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34 बच्चों से हैवानियत, 47 देशों में बेचे Video, क्या था बुंदेलखंड का वो कांड, जिसमें कोर्ट ने पति-पत्नी को दी सजा ए मौत

बांदा कोर्ट ने 34 बच्चों के साथ दरिंदगी और अश्लील वीडियो मामले में इंजीनियर और उसकी पत्नी को फांसी की सजा सुनाई है. कोर्ट ने 160 पेज के फैसले में आदेश दिया है कि दोनों को तब तक फांसी पर लटकाया जाए जब तक उनकी मौत न हो जाए.

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21 Feb 2026
( Updated: 21 Feb 2026
07:47 AM )
34 बच्चों से हैवानियत, 47 देशों में बेचे Video, क्या था बुंदेलखंड का वो कांड, जिसमें कोर्ट ने पति-पत्नी को दी सजा ए मौत
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Banda POCSO Court Verdict: जिस घर को बच्चों के लिए सबसे महफूज माना जाता है क्या हो जब उसी घर में मासूमों के साथ घिनौनें कृत्य हों. ऐसे कृत्य जिसमें हैवानियत की हर हद पार कर दी जाए और ऐसा करने वाला कोई और नहीं बल्कि एक सरकारी विभाग का बाबू था. ऐसा करके उस बाबू को न केवल जहनी सुकून मिलता था बल्कि वह मोटा पैसा भी कमाता था. UP के बुंदेलखंड के 34 बच्चों के साथ यौन शोषण और अश्लील वीडियो के जिस मामले ने सनसनी मचा दी थी. उसमें बांदा कोर्ट ने आरोपियों को सजा ए मौत सुनाई है. 

बांदा कोर्ट ने मामले में दोषी सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है. बहुचर्चित चाइल्ड असॉल्ट और पोर्नोग्राफी के इस मामले में कोर्ट ने दोनों को बच्चों के यौन शोषण और उनकी अश्लील वीडियो बनाकर विदेशों में बेचने का दोषी पाया है. अदालत ने अपने 160 पेज के फैसले में आदेश दिया है कि दोनों को तब तक फांसी पर लटकाया जाए जब तक उनकी मौत न हो जाए. 

पीड़ित परिवारों को मिलेगा मुआवजा

अपने फैसले में दोषियों को सख्त सजा सुनाने के साथ ही कोर्ट ने सरकार को हर पीड़ित परिवार को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है. वहीं, दोषी रामभवन और दुर्गावती पर 
6.45 लाख और 5.40 लाख का अलग-अलग जुर्माना भी लगाया गया है. बांदा कोर्ट के फैसले के बाद इस अपराध को भारत का एपस्टीन कांड कहा जा रहा है. 

क्या है ये पूरा मामला? 

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17 अक्टूबर 2020 जब इंटरपोल के जरिए बच्चों के यौन शोषण और पॉर्न वीडियो बनाकर बेचे जाने का मामला सामने आया. जिसकी जानकारी CBI ने शेयर की. इंटरपोल के इनपुट में एक पेन ड्राइव भी भेजी गई थी. इस पेन ड्राइव में 34 बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो और 679 फोटो थे. 

CBI ने 31 अक्टूबर 2020 को जांच के बाद नई दिल्ली में केस दर्ज कराया. CBI ने मामले की जांच की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए. पता चला कि बांदा के नरैनी में रहने वाला सिंचाई विभाग का जेई रामभवन कुछ लोगों के साथ बच्चों के साथ हैवानियत को अंजाम दे रहा है. न केवल बांदा, बल्कि चित्रकूट और हमीरपुर के बच्चों का भी यौन शोषण किया गया है. 

खिलौनों और चॉकलेट का लालच देकर बच्चों को घर बुलाता 

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रामभवन अपनी पत्नी दुर्गावती के साथ मिलकर मासूम बच्चों को जाल में फंसाता था. उन्हें खिलौने, गैजेट्स और चॉकलेट्स और कुछ पैसों का लालच देकर घर बुलाता था. फिर भरोसे का फायदा उठाकर उनके साथ हैवानियत को अंजाम दिया जाता. उसके निशाने पर आस-पड़ोस और करीबियों के बच्चे होते थे. जबकि रामभवन और दुर्गावती की खुद की कोई संतान नहीं थी. 

CBI की जांच में सामने आया कि रामभवन बच्चों के साथ गंदी हरकतें करता था और उनके अश्लील वीडियो बनाकर डार्क वेव पर देश-विदेश में लाखों रुपये में बेच देता. ये वीडियो ब्राजील, अमेरिका, चीन, अफगानिस्तान समेत करीब 47 देशों में बेचे गए थे.  

CBI ने केस की जांच करते हुए रामभवन के घर से कई डिजिटल साक्ष्य बरामद किए थे. 16 नवंबर को CBI ने रामभवन को चित्रकूट से उसके घर से अरेस्ट किया गया. 28 दिसंबर को उसकी पत्नी दुर्गावती की गिरफ्तारी की गई. फरवरी 2021 में CBI ने कोर्ट में केस की चार्जशीट दाखिल की थी. जिसमें 74 गवाहों के बयान दर्ज थे. 

कोर्ट केस की टाइमलाइन 

  • 24 फरवरी 2021 को बांदा कोर्ट में चार्जशीट दायर
  • 2023 में कोर्ट ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप का गठन किया
  • इस दौरान रामभवन और दुर्गावती ने खुद पर लगे आरोपों से इंकार किया 
  • 5 जून 2023 से बांदा की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में मामले की की सुनवाई हुई 
  • कोर्ट में 25 पीड़ित बच्चों, एम्स के डॉक्टर और टीचर समेत 74 गवाह पेश हुए 
  • 20 फरवरी 2026 को POCSO कोर्ट ने रामभवन और दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई 

कोर्ट ने माना रेयरेस्ट ऑफ रेयर (Rarest of the Rare)

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अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान जज की रूह भी कांप गई. बच्चों के साथ हैवानियत में उनके नाजुक अंगों को गहरे जख्म दिए गए थे. कई बच्चों का दिल्ली AIIMS में इलाज चला. इलाज करने वाले डॉक्टरों ने जज के सामने बच्चों के साथ दरिंदगी को बयां किया. डॉक्टरों की टीम और बच्चों ने गवाही दी,जो बहुत बड़ा सबूत था और बड़ी सजा का आधार भी बना. बच्चों के साथ दरिंदगी ने जज को विचलित कर दिया.

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बांदा पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने इस मामले को Rarest of the Rare केस माना है. उन्होंने अपने फैसले में कहा, प्रताड़ना के कारण कई बच्चों का जीवन नरक हो गया.  दोनों दोषियों को तब तक फंदे पर लटकाया जाए जब तक उनकी सांस पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती. 

अमेरिका के जेफरी एपस्टीन जैसा कांड 

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अपने कबूलनामे में रामभवन ने माना है कि उसने 50 बच्चों के साथ गंदा खेल खेला है. जबकि 34 के सबूत मिले हैं. रामभवन का तरीका कहीं न कहीं अमेरिका के यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से मिला जुला है. जिसमें वह नाबालिग बच्चों का यौन शोषण कर फोटोज वीडियोज बनाता था, उन्हें क्लाइंट को पेश करता था. रामभवन ने करीब एक दशक तक बच्चों के साथ दरिदंगी को अपनी मोटी कमाई का जरिया बनाया. वह हमेशा किराए के घर में ही रहा, कई बार पड़ोसियों ने संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत कर उसे भगाया भी, लेकिन वह फिर दूसरे इलाकों में जाकर लोगों से जान पहचान बनाता और उनके बच्चों को गंदे खेल का मोहरा बनाता था. बांदा कोर्ट के सजा ए मौत के फैसले के बाद रामभवन और दुर्गावती का ये घिनौना कांड एक बार फिर ताजा हो गया. 

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