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CBSE का बड़ा बदलाव, अब रटकर नहीं, समझकर सीखेंगे बच्चे, परीक्षा का तरीका हुआ मॉडर्न

सीबीएसई एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है जो यह दिखाएगा कि छात्र अपने विषयों को कितना समझ पाए हैं और क्या वे अपनी सीखी हुई बातों को असल जिंदगी में उपयोग कर पा रहे हैं या नहीं.

Image Source: Social Media
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CBSE: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) अब स्कूलों की पढ़ाई और परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करने जा रहा है. इस बदलाव के बाद छात्रों को अब केवल रटने पर नहीं, बल्कि समझने और ज्ञान को वास्तविक जीवन में लागू करने पर ध्यान देना होगा. यह कदम नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत उठाया जा रहा है, ताकि शिक्षा प्रणाली बच्चों की सोचने और समस्या सुलझाने की क्षमता को मजबूत बना सके.

अब बच्चे सिर्फ याद नहीं करेंगे, समझकर सीखेंगे

सीबीएसई एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है जो यह दिखाएगा कि छात्र अपने विषयों को कितना समझ पाए हैं और क्या वे अपनी सीखी हुई बातों को असल जिंदगी में उपयोग कर पा रहे हैं या नहीं. इसका मतलब है कि अब छात्रों का मूल्यांकन सिर्फ अंकों के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी समझ, तर्कशक्ति और कौशल के आधार पर होगा. पहले की तरह रटकर अच्छे नंबर लाने की आदत को खत्म करने के लिए यह नया सिस्टम लाया जा रहा है। इसका उद्देश्य है कि बच्चे सिर्फ “पास” होने के लिए न पढ़ें, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सीखें.

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परीक्षा अब डर नहीं, सीखने का हिस्सा होगी

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सीबीएसई का कहना है कि अब परीक्षा को पढ़ाई का “अंत” नहीं माना जाएगा, बल्कि उसे सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाएगा. यानी अब परीक्षा बच्चों को डराने के बजाय उन्हें यह समझने में मदद करेगी कि उन्होंने क्या सीखा और कहां सुधार की जरूरत है. नई नीति के अनुसार, अब बच्चों की क्रिटिकल थिंकिंग समझ और प्रयोगात्मक ज्ञान पर ध्यान दिया जाएगा. इससे वे न सिर्फ किताबों में लिखी बातों को समझेंगे, बल्कि उन्हें अपने रोजमर्रा के जीवन में लागू भी कर पाएंगे.

योग्यता आधारित परीक्षा ढांचा

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सीबीएसई ने पहले ही कक्षा 6 से 10 तक के लिए “Competency-Based Assessment Framework” लागू कर दिया है. इसके तहत विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों में यह देखा जाता है कि बच्चा विषय की मूल बातें कितना समझ पा रहा है.
इस नए फ्रेमवर्क में ऐसे प्रश्न शामिल किए जाते हैं जो बच्चों की सोचने की क्षमता, तर्क और समझ की गहराई को परखते हैं, ताकि उन्हें सिर्फ याद करने की जरूरत न पड़े.

क्या है SAFAL परीक्षा?

सीबीएसई अब कक्षा 3, 5 और 8 के लिए एक नई परीक्षा प्रणाली शुरू कर रहा है, SAFAL (Structured Assessment for Analyzing Learning). इसका मकसद बच्चों की सीखने की क्षमता का सही आकलन करना है.
SAFAL परीक्षा ऑनलाइन होगी और इसमें बच्चों की बेसिक समझ, तर्कशक्ति, ज्ञान का उपयोग और सोचने की क्षमता की जांच की जाएगी। यह परीक्षा पारंपरिक टेस्ट की तरह नहीं होगी, बल्कि बच्चों की सीखने की प्रगति का मूल्यांकन करेगी.

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नई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य

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इस नई प्रणाली के तीन बड़े लक्ष्य हैं:

  • यह पता लगाना कि बच्चे ने विषय को कितना गहराई से समझा है.
  • यह पहचानना कि कौन-सा छात्र किस हिस्से में कमजोर है ताकि उसे मदद दी जा सके.
  • शिक्षकों को ऐसा डेटा मिल सके जिससे वे बच्चों की जरूरतों के अनुसार पढ़ाने का तरीका बदल सकें.
  • यह नया बदलाव भारत की शिक्षा प्रणाली को ज्यादा व्यावहारिक, आधुनिक और स्किल-आधारित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अब बच्चों के लिए
  • परीक्षा तनाव नहीं, बल्कि सीखने और खुद को बेहतर बनाने का जरिया बनेगी.
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