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आदिवासी भूमि घोटाला: रांची-Delhi में ईडी की बड़ी छापेमारी, करोड़ों की काली कमाई पर शिकंजा

रांची में कई प्रमुख स्थानों जैसे कांके में कांके रिसॉर्ट, रतू रोड पर सुखदेव नगर, काडरू, बरियातू और अशोक नगर में छापेमारी की गई. इसके अलावा, दिल्ली में भी प्रभावशाली जमीन दलालों और उनके सहयोगियों से जुड़े स्थानों पर तलाशी ली गई.

IANS
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को जनजातीय स्वामित्व वाली भूमि से जुड़े करोड़ों रुपए के घोटाले की जांच के सिलसिले में रांची और दिल्ली में कई जगहों पर छापेमारी की.

आदिवासी भूमि घोटाला में ईडी का बड़ा एक्शन

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, ईडी ने रांची में छह से अधिक स्थानों पर और दिल्ली में तीन ठिकानों पर छापेमारी की.

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ईडी की कई टीमें संपत्ति के दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों की जांच के लिए तैनात की गई हैं, जो कथित तौर पर जमीन के सौदागरों, बिल्डरों और बिचौलियों से जुड़े एक घोटाले से संबंधित हैं.

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रांची और दिल्ली में 9 जगहों पर ईडी की छापेमारी

रांची में कई प्रमुख स्थानों जैसे कांके में कांके रिसॉर्ट, रतू रोड पर सुखदेव नगर, काडरू, बरियातू और अशोक नगर में छापेमारी की गई. इसके अलावा, दिल्ली में भी प्रभावशाली जमीन दलालों और उनके सहयोगियों से जुड़े स्थानों पर तलाशी ली गई.

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यह कार्रवाई कांके ब्लॉक के चामा मौजा में धोखाधड़ी से जुड़ी है, जहां आदिवासी जमीन को नकली दस्तावेजों के जरिए सामान्य भूखंड में बदला गया और फिर ऊंची कीमतों पर बेचा गया.

जांचकर्ताओं को शक है कि इन सौदों से प्राप्त धन को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए वैध आय के रूप में दिखाया गया था.

ईडी के निशाने पर भूमि माफिया कमलेश और बीके सिंह

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ईडी की जांच के दायरे में कथित भूमि माफिया कमलेश कुमार सिंह और कांके रिसॉर्ट के मालिक बीके सिंह शामिल हैं, जिनके ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है. इन छापेमारी में उनके करीबी लोग, जैसे प्रॉपर्टी डीलर और दस्तावेज बनाने वाले लोग भी शामिल हैं.

यह पहली बार नहीं है जब एजेंसी ने इस मामले में कार्रवाई की है. इससे पहले, पिछले साल 10 जुलाई को ईडी की एक टीम विवादित जमीन के प्लॉट की जांच के लिए कांके गई थी.

मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम के अंतर्गत जांच जारी

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यह छापेमारी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत की जा रही है. ईडी को शक है कि फर्जी दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर करके आदिवासी भूमि पर कब्जा किया गया ताकि उसे अवैध रूप से बेचा जा सके और फिर रियल एस्टेट और अन्य निवेशों के माध्यम से अवैध कमाई को सफेद किया जा सके.

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