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ट्रंप ने मादुरो को बंधक बनाया… तो क्यों याद आए वाजपेयी और कलाम? लोगों ने जताया उनका शुक्रिया

अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को बंधक बनाया तो भारतीयों ने अटल बिहारी वाजपेयी, ए.पी.जै. अब्दुल कलाम को याद कर, उन्हें धन्यवाद दिया.

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ए.पी.जै. अब्दुल कलाम ने कहा था, “Strength respects Strength”, यानी ताकत ही ताकत का सम्मान करती है. वे कहते थे, ‘भारत शांति प्रेमी देश है, लेकिन पड़ोसी देशों के पास परमाणु हथियार होने की वजह से भारत को भी मजबूत होना पड़ता है’. कलाम ये भी कहते थे कि, ‘परमाणु हथियार रक्षा के लिए हैं, न कि आक्रमण के लिए’. पिछले दिनों जब अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला करके, वहां के राष्ट्रपति को बंधक बनाकर अपने देश ले आया, ऐसे में सोशल मीडिया पर यही कहा जा रहा है कि अगर वेनेजुएला परमाणु सपंन्न देश होता है, तो वहां के राष्ट्रपति को बंधक बनाने की अमेरिकी की हिम्मत नहीं होती. इसके साथ-साथ आज ए.पी.जै. अब्दुल कलाम, अटल बिहारी वाजपयी और नरसिंहा राव जैसे देश के महान शख्तियतों को भी याद किया जा रहा है. जिनकी वजह से भारत आज परमाणु सपन्न देश है, और अमेरिकी जैसे पावरफुल देश की भी हिम्मत नहीं कि भारत पर बुरी नजर डाल सके.

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में हुआ था सफल परमाणु परिक्षण

आपको बता दें पोखरण-2 भारत का दूसरा परमाणु परीक्षण था, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में 11 से 13 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में 5 भूमिगत विस्फोट किए गए थे. इसे ऑपरेशन शक्ति के नाम से जाना गया, जिसमें फ्यूजन (हाइड्रोजन बम) और फिशन बम शामिल थे. इसके बाद भारत पूर्ण परमाणु शक्ति सपंन्न राष्ट्र घोषित हो गया. ए.पी.जै. अब्दुल कलाम अटल बिहारी वाजपेयी के वो सिपाही थे जिनके नेतृत्व में यह परिक्षण हुआ था. हालांकि आपको बता दें, कि सबसे पहला परमाणु परिक्षण इंदिरा गांधी की सरकार में 18 मई 1974 को राजस्थान के पोखरण रेगिस्तान में हुआ था, जिसे स्माइलिंग बुद्धा का नाम दिया गया था.

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अमेरिका ने लगाए भारत पर कई प्रतिबंध

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भारत ने जैसे ही पोखरण-2 का सफल परिक्षण किया, तो पूरी दुनिया को और ख़ासकर अमेरिका-पाकिस्तान को जैसे सांप सूंघ गया. दोनों ही देश बौखला गए, और इस बौखलाहट में भारत की निंदा की और आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए. अमेरिका एक ऐसा देश है, जो कभी नहीं चाहता कि दूसरा कोई देश परमाणु संपन्न देश बने, क्योंकि वह डर और अपनी धौंस नहीं दिखा पाएगा, और किसी भी न्यूक्लियर पावर वाले देश से अमेरिका कभी पंगा भी नहीं लेना चाहता. इसलिए आज ईरान पर अमेरिका की नज़र रहती है. 

नरसिम्हा राव के योगदान को भी नहीं भुलाया जा सकता

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नरसिम्हा राव भारत को न्यूक्लियर पावर संपन्न बनाने में अहम कड़ी थे. साल 1995 में उन्होंने पोखरण में परमाणु परीक्षण की तैयारी का आदेश दिया था, लेकिन अमेरिकी खुफिया जानकारी के कारण इसे रद्द कर दिया गया. वहीं, वाजपेयी जी के पीएम बनने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव उनसे मिलने आए. उन्होंने वाजपेयी से कहा, “सामग्री तैयार है, आप आगे बढ़ सकते हैं.” यह इशारा था कि परमाणु परीक्षण की सारी तैयारी हो चुकी है. और आख़िरकार 1998 में भारत परमाणु संपन्न देश बन ही गया.

अमेरिका भारत को आंख नहीं दिखा सकता

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भारत एक शांति प्रिय देश है. भारत की एक पुरानी नीति रही है, ‘हम किसी को छेड़ेंगे नहीं, और अगर किसी ने हमें छेड़ा तो फिर उसे छोड़ेंगे नहीं’. अमेरिका हो, चीन हो या फिर पाकिस्तान ये भारत की ताक़त को अच्छी तरह जानते हैं. ये भारत पर सीधे अटैक नहीं कर सकते, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर षड्यंत्र तैयार करते हैं, और भारत को कमजोर करने की कोशिश करते हैं. 

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