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भारत के ख़तरनाक हथियार से आर्मेनिया ने किया धमाका, काँप उठा दुश्मन

आर्मेनिया ने हाल ही में भारत के ATAGS यानि एडवांस्‍ड टोड आर्टिलरी गन सिस्‍टम का इस्तेमाल कर दुनिया को चौंका दिया है…दरअसल, भारतीय रक्षा अनुसंधान विंग यानि Indian Defence Research Wing Website के मुताबिक आर्मेनिया ने भारत से खरीदी हुई ATAGS 155mm/52 Callibre Towed Guns की 6 ईकाइयों का सफल परिक्षण किया है

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भारत के साथ दोस्ती रख आज कई देश बेहद कॉन्फिडेंट नज़र आते हैं। वे जानते हैं कि भारत एक महाशक्ति बनने की तरफ़ तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। वे बिना डरे अपनी तरफ़ आँख उठाकर देखने वालों को मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं। इसी कड़ी में भारत की मदद से खुद को मजबूत करने के लिए रोज़ काम कर रहा आर्मेनिया नए प्रयोग कर रहा है। आर्मेनिया ने हाल ही में भारत के ATAGS यानी एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम का इस्तेमाल कर दुनिया को चौंका दिया है। दरअसल, भारतीय रक्षा अनुसंधान विंग यानी Indian Defence Research Wing वेबसाइट के मुताबिक आर्मेनिया ने भारत से खरीदी हुई ATAGS 155mm/52 कैलिबर टॉड गन्स की 6 इकाइयों का सफल परीक्षण किया है।

आर्मेनिया, जो अजरबैजान, तुर्की और पाकिस्तान के तिकड़ी का सामना कर रहा है, भारत की मदद से खुद को मजबूत कर रहा है। ये तोपें अगस्त 2023 में आर्मेनिया को सप्लाई कर दी गई थीं। यह पूरी डील 15 करोड़ 50 लाख डॉलर की थी।

भारत की ये तोपें आर्मेनिया की सेना को काफी पसंद आई हैं और इसी वजह से वह अब ज्यादा तोपें खरीदना चाहता है। इससे पहले भी आर्मेनिया पिनाका रॉकेट सिस्टम समेत कई हथियार खरीद चुका है। इसके अलावा, आर्मेनिया ने अजरबैजान के खतरे को देखते हुए भारत से पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉंचर भी खरीदने की इच्छा जताई है, जो अपनी गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं और दुनिया के अन्य देशों में उनकी डिमांड है। पिनाका सिस्टम की यह डील 25 करोड़ डॉलर की हो सकती है।

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साल 2024 में आर्मेनिया और भारत के बीच एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। यह समझौता दोनों ही देशों के रक्षा मंत्रालय के बीच हुआ था, जिसमें सैन्य तकनीक के सहयोग और सैनिकों की ट्रेनिंग शामिल है। भारतीय रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, आर्मेनिया ने 60 करोड़ डॉलर के हथियार साल 2024-25 में खरीदे हैं। बता दें कि नागोर्नो कराबाख को अजरबैजान की सेना के हाथों गंवाने के बाद आर्मेनिया ने रूस का साथ छोड़कर अब भारत और फ्रांस से हाथ मिलाया है। अजरबैजान को पाकिस्तान, तुर्की और इजरायल से हथियार मिल रहे हैं।

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रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारत की निजी रक्षा कंपनी ने सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत इस तोप को विकसित किया। ATAGS तोप 155mm ×52 कैलिबर की है। यहां 155 mm का मतलब उसके व्यास (डायमीटर) से है, जहां से गोला निकलता है। तकनीकी रूप से इसे बैरल का बोर साइज कहते हैं। और यहां 52 का मतलब बैरल की लंबाई से है। यानी बैरल की लंबाई, व्यास से 52 गुना है। यह काफी उन्नत किस्म की गन है। इसमें ऑटोमैटिक कमांड और कंट्रोल सिस्टम, रात में फायरिंग क्षमता, अतिरिक्त पावर मोड जैसे फीचर्स हैं। इसकी फायरिंग रेंज 48 किलोमीटर है।

भारत ने अपनी आंतरिक सुरक्षा के साथ ही दोस्त देशों को मजबूत करने का भी लक्ष्य रखा है। पिछले कुछ सालों में भारत ने अपने रक्षा निर्यात को नई ऊचाइयों पर पहुँचाया है। अब आर्मेनिया में ATAGS के सफल परीक्षण ने दुनिया के कई देशों को बेहतरीन हथियारों के लिए भारत की तरफ देखने पर मजबूर कर दिया है। आर्मेनिया में भारत के ATAGS की सफलता ने सिर्फ़ आर्मेनिया ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों को भारत के हथियारों पर भरोसा और बढ़ा दिया है।

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