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भारत के खिलाफ ‘इस्लामिक नाटो’ बनाने की तैयारी? सऊदी, तुर्किए और पाकिस्तान के बीच सैन्य समझौता!

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच एक अहम सैन्य समझौता होने की संभवना जताई जा रही है, जिसे ‘इस्लामिक नाटो’ का नाम दिया जा रहा है.

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दुनिया की राजनीति अब बदलती हुई दिख रही है. दुनिया के कई देश अब नए दोस्त की तलाश में हैं, और अपनी ताकत को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. जानकारों का कहना है कि ये सबकुछ अमेरिका की बदलती नीति की वजह से हो रहा है, क्योंकि अमेरिका इस वक्त केवल अपने और इज़रायल के बारे में सोच रहा है. इसी बीच अब खबर ये है कि सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान मिलकर एक सैन्य संगठन बना रहे हैं, जिसे ‘इस्लामिक नाटो’ या ‘मुस्लिम नाटो’ कहा जा रहा है.

तीन देश मिलकर बना रहे ‘इस्लामिक नाटो’?

आपको याद होगा पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक समझौता हुआ था, जिसे ‘रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता’ कहा गया. 17 सितंबर 2025 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ सऊदी अरब के आधिकारिक यात्रा पर गए थे. इसी दौरान सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और शहबाज शरीफ के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. यह पहली बार था जब किसी खाड़ी देश ने किसी परमाणु शक्ति संपन्न देश के पाकिस्तान के साथ इस तरह का औपचारिक सैन्य गठबंधन किया. लेकिन अब जानकारी निकलकर सामने आ रही है कि इस समझौते में तुर्किय को भी शामिल कर लिया गया है. यह पैक्ट नाटो की तरह काम करेगा, यानी किसी भी एक सदस्य देश पर हमला पूरे ग्रुप पर हमला माना जाएगा. इसलिए इसे ‘इस्लामिक नाटो’  या ‘मुस्लिम नाटों’ कहा जा रहा है.

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सऊदी का पैसा, पाकिस्तान का न्यूक्लियर और तुर्किए की मिलिट्री

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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक़, इन तीनों देशों के बीच बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है. तीनों देशों के बीच समझौता इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें सऊदी अरब का खजाना, पाकिस्तान का परमाणु हथियार और तुर्किए की मज़बूत मिलिट्री पावर एक साथ आ रही है. आपको बता दें कि ये नाटो के आर्टिकल 5 जैसा है, जो तुर्किए पहले से ही फॉलो करता है क्योंकि वह नाटों का सदस्य है. वहीं, तुर्किए अब सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ पैक्ट में शामिल होने की कोशिश कर रहा है. अगर तुर्किए इसमें शामिल होता है तो यह तीन देशों का डिफेंस ब्लॉक बन सकता है.

तीन देशों की भूमिका साफ

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‘इस्लामिक नाटो’ बनने से पहले तीनों देशों की भूमिका भी लगभग साफ है. मतलब ये कि सऊदी अरब फ़ाइनेंशियल बैकिंग देगा, पाकिस्तान अपना न्यूक्लियर डिटरेंट, बैलिस्टिक मिसाइल और तुर्किए अपनी मिलिट्री एक्सपर्टीज, होमग्रोन डिफेंस इंडस्ट्री और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के साथ इस गठबंधन में शामिल होगा. 

भारत के लिए क्या होगी चुनौती?

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दुनिया में जो बदलाव देखा जा रहा है, इसके पीछे अमेरिका की बदलती पॉलिसी है. अमेरिका के कुछ निर्णयों ने दुनिया की राजनीति को बदल दिया है. वहीं, सवाल ये है कि तुर्किए, सऊदी अरब और पाकिस्तान जैसे देश एक साथ सैन्य समझौता कर रहे हैं, तो भारत के नज़दीक इसके क्या मायने होंगे? आपको पता है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक तनाव रहा, भारत ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की, जो अभी भी जारी है. वहीं, भारत और पाकिस्तान के तनाव के बीच तुर्किए खुलकर पाकिस्तान का समर्थन करता रहा. अब चुंकि ये तीनों देश आपस में सैन्य संगठन बना रहे हैं. तो ये भारत के लिए कहीं न कहीं एक नई चुनौती होगी. भारत इसे अपनी सिक्योरिटी के लिहाज़ से गंभीरता से ज़रूर लेगा. 

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