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दिल्ली में महाहुंकार, 19 साल बाद एक साथ दिखेंगे चारों शंकराचार्य, अब हो जाएगा असली नकली का फैसला?

19 साल बाद एक साथ एक मंच पर चारों शंकराचार्य के आने का मतलब होगा कि अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर अन्य शंकराचार्यों की सहमति. इसके बाद असली और नकली शंकराचार्य की बहस खत्म हो जाएगी.

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17 जनवरी को मौनी अमावस्या के मौके पर प्रयागराज में माघ मेला संगम तट के नजदीक घटित एक घटना ने पूरे देश की राजनीति को गरमा दिया है. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की मंडली और मेला में तैनात सुरक्षाकर्मियों के बीच जो कुछ भी हुआ, वह बहुत ही निंदनीय है. लेकिन सवाल ये कि गलती किसकी थी? क्या सुरक्षाकर्मियों ने शंकराचार्य के साथ दुर्व्यवहार किया? क्या शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने नियमों का उल्लंघन किया? या फिर माघ मेला में शंकराचार्य का स्नान राजनीति से प्रेरित था? ऐसे तमाम सवाल हैं जो 17 जनवरी की घटना के बाद उठ रहे हैं. क्योंकि कुछ साधु-संत अविमुक्तेश्वरानंद की आलोचना कर रहे हैं, कुछ इसे सपा-कांग्रेस के लिए बैटिंग करना बता रहे हैं, वहीं, कुछ तो अविमुक्तेश्वरानंद को फर्जी शंकराचार्य तक बताने लगे हैं. हाल ही में, पटना स्थित मातृ उद्बोधन आश्रम के डायरेक्टर सत्येंद्र जी महाराज ने तो ये कह दिया कि, ‘कोई अन्य शंकराचार्य माघ मेले में नहीं गया, सिर्फ अविमुक्तेश्वरानंद ही क्यों वहां पहुंचे?’  

क्या है पूरा मामला? 

इस पूरी घटना में कौन सही और कौन गलत है. इस नतीजे पर पहुंचने से पहले पूरी घटना को जानना बेहद जरूरी है. गौरतलब है कि17 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रयागराज माघ मेला में संगम घाट पर स्नान करने पहुंचे थे. पूरे लाव-लश्कर के साथ वह अपनी पालकी पर आए थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें बिना रथ के आगे बढ़ने को कहा. इसी बात पर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला व्यवस्था में जुटे कर्मचारियों के बीच विवाद हो गया. बाद में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके साथ यह व्यवहार जानबूझकर किया गया है. विवाद उस समय और बढ़ा, जब अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में ही धरने पर बैठ गए. बस देखते ही देखते ये मामला इतना बड़ा हो गया है कि अब एक मंच पर चारों शंकराचार्य के एक साथ आने की संभावना जताई जा रही है.

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19 साल बाद एक मंच पर होंगे शंकराचार्य?

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ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य पद को लेकर भी कई सवाल उठते रहे हैं. अब ऐसे में सवाल ये भी है कि इस तरह की बातें सिर्फ उनके विरोधियों द्वारा कही जाती हैं, या फिर वाक़ई इस बात में सच्चाई है? इसके ऊपर से भी बहुत जल्द ही पर्दा उठने वाला है. और फिर ‘दुध का दुध’ और ‘पानी का पानी’ हो जाएगा. दरअसल, खबर ये है कि चारों पीठ के शंकराचार्य 19 साल बाद एक मंच पर आ सकते हैं. 10 मार्च 2026 को दिल्ली में गो रक्षा को लेकर बड़ा आयोजन है. इसी अवसर प चारों शंकराचार्य के एक साथ एक मंच पर आने की संभावना है. आपको ये भी बता दें कि अविमुक्तेश्वरानंद को 2 पीठ का समर्थन पहले से प्राप्त है, तीसरी पीठ का समर्थन मिलने से असली-नकली का विवाद भी खत्म हो जाएगा. इसे ऐसे भी समझा जा सका है कि गो रक्षा विषय पर चारों शंकराचार्य का एक मंच पर आने का मतलब होगा अविमुक्तेश्वरानंद पर सभी शंकराचार्य की सहमति. 

इतिहास में तीसरी बार होगा ऐसा

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अगर दिल्ली का आयोजन अच्छी तरह से सफल होता है तो यह धार्मिक इतिहास में तीसरी बार होगा जब चारों पीठों के शंकराचार्य एक साथ एक मंच पर दिखेंगे, जो सनातन परंपरा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा. ग़ौरतलब हो कि गो रक्षा को लेकर पहले भी कई तरह कि आंदोलन हुए हैं और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी कई बार इस पर खुलकर बोल चुके हैं. 

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