Advertisement

Loading Ad...

भारत की ‘साइलेंट डिप्लोमेसी’ के आगे व्हाइट हाउस फेल, पीएम मोदी ने पहले ही भांप ली थी वो आहट, जिसे समझने में यूरोप ने देर कर दी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी के सगे नहीं हैं. ये बात प्रधानमंत्री मोदी ने बहुत पहले ही भांप ली थी, लेकिन यूरोपीयो देशों ने इसे समझने में बहुत देर कर दी. नतीजा ये है कि आज वो सभी देश ट्रंप के ‘टैरिफ ट्रैप’ में फंसते जा रहे हैं.

Loading Ad...

“लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में, यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है”, राहत इंदौरी की ये लाइन आज विश्व की राजनीतिक परिस्थिति को समझाने के लिए काफी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब भारत पर टैरिफ लगाया था, तब कुछ पड़ोसी मुल्क तालियां बजा रहे थे, लेकिन अब ट्रंप जिस रस्ते चल पड़े हैं, ऐसा लगता है कि अब उनपर भी टैरिफ की तलवार लटकी हुई है और उनकी ‘खुशी’ जल्द ‘मातम’ में बदलने वाली है.

ट्रंप ने सहयोगियों को भी नहीं बख्शा

ट्रंप के साथ दोस्ती का दंभ भरने वालों को अब सबक सीख लेना चाहिए. क्योंकि ट्रंप किसी के सगे नहीं हैं. ट्रंप ने जिस तरह से टैरिफ लगाकर या ऑपरेशन सिंदूर पर ऊल-जलूल बयान देकर भारत को भड़काने की कोशिश की. वहीं, दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी ने चुप्पी साधे रखी. हालांकि, इस चुप्पी का बहुतों ने विरोध किया और पीएम मोदी पर सवाल दागते रहे. लेकिन अब उन लोगों को ये ऐहसास हो रहा होगा कि प्रधानमंत्री मोदी की खामोशी ही ट्रंप के ख़िलाफ कूटनीतिक जीत है. अभी हाल ही में, डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को किडनैप किया. इस किडनैपिंग के ख़िलाफ अमेरिका के किसी भी सहयोगी देश ने एक शब्द नहीं बोला और खामोशी से तमाशा देखते रहें. उसके बाद ट्रंप का मनोबल और बढ़ा और फिर ग्रीनलैंड को कब्जाने की दिशा में ट्रंप जैसे ही आगे बढ़े तो उनके सहयोगी यूरोपीय देशों ने इसका विरोध किया. फिर क्या था ट्रंप ने अपने करीबी सहयोगी देशों पर भी टैरिफ लगा दिया. ट्रंप के इस फैसले से यूरोपीय देशों की आंखे खुली और उन्हें एहसास हुआ कि ट्रंप किसी के सगे नहीं है.

Loading Ad...

पाकिस्तान को भी ठेंगा दिखा सकते हैं ट्रंप

Loading Ad...

आपको याद होगा, ट्रंप जब भारत पर टैरिफ लगा रहे थे, तब हमारा पड़ोसी मुल्क मंद-मंद मुस्कुरा रहा था. पाकिस्तान को ऐसा लग रहा था कि उन्होंने अमेरिका की चापलूसी करके भारत पर एक रणनीतिक जीत हासिल कर ली है. उसके बाद पाकिस्तान के कट्टरपंथी आसिम मुनीर को ट्रंप ने व्हाइट हाउस में बुलाकर सम्मानित भी किया था. इसके बाद पाकिस्तान को ऐसा लगा कि उनके सिर पर अब ट्रंप का हाथ है. लेकिन वर्तमान की घटनाओं से शायद अब पाकिस्तान का अमेरिका के साथ दोस्ती का भ्रम दूर हुआ होगा. उन्हें एहसास हुआ होगा कि जब ट्रंप अपने सबसे करीबी सहयोगी देशों के नहीं हुए तो क्या ही पाकिस्तान के होंगे. 

भारत ने पहले ही भांप ली थी परिस्थिति

Loading Ad...

इस पृष्ठभूमि को भारत शायद पहले ही समझ गया था, जिसे यूरोप आज महसूस कर रहा है, या फिर पाकिस्तान कल महसूस करेगा. मई 2025 में भारत ने ट्रंप के अटपटे बयानों का स्वाद तब चखा जब ट्रंप ने यह निराधार दावा किया कि उन्होंने टैरिफ़ की धमकियों से पाकिस्तान के साथ संघर्ष रुकवाया. ट्रंप के इस निराधार दावे के छिपे मैसेज को भारत तुरंत समझ गया कि ट्रेड को भू-राजनीतिक दिखावे और ट्रंप की मनचाही शर्तें मनवाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसलिए भारत ने ट्रंप के दावे का पूरी तरह से खंडन किया और ट्रंप के बार-बार दावे के बाद भी प्रधानमंत्री मोदी ख़ामोश रहे. 

भारत के रूख से बौखला गए ट्रंप

यह भी पढ़ें

भारत की इसी संयम रखने और अपने रुख पर क़ायम रहने की संतुलन वाली रणनीति ने उसे ट्रंप ट्रैप से बचा लिया, नतीजतन ट्रंप गुस्से से लाल-पीले हो गए. अब यूरोप और अमेरिका के बीच चल रहा टकराव भारत की सतर्क रणनीति और कूटनीतिक जीत को दर्शाता है. वहीं, वो देश जो अमेरिका को खुद का हमदर्द समझते थे, अब उनकी आंखें खुली हैं. और ट्रंप की आलोचना कर रहे हैं.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...