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DUSU Election Result: दिल्ली यूनिवर्सिटी में फिर लहराया भगवा... ABVP के आर्यन मान बने अध्यक्ष, जानें उपाध्यक्ष-सचिव पद पर किसने मारी बाजी

DUSU Chunav 2025: DUSU चुनाव 2025 के नतीजे आ चुके हैं और इस बार भी ABVP ने इतिहास दोहराया है. भाजपा से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने तीन अहम पदों अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पर जीत दर्ज कर अपनी पकड़ फिर से मजबूत कर ली है

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19 Sep 2025
( Updated: 11 Dec 2025
07:14 AM )
DUSU Election Result: दिल्ली यूनिवर्सिटी में फिर लहराया भगवा... ABVP के आर्यन मान बने अध्यक्ष, जानें उपाध्यक्ष-सचिव पद पर किसने मारी बाजी
Source: Aryan Maan (Instagram)
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DUSU Election Result 2025: दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU Election Result 2025) चुनाव 2025 के नतीजे आ चुके हैं और इस बार भी ABVP ने इतिहास दोहराया है. भाजपा से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने तीन अहम पदों अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव  पर जीत दर्ज कर अपनी पकड़ फिर से मजबूत कर ली है. वहीं कांग्रेस से जुड़ा संगठन NSUI (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) सिर्फ उपाध्यक्ष पद पर ही जीत दर्ज कर पाया. साल 2023 के चुनावों की तरह ABVP ने इस बार भी बहुमत के साथ दिल्ली यूनिवर्सिटी की सियासत में अपना परचम लहराया है.

किसे मिले कितने वोट?

DUSU चुनावों में चारों पदों पर मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन नतीजों ने साफ कर दिया कि ABVP की पकड़ ज़मीनी स्तर पर मजबूत है. आइए देखें किसे कितने वोट मिले:

अध्यक्ष: आर्यन मान (ABVP) –  28841, जोसलिन नंदिता चौधरी (NSUI) – 12645
उपाध्यक्ष: राहुल झांसला (NSUI) –  29339,  गोविंद तंवर (ABVP) – 20547
सचिव: कुणाल चौधरी (ABVP) – 23779 ,  कबीर (NSUI) – 16117
संयुक्त सचिव: दीपिका झा (ABVP) – 21825 , लवकुश भड़ाना (NSUI) – 17380

इस बार उपाध्यक्ष पद NSUI के हाथ गया, जबकि बाकी तीनों सीटों पर ABVP की सीधी और स्पष्ट जीत रही.

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ABVP की जीत का बड़ा कारण उसका मजबूत और व्यापक घोषणापत्र भी माना जा रहा है. संगठन ने 5,000 से अधिक छात्रों से बातचीत करके उनके सुझावों के आधार पर अपना मेनिफेस्टो तैयार किया.इस एजेंडे में छात्रों की असली ज़रूरतों और मुद्दों को ध्यान में रखते हुए कई ठोस वादे शामिल किए गए हैं.
मुख्य वादों में फ्री हाई-स्पीड Wi-Fi, महिला हॉस्टल की सुरक्षा, दिव्यांग छात्रों के लिए एक्सेसिबिलिटी ऑडिट, खेल सामग्री की सुविधा, हॉस्टल निर्माण, और समय पर परीक्षा परिणाम की घोषणा जैसी चीज़ें शामिल हैं. इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य पर भी फोकस करते हुए ABVP ने कॉलेजों में काउंसलिंग सेशन्स और माइंडफुलनेस सेंटर की स्थापना का वादा किया है.

 महिला सुरक्षा बना बड़ा मुद्दा, ABVP ने पेश की विस्तृत योजना

इस बार के चुनाव में महिला सुरक्षा को लेकर ABVP ने काफी गंभीरता दिखाई. घोषणापत्र में महिला हॉस्टल के आसपास PCR पेट्रोलिंग, पिंक बूथ्स, महिला सुरक्षा ऐप, गर्ल्स कॉमन रूम, और आत्मरक्षा ट्रेनिंग शिविर जैसी सुविधाओं का वादा किया गया है. साथ ही, हेल्थ कार्ड और सब्सिडाइज़्ड इंश्योरेंस, ओपन जिम और ICC चुनाव को लेकर भी स्पष्ट बातें सामने रखी गईं, जिससे छात्राओं के बीच संगठन की पकड़ और मजबूत हुई.

DUSU अध्यक्ष का पद क्यों है इतना ताकतवर?

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हर साल जब DUSU चुनाव होता है, तो यह सवाल जरूर उठता है  DUSU अध्यक्ष आखिर करता क्या है और यह पद इतना अहम क्यों है? दरअसल, डूसू अध्यक्ष की हैसियत सिर्फ एक छात्र नेता की नहीं होती, बल्कि वह यूनिवर्सिटी प्रशासन और सरकार के बीच छात्रों की आवाज़ बनता है.अगर अध्यक्ष किसी छात्र मुद्दे को लेकर अड़ जाए, तो कई बार प्रशासन को झुकना पड़ता है. उसकी बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यही वजह है कि कॉलेज प्रशासन, फैकल्टी और यहां तक कि राजनीतिक दल भी DUSU अध्यक्ष की राय को गंभीरता से लेते हैं.

20 लाख का फंड और छात्रों के लिए योजनाएं

DUSU के पास सिर्फ ताकत ही नहीं, आर्थिक संसाधन भी हैं. NSUI से जुड़े छात्र नेता रोनक खत्री के मुताबिक, डूसू को हर साल लगभग 20 लाख रुपये का फंड मिलता है। इसमें से हर एक पोस्ट होल्डर को 5 से 6 लाख रुपये मिलते हैं, जिसका इस्तेमाल छात्रों की भलाई के लिए किया जाता है, जैसे इवेंट्स, वर्कशॉप्स, और जरूरतमंद छात्रों की मदद के लिए. इस तरह DUSU सिर्फ चुनावी संगठन नहीं, बल्कि एक छात्रों के लिए काम करने वाला सक्रिय और जिम्मेदार मंच बन चुका है.

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 क्यों DUSU चुनाव है देश की सबसे अहम छात्र राजनीति?

DUSU चुनाव को भारत का सबसे बड़ा छात्र राजनीतिक आयोजन माना जाता है. यहां से निकले कई नेता आज राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं. जैसे अरुण जेटली, अजय माकन और अलका लांबा. इसलिए, DUSU का चुनाव जीतना सिर्फ एक कॉलेज का चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक करियर की मजबूत शुरुआत होता है. इसका प्रभाव इस बात से समझा जा सकता है कि हर साल दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र बड़े पैमाने पर मतदान करते हैं और अपने नेताओं को चुनते हैं, जो न केवल उनकी आवाज़ उठाते हैं, बल्कि आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय मंच पर उनका प्रतिनिधित्व भी कर सकते हैं.

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