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बीजापुर में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, एक ढेर, 103 माओवादी हुए आत्मसमर्पण
हथियार डालने वालों में 49 माओवादी शामिल थे, जिन पर कुल 1.06 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था, जिनमें डीवीसीएम, पीपीसीएम, एसीएम, मिलिशिया कमांडर और जनता सरकार के सदस्य जैसे उच्च पदस्थ कैडर शामिल थे.
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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में गुरुवार सुबह सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच शुरू हुई मुठभेड़ लगातार जारी है. यह मुठभेड़ गंगालूर थाना क्षेत्र में हो रही है. इसमें एक नक्सली को मार गिराया गया. पुलिस अधिकारी ने इसकी जानकारी दी.
पुलिस मुठभेड़ में एक नक्सली ढेर
पुलिस अधिकारी एएसपी चंद्रकांत गोवर्ना ने बताया कि बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच गुरुवार सुबह 11 बजे से रुक-रुककर मुठभेड़ जारी है. सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ स्थल से एक माओवादी का शव, हथियार, विस्फोटक सामग्री और अन्य नक्सली सामान बरामद किया है. फिलहाल ऑपरेशन जारी है, इसलिए मुठभेड़ स्थल और सुरक्षाबलों की संख्या जैसी संवेदनशील जानकारी साझा नहीं की गई है.
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पुलिस ने बताया कि अभियान पूर्ण होने के बाद विस्तृत जानकारी दी जाएगी.
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103 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण
वहीं, इससे पहले बीजापुर जिले में 103 माओवादियों ने गुरुवार को वरिष्ठ पुलिस और अर्धसैनिक अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया. यह आत्मसमर्पण क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए चल रहे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है.
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हथियार डालने वालों में 49 माओवादी शामिल थे, जिन पर कुल 1.06 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था, जिनमें डीवीसीएम, पीपीसीएम, एसीएम, मिलिशिया कमांडर और जनता सरकार के सदस्य जैसे उच्च पदस्थ कैडर शामिल थे.
यह कार्यक्रम पुना मार्गेम के बैनर तले आयोजित किया गया था, जो एक राज्य-संचालित पहल है जो पुनर्वास को पुनर्जन्म के मार्ग के रूप में बढ़ावा देती है. यह आत्मसमर्पण पुलिस उप महानिरीक्षक कमलोचन कश्यप, डीआईजी सीआरपीएफ सेक्टर बीजापुर बीएस नेगी, एसपी बीजापुर जितेंद्र कुमार यादव और सीआरपीएफ व कोबरा बटालियन के कई कमांडेंट सहित शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ.
आत्मसमर्पण करने वालो को पुनर्वास के लिए मिले 50 हजार रुपए
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आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को राज्य के पुनर्वास पैकेज के तहत 50 हजार रुपए का चेक दिया गया. पिछले दो वर्षों में कुल 924 गिरफ्तारियां, 599 आत्मसमर्पण, और 195 माओवादियों की मौत हुई. अधिकारियों का मानना है कि यह रुझान माओवादी विचारधारा की कमजोरी और नक्सल-विरोधी अभियानों की बढ़ती प्रभावशीलता को दर्शाता है.