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CBSE का बड़ा फैसला, 2026 से 9वीं कक्षा में होंगे ओपन बुक टेस्ट

ओपन बुक एग्जाम एक ऐसा बदलाव है जो भारतीय शिक्षा व्यवस्था को रट्टा आधारित पढ़ाई से हटाकर समझ और सोच आधारित शिक्षा की ओर ले जा सकता है. यह बदलाव शुरू में मुश्किल लग सकता है, लेकिन अगर छात्र इस सिस्टम को अपनाएं और सही तरीके से पढ़ाई करें, तो यह उनके भविष्य के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा.

Image Credit: Student
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Open Book Exam: ओपन बुक एग्जाम एक ऐसा एग्जाम होता है जिसमें छात्रों को परीक्षा के समय किताबें, नोट्स और पढ़ाई से जुड़ी चीजें साथ रखने की इजाजत होती है. मतलब, अगर आपको किसी सवाल का जवाब ठीक से याद नहीं है, तो आप किताब खोलकर देख सकते हैं. लेकिन यह उतना आसान नहीं जितना लगता है. इसमें आपको सिर्फ किताब से लाइनें कॉपी नहीं करनी होतीं, बल्कि सवाल को समझकर, अपने शब्दों में उसका जवाब देना होता है. इस परीक्षा में देखा जाता है कि आपने विषय को कितना गहराई से समझा है, और आप अपनी सोच से उसका हल कैसे निकाल सकते हैं.

कहां-कहां होता है ओपन बुक एग्जाम?

ओपन बुक एग्जाम कोई नई चीज नहीं है. यूरोप के लॉ कॉलेजों में यह बहुत पहले से इस्तेमाल हो रहा है. अब यह सिस्टम यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड, अमेरिका, सिंगापुर, हांगकांग और कनाडा जैसे देशों में भी अपनाया जा चुका है. वहां स्कूल और कॉलेज के स्टूडेंट्स इसी तरह की परीक्षाएं देते हैं. अब भारत में भी सीबीएसई ने इसे 2026-27 से 9वीं क्लास में लागू करने का फैसला किया है.

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 इस तरह की परीक्षा में क्या होता है खास?

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ओपन बुक एग्जाम में आपको रट्टा मारने की जरूरत नहीं होती. बल्कि यहां समझने की क्षमता ज़्यादा मायने रखती है. आपको यह पता होना चाहिए कि सवाल किस टॉपिक से जुड़ा है, किताब में उसका जवाब कहां मिल सकता है, और उस जानकारी को कैसे अपने शब्दों में लिखकर अच्छे से समझाया जा सकता है. इससे यह भी पता चलता है कि छात्र कितनी गहराई से पढ़ाई करता है और अपने दिमाग का कितना अच्छा इस्तेमाल कर पाता है.

ओपन बुक एग्जाम के फायदे

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रट्टा मारना कम होगा - अब स्टूडेंट्स सिर्फ याद करने के बजाय, समझ कर पढ़ने की आदत डालेंगे. इससे वे टॉपिक को ज्यादा अच्छे से जान पाएंगे.
सोचने और समझने की आदत बढ़ेगी - ऐसे एग्जाम में सीधे जवाब नहीं मिलते, इसलिए दिमाग लगाना ज़रूरी होता है. इससे सोचने और चीजों को गहराई से समझने की क्षमता बढ़ती है.
असल जिंदगी की तैयारी- रियल लाइफ में भी हम किसी प्रॉब्लम को हल करने के लिए किताबें, गूगल या एक्सपर्ट की मदद लेते हैं. ओपन बुक एग्जाम इसी सोच पर काम करता है.
घबराहट कम होती है - किताबें साथ रखने की छूट होने से छात्रों को यह डर नहीं रहता कि अगर कुछ भूल गए तो क्या होगा.

इसके नुकसान क्या हो सकते हैं?

बिना तैयारी के कोई फायदा नहीं - अगर आपने पढ़ाई नहीं की है, तो किताब साथ होने के बावजूद आप सवाल नहीं समझ पाएंगे और समय भी बर्बाद होगा.
जवाब ढूंढना टाइम ले सकता है - हर सवाल का जवाब किताब में खोजना और फिर समझकर उसे लिखना, ज्यादा समय ले सकता है. टाइम मैनेजमेंट बहुत ज़रूरी है.
मार्किंग करना मुश्किल हो सकता है - हर छात्र अपनी भाषा में जवाब लिखेगा, जिससे टीचर को सभी के जवाब समझने और जांचने में दिक्कत हो सकती है.

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ओपन बुक एग्जाम एक ऐसा बदलाव है जो भारतीय शिक्षा व्यवस्था को रट्टा आधारित पढ़ाई से हटाकर समझ और सोच आधारित शिक्षा की ओर ले जा सकता है. यह बदलाव शुरू में मुश्किल लग सकता है, लेकिन अगर छात्र इस सिस्टम को अपनाएं और सही तरीके से पढ़ाई करें, तो यह उनके भविष्य के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा.

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