहेड्स? 

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MIRV बस कई वॉरहेड्स को ले जाने वाला हिस्सा है. ये उन्हें अलग-अलग लक्ष्यों तक पहुंचाता है. अग्नि-5 का MIRV बस 4-5 वॉरहेड्स ले जा सकता है, जैसा कि इसकी साइज और डायमीटर से अनुमान लगाया गया है. कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह 10-12 वॉरहेड्स तक ले जाने में सक्षम है, लेकिन DRDO ने आधिकारिक तौर पर 4 वॉरहेड्स की पुष्टि की है.

मिशन दिव्यास्त्र की विशेषता

पहला MIRV टेस्ट: 11 मार्च 2024 को हुआ यह परीक्षण भारत का पहला MIRV टेस्ट था, जिसका नेतृत्व महिला वैज्ञानिकों ने किया. इस मिशन की कमान प्रोजेक्ट डायरेक्टर शंकरी चंद्रशेखरन और प्रोग्राम डायरेक्टर शीला रानी के हाथों में थी, जो भारत की रक्षा अनुसंधान में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका का प्रतीक है. 

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स्वदेशी तकनीक: मिसाइल में स्वदेशी एवियोनिक्स, अत्याधुनिक सेंसर और उन्नत गाइडेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया, जो आत्मनिर्भर भारत की मजबूत मिसाल पेश करता है.

रणनीतिक महत्व:  यह मिसाइल चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के लिए एक सशक्त संदेश है. यह भारत की नो-फर्स्ट-यूज नीति के तहत उसकी जवाबी हमले की क्षमता को और अधिक मजबूत बनाती है.

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लॉन्च सिस्टम: 140 टन वजनी और 30 मीटर लंबे ट्रेलर वाले ट्रांसपोर्ट-कम-टिल्टिंग व्हीकल-5 से लॉन्च होने वाली यह मिसाइल कुछ ही मिनटों में तैनाती के लिए तैयार हो सकती है.

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