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क्या राजपूताना साफा पहनकर 2027 में क्षत्रियों का दिल जीत सकेंगे अखिलेश?
Akhilesh Yadav कई दिनों बाद अपने पुराने अंदाज में दिखे. अंदाज जो 2027 की ओर इशारा कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी कार्यालय में Akhilesh Yadav ने महाराणा प्रताप की जयंती मनाई और कई सियासी संकेत दिए.
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UP में चुनाव अभी दूर हैं लेकिन तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस अंदाज से तो ये ही लग रहा है. लखनऊ में अखिलेश यादव ने महाराणा प्रताप की जयंती मनाई. इस दौरान उन्होंने एक तस्वीर का ज़िक्र कर BJP को चिढ़ाया. अखिलेश ने BJP का नाम तो नहीं लिया लेकिन इशारों-इशारों में काफ़ी कुछ कह दिया.
सपा कार्यालय खचाखच भरा था…सपा नेताओं के साथ क्षत्रिय समाज के लोग मौजूद थे..बीच में अखिलेश यादव बैठे थे. मौक़ा था महाराणा प्रताप की जयंती का…अखिलेश यादव ने क्षत्रिय समाज के लोगों के साथ महाराणा प्रताप की जयंती मनाई. इस दौरान लोगों का ध्यान खींचा उनके मेवाड़ी और राजपूताना साफ़े ने. इसके ज़रिए अखिलेश ने एक तीर से कई निशाने साधे. अखिलेश ने महाराणा प्रताप की जयंती के बहाने BJP पर राणा सांगा विवाद को लेकर पलटवार किया. अखिलेश ने महाराणा प्रताप को लेकर कई ऐलान किए और कहा- आज की तस्वीर जो देखेगा उसे तकलीफ़ होगी…और मैं उनकी तस्वीर देखूं और उसमें कोई मुझे दिखाई दे जाए तो उन्हें काफ़ी तकलीफ़ होगी. अखिलेश के इतना कहते ही वहां मौजूद लोग ताली बजाते हुए ठहाके लगगाने लगे. इनमें से एक ने कहा, नींद ही नहीं आएगी आज उनको.
वहीं, अखिलेश जिस तस्वीर की बात कर रहे थे उसमें वह तलवार हाथ में लिए हुए हैं. राणा सांगा विवाद के बाद करणी सेना भी तलवार लेकर सड़कों पर उतर आई थी. ऐसे में इस तस्वीर को उसी का जवाब माना जा रहा है.
यहां गौर करने वाली बात ये भी है कि अखिलेश ने BJP के सहयोगियों को भी हंसते-हंसते निशाने पर ले लिया. लेकिन वो कौनसे सहयोगी हैं जो पहले समाजवादियों के करीबी रहे. क्या अखिलेश राजा भैया की बात कर रहे हैं ? क्योंकि राणा सांगा विवाद के दौरान राजा भैया भी करणी सेना को समर्थन दे रहे थे. जब करणी सेना ने सपा सांसद रामजीलाल के ख़िलाफ़ तलवारें उठा ली थीं. उस दौरान राजा भैया करणी सेना के कार्यकर्ताओं से बात कर रहे थे. ऐसे में माना जा रहा है BJP के सहयोगियों वाली बात राजा भैया के लिए कही गई थी.
क्षत्रिय वोटों पर अखिलेश की नजर!
सपा सांसद रामजीलाल सुमन के राणा सांगा को ग़द्दार कहे जाने के बाद समाजवादी पार्टी लगातार करणी सेना के निशाने पर थी. करणी सेना तलवारें लेकर सड़कों पर उतर गई. अखिलेश यादव और रामजीलाल सुमन से माफ़ी की माँग करने लगी. ऐसे में माना जा रहा है महाराणा प्रताप के बहाने अखिलेश यादव डैमेज कंट्रोल कर रहे हैं. भले ही अखिलेश PDA का नारा देते हों लेकिन वो ये भलिभांति जानते हैं कि UP में राजपूत वोटर्स कितनी अहमियत रखते हैं. ऐसे में राजपूताना साफे के जरिए अखिलेश की नजर क्षत्रिय वोटर्स पर है.
इसके संकेत अखिलेश के महाराणा प्रताप पर किए गए कई ऐलानों से भी मिले. अखिलेश यादव ने कहा, महाराणा प्रताप की जयंती पर सरकार को दो दिन की छुट्टी घोषित करनी चाहिए. हमारी सरकार बनेगी तब रिवर फ़्रंट पर महाराणा प्रताप की सबसे अच्छी प्रतिमा बनेगी. इतनी ही नहीं महाराणा प्रताप के हाथ में जो तलवार होगी वो सोने की होगी.
वहीं, जब अखिलेश यादव से करणी सेना को लेकर सवाल किए गए तो उन्होंने तंज कसते हुए कहा वो सेना नक़ली थी ये सेना असली है. उन्होंने रामजीलाल सुमन से जुड़े राणा सांगा विवाद पर भी बड़ी बात कही. और इतिहास को इतिहास ही रहने देने की नसीहत दी. साथ ही BJP पर निशाना साधते हुए योगी सरकार को आड़े हाथों ले लिया.
यूपी में राजपूतों का कितना दबदबा?
UP में राजपूत क़रीब 100 विधानसभाओं में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी ठाकुर हैं. ऐसे में माना जा रहा है UP के 8 से 10 प्रतिशत ठाकुरों पर अखिलेश यादव की नजर है. वहीं, राणा सांगा विवाद के बाद जो राजपूत अखिलेश से नाराज चल रहे हैं उन्हें भी मनाने की कोशिश अभी से ही होने लगी. लेकिन क्या अखिलेश इस सियासी तलवार से BJP के क्षत्रिय वोट काट पाएंगे ? जो तकलीफ अखिलेश इस तस्वीर से देने की बात कर रहे हैं जिसको तकलीफ देने की बात कर रहे हैं क्या उनको सच में इससे कोई तकलीफ होगी. क्या क्षत्रिय वोट उनके पाले में आएंगे…बहरहाल अखिलेश की ये कोशिश सियासी मैदान में कितना कमाल कर पाएगी ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन सपा अध्यक्ष ने कम से कम अपने इस अंदाज और रणनीति से सियासी हलचल तो पैदा कर ही दी है.
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