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सुप्रीम कोर्ट का फैसला, अब शिक्षक बनने और प्रमोशन पाने के लिए TET जरूरी
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला साफ इशारा करता है कि अब भारत में शिक्षण सेवा में गुणवत्ता को सबसे ऊपर रखा जाएगा. इससे योग्य और मेहनती शिक्षकों को ही नौकरी और प्रमोशन का मौका मिलेगा.
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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि अगर कोई व्यक्ति शिक्षक बनना चाहता है या फिर पहले से शिक्षक है और उसे प्रमोशन चाहिए, तो उसके लिए अब TET (Teacher Eligibility Test) पास करना अनिवार्य होगा. यह नियम पूरे देश में लागू होगा. इस फैसले के ज़रिए अदालत ने यह साफ कर दिया है कि शिक्षण सेवा में योग्यता और गुणवत्ता सबसे जरूरी है.
5 साल से कम सेवा वाले शिक्षकों को दी गई राहत
हालांकि, अदालत ने उन शिक्षकों को थोड़ी राहत दी है जिनकी सेवानिवृत्ति में अब केवल 5 साल या उससे कम का समय बचा है. ऐसे शिक्षक बिना TET पास किए भी अपनी सेवा में बने रह सकते हैं. यानी उन्हें अब परीक्षा देने की ज़रूरत नहीं है. लेकिन अगर किसी शिक्षक की सेवा 5 साल से ज़्यादा बची है, तो उन्हें TET पास करना ही होगा, वरना वे या तो सेवा से हट सकते हैं या फिर सेवांत लाभों (retirement benefits) के साथ अनिवार्य सेवानिवृत्ति (compulsory retirement) का विकल्प चुन सकते हैं.
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अल्पसंख्यक स्कूलों में TET अनिवार्यता पर आगे होगी सुनवाई
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इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया कि एक और अहम मुद्दा अभी बाकी है, क्या राज्य सरकारें अल्पसंख्यक संस्थानों में भी TET को अनिवार्य कर सकती हैं? यह मामला थोड़ा संवेदनशील है क्योंकि यह अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़ा है. इसलिए इस प्रश्न को एक बड़ी पीठ (larger bench) को सौंपा गया है, जो बाद में इस पर फैसला करेगी.
TET की शुरुआत और उसकी ज़रूरत क्यों पड़ी?
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दरअसल, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने साल 2010 में एक नियम बनाया था, जिसमें यह कहा गया था कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने के लिए कुछ न्यूनतम योग्यताएँ जरूरी होंगी. इसके बाद ही TET परीक्षा की शुरुआत हुई, ताकि यह तय किया जा सके कि जो शिक्षक स्कूल में पढ़ा रहे हैं या पढ़ाने जा रहे हैं, वे वास्तव में उस योग्य हैं या नहीं.
अब शिक्षा में योग्यता होगी सबसे बड़ा मानदंड
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सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला साफ इशारा करता है कि अब भारत में शिक्षण सेवा में गुणवत्ता को सबसे ऊपर रखा जाएगा. इससे योग्य और मेहनती शिक्षकों को ही नौकरी और प्रमोशन का मौका मिलेगा. साथ ही, इससे बच्चों को भी बेहतर शिक्षा मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें ऐसे शिक्षक पढ़ाएंगे जो खुद एक जरूरी परीक्षा में सफल हुए हैं. यह फैसला पूरे शिक्षा तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.