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‘ट्रेड वॉर, बड़बोलापन, घमंड और चौधराहट…’, भारत से पंगा लेने चले थे ट्रंप, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने तगड़ा घेरा, KGB से कर दी तुलना

कभी Trade War, कभी प्रतिबंध, कभी वीजा के नाम पर दुनिया को नचाना तो कभी युद्ध के बीच चौधराहट दिखाना, तो कभी युद्ध में खुद कूद जाना. Trump की नीतियों ने America की दुनिया भर में आलोचना करवाईं. अब पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama ने भी ट्रंप की नीतियों के Side Effects बता दिए हैं. ओबामा ने उदाहरण देते हुए ट्रंप की पुतिन-केजीबी और अमेरिका की हंगरी से तुलना कर दी है.

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जिसे अमेरिका की कुर्सी मिली उसने ख़ुद को राजा समझ लिया. ट्रेड पर ब्लैकमेलिंग, प्रतिबंध की धमकी, दो देशों के बीच पैदा हुए तनाव की आग में घी डालना. मौजूदा दौर में अमेरिका को इन्हीं उपमाओं से नवाजा जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चौधराई से दुनिया ही नहीं अमेरिका में भी विरोध की आवाज़ें उठ रही हैं. ट्रंप के फ़ैसलों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. अब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी ट्रंप की नीतियों पर सवाल उठाए हैं साथ ही एक बड़े ख़तरे का अंदेशा भी जताया.

कभी ट्रेड वॉर, कभी प्रतिबंध, कभी वीजा के नाम पर दुनिया को नचाना तो कभी युद्ध के बीच बिन बुलाए कूद जाना और नोबेल की तड़प दिखाना, कभी सीजफायर का क्रेडिट लेना, तो कभी युद्ध में खुद कूद जाना; डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां अमेरिका को तानाशाही की ओर लेकर जा रही हैं. ये हमारा नहीं पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का मानना है. ओबामा ने ट्रम्प सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जो लोग आज अमेरिका की सरकार चला रहे हैं, वे लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों को कमजोर कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जरूरी है कि सरकार के बाहर और अंदर दोनों जगह से गलत चीजों का विरोध हो. लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है. 
दरअसल, बराक ओबामा हाल ही में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे. जहां उन्होंने फ़ेमस इतिहासकार हीदर कॉक्स के साथ अमेरिका के कई मुद्दों पर चर्चा की. इस दौरान उन्होंने देश की मौजूदा राजनीतिक हालात पर चिंता जताई और युवाओं से देश को बचाने की अपील भी की.


ओबामा ने हंगरी से कर दी अमेरिका की तुलना
पूर्व राष्ट्रपति ने बड़े ख़तरे की आशंका जताई और दावा किया कि ट्रंप सरकार व्यापारिक सौदों से देशों को डरा रही है. उन्होंने कहा: अमेरिका लोकतंत्र से भटक रहा है और देश की आत्मा खोखली हो रही है. व्यापारिक सौदों में डराया जा रहा है, जो केवल आर्थिक नहीं बल्कि नैतिक रूप से भी खतरनाक है. ओबामा ने यहां अपने कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा कि चीन की बढ़ती ताकत के बावजूद भी उन्होंने टैरिफ जैसे उपायों का बेजा इस्तेमाल नहीं किया था, क्योंकि यह अमेरिका की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाता है. ट्रेड वॉर गलत है इससे देश की गरिमा खतरे में है आज जरूरत है कि सिर्फ आम लोग ही नहीं बल्कि सरकार में मौजूद अधिकारी, चाहे वह किसी भी पार्टी में हो क़ानून के पक्ष में खड़े हों और कहें- नहीं यह ग़लत है. ओबामा ने मौजूदा अमेरिका की तुलना हंगरी जैसे देश से कर दी. जहां चुनाव तो होते हैं लेकिन लोगों की आवाज़ दबा दी जाती है. ओबामा ने चेतावनी दी कि अमेरिका भी अब ऐसे ही रास्ते पर बढ़ रहा है, जहां कानून और लोकतंत्र की असली भावना कमजोर हो रही है. 

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ओबामा ने युवाओं को अमेरिका के मौजूदा हालातों के बारे में समझाते हुए रूप के राष्ट्रपति और केजीबी-जो कि एक जासूसी एजेंसी है. उनका हवाला देते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोग अक्सर उस माहौल का फायदा उठाते हैं. जहां लोगों को यह पता ही नहीं होता कि सच क्या है. रूस के राष्ट्रपति पुतिन और उनके केजीबी (जासूसी एजेंसी) की एक कहावत है, जिसे अमेरिका में ट्रम्प के सलाहकार स्टीव बैनन ने भी अपनाया. इस कहावत का मतलब है कि अगर आप चाहते हैं कि लोगों का दिमाग उलझ जाए, तो उन्हें सच्चाई समझाने की जरूरत नहीं है. उस माहौल में इतना ज्यादा झूठ और बकवास भर दो कि लोगों को लगे, अब किसी बात पर यकीन करना ही फिजूल है. जब लोग सच से हार मान लें, तभी तानाशाही पनपती है.

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‘हिलने लगी है अमेरिकी लोकतंत्र की नींव’
ओबामा का ये बयान ऐसे समय में आया जब अमेरिका विदेश नीति के मोर्चे पर चौतरफ़ा घिरा हुआ है. दुनिया युद्ध के मुहाने पर खड़ी है और युद्ध की इस आग में ट्रंप अपना सिकाव कर रहे हैं. ओबामा ने भी अमेरिकियों का ध्यान इसी ओर दिलाया कि, ट्रंप पूरी दुनिया को नचा रहे हैं. कभी व्यापार के नाम पर तो कभी जंग के नाम पर, उनके नेतृत्व में अमेरिका अंदर से खोखला होता जा रहा है. लोकतंत्र की जो नींव है वो हिलने लगी है. अब अमेरिका दुनिया की नजरों में शक्तिशाली लोकतांत्रिक वाला देश नहीं बल्कि अहंकारी राष्ट्रवाद का चेहरा बनता जा रहा है. जबिक अमेरिका का वैश्विक नेतृत्व उसकी आंतरिक शक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों पर निर्भर करता है. ट्रंप की नीतियों ने इसी आधार को कमजोर किया है.

इजरायल-ईरान की जंग में ईरान ने इसी कमजोरी का फायदा उठाया. जब अमेरिका दुनिया को एकजुट रखने के बजाय 'एकला चलो' की नीति अपनाता है, तो क्षेत्रीय ताकतें खुद को मजबूत करने लगती हैं. ईरान ने परमाणु समझौते से अमेरिका के हटने को एक मौके के तौर पर देखा और अपनी सैन्य ताकत बढ़ाना शुरू कर दिया. इसका नतीजा ये हुआ कि  ट्रंप ने ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को तोड़ दिया, जिसे ओबामा प्रशासन ने तैयार किया था. इससे ईरान पर लगाम लगाने का एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक रास्ता बंद हो गया. इसके साथ ही, ट्रंप ने इजरायल को पूरी तरह से समर्थन देने की नीति अपनाई जिससे मध्य-पूर्व में शक्ति संतुलन और बिगड़ गया. अब इजरायल और ईरान आमने-सामने हैं और अमेरिका का वैश्विक नेतृत्व पहले की तरह मजबूत नहीं है.

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ऐसे में ओबामा की बात महज एक बयान नहीं बल्कि एक चेतावनी है. कि जब कोई देश अपने लोकतांत्रिक मूल्यों से भटकता है और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को नजरअंदाज करता है, तो उसका असर सिर्फ देश के भीतर ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में दिखाई देता है. बहरहाल आप ट्रंप की नीतियों को कैसे देखते हैं हमें कमेंट कर ज़रूर बताएँ. साथ ही आपको सुनाते हैं ट्रंप की मौजूदा नीतियों और ईरान-इजरायल की जंग में उनकी भूमिका पर डिफ़ेंस एक्सपर्ट प्रफुल्ल बख्शी का क्या कहना है. 

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